मुझे गाली देने से पहले, अपने संगठन के महापुरुषों के लिखे को ही ठीक से पढ लें!

संदीप देव। मैं हर किसी पर आपको हमलावर दिखूुंगा तो केवल इसलिए कि मैं सच को जानता, समझता और उसे उसी रूप में लिखने की हिम्‍मत रखता हूं। सच किसी के हिसाब से नहीं चलता। मीडिया, कांग्रेस, केजरीवाल को गाली देना यदि किसी को अनुकूल लगता है तो वो मेरा स्‍वागत करते हैं और हिंदुवादी संगठन की सच्‍चाई बताना जिन्‍हें प्रतिकूल लगता है तो वो केवल आलोचना तक नहीं रुकते, गाली तक देते हैं।

मैं इनमें से किसी से कम हिंदू नहीं हूं और प्‍लीज कोई मुझे हिंदू धर्म सिखाने की कोशिश न करें। मैं आप लोगों की तरह झंडा नहीं उठाता, इसका मतलब यह नहीं है कि हिंदू धर्म के प्रति मेरी समझ आप सभी से कम है। मैं दोहरा चरित्र नहीं रखता, जैसा कि कुछ लोगों का दोगलापन देखकर लगता है। सच केवल सच होता है, और वह किसी का नहीं होता। सच के लिए राजा हरिश्‍चंद्र ने अपनी पत्‍नी बच्‍चे को नीलाम कर दिया था और आज यहां ऐसे लोग हैं जो अपने हरिश्‍चंद्र जैसे महापुरुष से कुछ सीखने की जगह भेड़ बने रहने में अपनी शान समझते हैं।

हिंदूवादी संगठनों की सच्‍चाई बाहर लाने पर मुझे गाली देने वालों से मैं कहूंगा कि कल दीनदयाल उपाध्‍याय जी का जन्‍मदिन था। आपमें से कितने लोगों ने उन्‍हें ठीक ढंग से पढा, उन्‍हें समझा और उन्‍हें जीवन में उतारा है। कितने लोग यह जानते हैं कि दीनदयाल जी की मुगलसराय में हुई हत्‍या में संघ व भाजपा से जुड़े किन किन लोगों का नाम तब सामने आया था, संघ से जुड़े वह कौन कददावर लोग थे, जिन्‍होंने दीनदयाल उपाध्‍याय जी की हत्‍या की जांच को रुकवाना चाहा था।

आप सभी को संघ के पदाधिकारी व कभी जनसंघ के फाउंडर सदस्‍यों में एक रहे बलराज मधोक जी की आत्‍मकथा 'जिंदगी का सफर' पढ़ना चाहिए। तीन खंडों में है। उन्‍होंने दीनदयाल जी की हत्‍या में संघ व भाजपा के कुछ उन कददावर चेहरों को बेनकाब करना चाहा था, जिसके बाद से उन्‍हें वनवास पर भेज दिया गया। आज भी 95 वर्ष की आयु में वह इसके चौथे खंड को पूरा करने में जुटे हुए हैं। दिल्‍ली में ही रहते हैं, जाकर मिलिए।

अंत्‍योदय-अंत्‍योदय चिल्‍लाने वालों ने दीनदयाल जी को किस तरह नेस्‍नाबूत किया यह जानिए, यदि सचमुच आपको अपने संगठन के प्रति निष्‍ठा है। मैं बार बार कहता हूं स्‍वतंत्र बनिए, न कि किसी संगठन की चाकरी कीजिए...। सच वही नहीं होता, जो दिखता है, बल्कि जो दिखता है उसे केवल दिखाए जाने की कोशिश की जाती है। जो लोग हिंदूवादी होने का दावा करते हैं, वह अपने संगठन के उन महान विचारकों व व्‍यक्तियों द्वारा लिखी गई पुस्‍तकों को पढें, न कि मूर्ख भेड़ की तरह खडडे में गिरने के लिए आंख बंद कर आगे बढते रहें...

Web Title: sandeep-deo-blogs27

Keywords: हिंदुवादी संगठन| हिंदू| आरएसएस| संघ| राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ| अंत्‍योदय| दीनदयाल उपाध्‍याय