दोहरा चरित्र अपनाने में हिंदू संसार में सबसे अव्‍वल हैं!

संदीप देव। भारत के हिंदू अपने आप को सेक्‍यूलर साबित करने के लिए दोहरा चरित्र अपनाने में संसार में सबसे अव्‍वल हैं। जबकि दूसरी तरफ कुछ ऐसे हिंदू हैं, जो अपने धर्म के लिए व धर्म के अनुरूप काम तो नहीं करते, लेकिन चिल्‍लाते इतना हैं कि लगता है पूरी दुनिया में केवल हिंदू धर्म के लोग ही काम कर रहे हैं, बांकी तो सोए पड़े हैं। जबकि सच्‍चाई यह है कि इसाई व मुसलमान अपने धर्म के लिए इनसे कहीं अधिक जागरूक, आक्रामक और जुझारू हैं। इस्‍लाम और ईसायत को मानने वाले अपने पंथ के प्रति पूरी तरह से वफादार हैं और उसे विस्‍तार देने में साम-दाम-दंड-भेद सभी नीतियों का पालन करते हैं। यह अलग बात है कि यह चतुर्नीति राष्‍ट्र को एक सूत्र में पीरो कर मजबूत बनाने वाले सनातनी आचार्य चाणक्‍य ने दिया था।

इन दोहरे चरित्र वाले सेक्‍युलर हिंदुओं और चिल्‍लाने वाले मूर्ख हिंदुओं को पता होना चाहिए कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति ओबामा से लेकर पूरा यूरोपियन इसाई देश और भारत के अंदर का इसाई समुदाय पहली बार खुद को हिंदू राष्‍ट्रवादी कहने वाले प्रधानमंत्री की सरकार को दबाव में लाने की लगातार कोशिश कर रहा है ताकि गो वध बंदी व धर्मांतरण विरोधी कानून किसी भी तरह पास न हो सके।

पूरी दुनिया में सबसे अधिक मानवाधिकार का हनन करने वाले अमेरिका की पिछलग्‍गू ह्यूमन राइट्स ग्रुप एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट जारी कर मोदी सरकार को इतना कोसा है कि लगता है यह सरकार 9 महीने नहीं, बल्कि 9 साल से इस देश में चल रही है और मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि इसाई व इस्‍लाम के दुश्‍मन हैं।

ह्यूमन राइट्स ग्रुप एमनेस्टी इंटरनेशनल की साल 2015 की जारी ऐनुअल रिपोर्ट में मोदी सरकार की जमकर आलोचना की गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान सांप्रदायिक हिंसाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार के शासन के दौरान सांप्रदायिक हिंसाएं घटने की बजाए बढ़ी हैं. उनके शासनकाल में उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में सांप्रदायिक हिंसा में बढ़ोतरी हुई. साथ ही भ्रष्टाचार, जाति आधारित भेदभाव के अलावा जातिगत भेदभाव जैसी हिंसाएं फैली हैं.

सांप्रदायिक हिंसा का जिक्र करते हुए कहा गया है, 'चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक घटनाएं हुईं, जिससे हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव पैदा हो गया. रिपोर्ट में कहा गया कि मोदी सरकार के दौरान नेताओं की जुबान भी बेलगाम रही है, कुछ नेताओं पर भी भड़काऊ भाषण देकर हिंसा भड़काने की कोशिश के आरोप लगे. रिपोर्ट के मुताबिक 'दिसंबर में हिंदू संगठनों पर कई मुस्लिम और ईसाइयों को जबरन हिंदू धर्म में शामिल करने का भी आरोप लगा था.

सोच कर हैरानी होती है कि केवल 9 महीने की सरकार को राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर किस तरह से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और इस सबके मूल में धर्म है। समाजशास्‍त्र का विद्यार्थी हूं इसलिए जानता हूं कि इसायत व इस्‍लाम को मानने वाला अपना हर कदम अपने पंथ को सोच कर ही उठता है।

तय मानिए अगले पांच साल में मोदी सरकार को अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर इतना बदनाम कर दिया जाएगा कि मोदी 2019 के बाद नजर भी नहीं आएंगे और इसमें सबसे बड़ी भूमिका हिंदुओं की होगी, जिनकी सोच ही यूरोप-अमेरिका-अरब की सोच से बनता है।

सेक्‍यूलर हिंदू और दोगले में कोई फर्क नहीं है... । कम से कम दोगले हिंदुओं से कई गुना बेहतर मुसलमान व इसाई हैं, जो अपने पंथ के प्रति पूरी तरह से वफादार है। हिंदू के तो खून में ही जयचंद कुलांचे मारता रहता है, वर्ना 70 प्रतिशत की जनसंख्‍या वाला यह समुदाय आज तक इस कदर प्रताडि़त नहीं होता रहता। हजार साल तक गुलामी की भटटी में जलने के बावजूद सेक्‍यूलरिज्‍म और चिल्‍लाने की गदह नीति को अपनाए रखना ही पाखंडी हिंदुओं की पहचान है।

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