पत्रकार-दलाल-नौकरशाह-कारपोरेट गठजोड़ पिछले 10 वर्षों से लूट रहा है देश को!

संदीप देव। पेट्रोलियम मंत्रालय में पिछले कई वर्षों से जिस तरह जासूसी का खेल चल रहा था, उसका पर्दाफाश यह दर्शाता है कि मीडिया-दलाल-नौकरशाह-कंपनियों का नेक्‍सस किस तरह गहराई तक देश को घुन की तरह खा रहा था। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक ने कई बार सवाल उठाया, लेकिन यूपीए सरकार तो इनकी खुले तौर पर मदद कर रही थी।

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसों ने झूठ की बुनियाद पर अपनी राजनीति चमकाने के लिए जिस मोदी सरकार को रिलायंस का एजेंट बताया था, वही मोदी सरकार इन सारे नेक्‍सस को खोलने में जुटी हुई दिखती है। पहले मुकेश अंबानी के रिलायंस कंपनी पर 600 करोड़ का जुर्माना और अब पेट्रोलियम मंत्रालय में उनके जासूसों का पर्दाफाश मोदी सरकार ने ही किया है। यूपीए सरकार के समय तो इसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता था, उल्‍टा रिलायंस कंपनी के फेवर में जयपाल रेडडी को पेट्रोलियम मंत्री पद से हटाने का मामला सामने आया था।

अमीरों का विरोध करने जैसे रोबिनहुड की कृत्रिम छवि गढने वाले अरविंद केजरीवाल ने तो अनिल अंबानी की बिजली कंपनी बीएसईएस को सब्सिडी के जरिए 300 करोड़ का फायदा पहुंचा कर कारपोरेट दलाली का खुला खेल भी खेला, 1 लाख 63 हजार करोड़ के जमीन घोटाले में लाभान्वित हुई जीएमआर कंपनी से 'पर्सन ऑफ द ईयर' का पुरस्‍कार भी लिया और अपनी ईमानदारी का जमकर ढोल भी पीटा। केजरीवाल को पता है कि भारत पाखंडियों का देश है। यहां 'करो कुछ और दिखाओ कुछ' की संस्‍कृति है, इसलिए जनता को इसी तरीके से मूर्ख बनाया जा सकता है।

जिस तरह से कारपोरेट से संबंध और शूट पहनने जैसे छिछले मामले को लेकर मोदी सरकार को बदनाम करने का खेल चल रहा है, उसका कारण भी स्‍पष्‍ट है। पेट्रोलियम जासूसी प्रकरण में एक पत्रकार भी गिरफतार हुआ है, 2जी घोटाले में बड़े-बड़े संपादक, पत्रकारों की दलाली खुलकर सामने आ चुकी है, कोलगेट में मीडिया कंपनियां कोयला खदान अपने नाम कराने में सफल हो चुकी हैं, कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स घोटाले में मीडिया कंपनियों का नाम सामने आ चुका है। कारपोरेट-मीडिया की यही बिरादरी फिर से यूपीए सरकार की वापसी चाहती है ताकि 10 साल से दलाली का जो खेल चल रहा था और पिछले 9 महीने से जो रुक गया है, वह फिर से जारी हो सके।

आज स्थिति यह है कि मोदी सरकार में पत्रकार मंत्रालय तक पहुंच नहीं पा रहे हैं। मेरे कई वरिष्‍ठ पत्रकार मित्र हैं जो बताते हैं कि संदीप खबर निकालना तक मुश्किल हो गया है। मंत्रालय में एंट्री तक बंद है। पेट्रोलियम जासूसी में पत्रकारों की संलिप्‍तता दिखाती है कि पत्रकार किस कदर घिनौना होता जा रहा है। यदि यह पत्रकार खबर लिखने के लिए दस्‍तावेज चुराता तो समझ में भी आ सकता था, लेकिन यह तो कंपनी के दलालों के साथ पकड़ा गया है।

तात्‍पर्य यह कि पत्रकार खुलेआम कारपोरेट कंपनियों के लिए दलाली कर रहे हैं, जिस पर मोदी सरकार के बाद से लगाम लगना शुरू हो गया है। इसके बदले मीडिया, कारपारेट, रोबिन हुड अरविंद केजरीवाल, मेधा पाटकर, ग्रीनपीस जैसे कारपोरेट के पक्ष में खेल खेलने वाले एनजीओ ब्रिगेड और कांग्रेस पार्टी इस सरकार को हर हाल में बदनाम करने में जुटी हैं ताकि ईमानदार सरकार बदनाम हो जाए और बेईमानों की सत्‍ता फिर से वापस आ जाए। ताकि बेईमानी का खुला खेल अनवरत जारी रहे।

आखिर जनता को कैसे समझाया जाए, क्‍योंकि यहां तो वही चलता है जो पाखंड है...। इन्‍हीं पाखंडियों के कारण तो महात्‍मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका से आने के बाद सूट-पैंट छोड़कर अधनंगा फकीर का भेष धारण करना पड़ा था और केवल तीन लोगों की मौजूदगी वाले फर्स्‍ट क्‍लास के रेलवे डिब्‍बे के बाहर थर्ड क्‍लास लिखवा कर देश भ्रमण करना पड़ा था...

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Keywords: पेट्रोलियम जासूसी| Petroleum document leak

पेट्रोलियम जासूसी पूरे मामले की जानकारी:

http://khabar.ndtv.com/news/business/espionage-case-5-senior-officials-of-energy-companies-arrested-741218

http://www.jansatta.com/national/information-theft-finance-foreign-ministry-sebi-alert-budget-speech-leak/17833/

http://abpnews.abplive.in/ind/2015/02/21/article507735.ece/Petroleum-document-leak-12-people-arrested