'धर्मनिरपेक्ष भारत' में हिंदू की शराब खराब, ईसाई की शराब लाजवाब!

संदीप देव। आश्‍चर्य, कैथोलिक चर्च और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग देश में सरकार गिराने की खुली धमकी दे रहे हैं और इस पर न तो कहीं चर्चा है और न ही किसी तरह की सुगबुगाहट! तो यही है असली धर्मनिरपेक्ष भारत? केरल की कांग्रेस सरकार इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ मिलकर चल रही है। इस सरकार द्वारा शराब बंदी की घोषणा का हमें स्‍वागत करना चाहिए, लेकिन रुकिए और यह जान लीजिए कि केरल में शराब पर पूरी तरह पाबंदी को लेकर अरसे से केवल ईसाई और मुस्लिम संगठन ही क्‍यों आंदोलन कर रहे थे? वास्‍तव में यह पूरी तरह से बिजनस और धर्म का 'कॉकटेल' तैयार कर खेला गया खेल ज्‍यादा लगता है!

 

इसे समझ लीजिए फिर सरकार के निर्णय का स्‍वागत कीजिए या विरोध, यह आपकी मर्जी है! एक बात और, वहां के कैथोलिक चर्च ने खुलेआम सरकार को धमकी दी है कि यदि शराबबंदी योजना को शीघ्र लागू नहीं किया गया तो वह सरकार को गिरा देंगे! आखिर ऐसा क्‍यों जबकि चर्च तो अपनी प्रार्थना सभाओं में वाइन का इस्‍तेमाल खुलकर करता है? वहीं सरकार की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग इस्‍लाम में शराबबंदी का हवाला दे रही है!

दूसरी तरफ सच्‍चाई यह है कि केरल को 'शराब मुक्त राज्य' बनाने के मद्देनजर सूबे की सरकार द्वारा यहां के जिन 730 बार को बंद किया गया है, उनमें से 90 फीसदी हिंदुओं के बार थे। वहीं इसके बावजूद जिन 16 पांच सितारा होटल और 344 सरकारी दुकानों में शराब मिलती रहेगी, वह पूरा व्‍यवसाय ईसाई और मुस्लिम समाज के ठेकेदारों के हाथों में है! एक बात और, शराबबंदी के बावजूद चर्च की प्रार्थना सभा में पहले की ही तरह वाइन परोसी जाती रहेगी! केरल के कैथोलिक चर्च के मुख्य पादरी फ्रांसिस कल्लाराकल ने प्रार्थना में वाइन के इस्तेमाल को ईसाइयों की आस्था से जुड़ी बताते हुए कहा है कि यह तब तक चलती रहेगी जब तक यह दुनिया कायम है!

अब या तो राज्‍य में शराब पूरी तरह से बंद हो या न हो! इस आधे-अधूरे ढंग से शराबबंदी का निशाना केवल हिंदू समुदाय क्‍यों बने? सरकार अपने ठेके और पांच सितारा होटल सहित चर्चों की धार्मिक सभा में भी सरकार बंदी कराए, तभी वह संविधान में वर्णित 'कानून सबके लिए समान' की धारणा को चरितार्थ कर पाएगी! हद देखिए, चर्च में भी शराब बंद हो, जब ऐसी मांग वहां के हिंदू संगठनों ने किया तो चर्च के पादरियों ने इसे सांप्रदायिक सोच करार दिया! हद है! अब यह भारत ही है, जहां अल्‍पसंख्‍यक समुदाय को अपने हिसाब से किसी को भी सेक्‍यूलर तो किसी को कम्‍यूनल साबित करने का अधिकार है और वोट के लिए 'स्‍वान' की तरह लाड़ टपकाते देश भर के नेताओं का उन्‍हें समर्थन भी हासिल है।!

केरल में पिछड़े हिंदुओं के संगठन 'श्री नारायनाद धर्म परिपालना योगम' के नेता वेलापल्ली नातेशन ने सरकार के निणर्य को हिंदुओं के व्‍यवसाय को नष्‍ट करने वाला करार देते हुए कहा है कि ''सरकार का यह कदम सीधे तौर पर शराब के बिजनस से जुड़े हिंदुओं को नुकसान पहुंचाने के लिए उठाया गया कदम है। कानून कुछ इस तरह से लागू किया गया है कि 'जो बार बंद हो चुके हैं वह हिंदुओं के थे और जो खुले हैं वह ईसाइयों के हैं।'

वहीं उच्च हिंदुओं के संगठन 'नायर सर्विस सोसायटी' के हिंदू नेता जी. सुकुमारन नायर ने भी सरकार के फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए कहा है कि 'शराब मुक्त केरल' पर सरकार का फैसला ईसाई और मुस्लिम सहयोगियों के दबाव में लिया गया है!

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