प्रधानमंत्री के नाम पत्र: ओबामा द्वारा भारत को दी गई नसीहत मुझे स्‍वीकार नहीं

नई दिल्‍ली। ओबामा द्वारा भारत व हिंदू धर्म को दी गई नसीहत कम से कम मुझे तो स्‍वीकार नहीं है। मैं मोदी सरकार को सलाह देना चाहता हूं कि यदि आपने धर्मांतरण विरोधी कानून, गो हत्‍या बंदी कानून और समान नागरिक संहिता कानून के लिए प्रयास नहीं किया तो आपका मूल मतदाता आपसे छिटक जाएगा, जो कि दिल्‍ली चुनाव में साफ नजर आ रहा है।

आप न तो सर्वधर्म समभाव के आधार पर क्रिश्चिनिटी यानी यूरोप-अमेरिकी बिरादरी को समझा सकते हैं और न ही भारत के सुन्‍नी-बहाबी कटटर मुस्लिम ही कभी आपके वोटर हो सकते हैं। कश्‍मीर घाटी से लेकर दिल्‍ली में ईसाइयत-इस्‍लाम के एकतरफ फतवे तक से आपको सबक लेना चाहिए। प्‍लीज जिसे आपने बराक कहा था, उससे सीखिए जो भारत से प्रस्‍थान करते ही हमारी तुलना सीरिया और इराक से करते हुए हमें नसीहत दे रहा है। आप जानते हैं कि अमेरिकी सरकार ईसाइयत के प्रचार व विस्‍तार के लिए अलग से मंत्रालय चला रही है और हमें सहिष्‍णुता की नसीहत दे रही है।

सचिन तेंदुलकर जब तक फ्रंट फुट पर खेलते थे, रन बनाते थे। लेकिन बैकफुट पर पहुंचते ही आउट हो जाते थे। इसलिए अपनी असली ताकत को पहचानिए, अपने मूल मतदाताओं के असंतोष को कम करने की कोशिश कीजिए। ईसाइयत और इस्‍लाम श्रेष्‍ठता दंभ से पीडि़त है, उसे सर्वधर्म समभाव का दर्शन नहीं सुहाता है।

आपने ही अपनी पुस्‍तक 'सामाजिक समरसता' में लिखा है न कि यूएनओ के सर्वधर्म समभाव वाले प्रस्‍ताव को खारिज करवाने पोप के प्रतिनिधि वहां पहुंच गए थे और कहा था कि ''ईसाई धर्म औरों से श्रेष्‍ठ है, हम समानता के विचार को नहीं मानते हैं।'' जब आप अपनी पुस्‍तक में यह लिख सकते हैं तो फिर आज आपको यह स्‍वीकार करते हुए संकोच क्‍यों हो रहा है कि मूल हिंदू ही आपकी असली ताकत हैं। एक हिंदू राष्‍ट्रवादी को मार्क्‍स-मसीह-मोहम्‍मद की विचारधारा कभी भी स्‍वीकार नहीं कर सकती है।

बिल क्लिंटन के कार्यकाल में अमेरिकी सरकार ने ईसाइयत के प्रचार के लिए यूएसएड नामक विभाग की स्‍थापना 1998 में एक कानून बनाकर की थी। अपने धर्म ईसायत के प्रचार के लिए मंत्रालय बनाकर काम करने वाला अमेरिका आज सीरिया और इराक के समक्ष रखकर हमें सहिष्‍णुता की नसीहत दे रहा है। और यह इसलिए कि दुनिया में एक मात्र जिस भारत देश में हिंदू धर्म सांस ले रहा है, उसे अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर दबाया जा सके ताकि ईसायत व इस्‍लाम यहां विस्‍तार पा सके। वैसे भी हम सिमट ही रहे हैं।

जब ओबामा अपने धर्म के विस्‍तार के लिए भारत को दबाने की चेष्‍टा कर सकता है, उन्‍हीं की डेमोक्रेट पार्टी वाली सरकार ईसाई धर्म के प्रचार के लिए सरकारी मंत्रालय का गठन कर सकती है तो आपको सर्वधर्म समभाव की इतनी चिंता क्‍यों सता रही है...।

मैं वही बात कह रहा हूं जो आपने गुजरात का मुख्‍यमंत्री रहते अपनी पुस्‍तक 'सामाजिक समरसता' में धर्मांतरण को लेकर लिखा है, इसलिए प्‍लीज जो लिखा है उसी को अपना आचरण बनाइए और अपने मूल मतदाताओं को पहचानिए, इससे पहले की बहुत देर हो जाए...

भवदीय
संदीप देव

Web Title: Obama smacks down India for religious intolerance

Keywords: Religious intolerance in India would have shocked| बराक ओबामा| नरेंद्र मोदी| हिंदू धर्म| धर्म|सांप्रदायिकता