यह जम्‍मू-कश्‍मीर के बंटवारे की पटकथा तो नहीं!

संदीप देव। जम्‍मू कश्‍मीर में भाजपा-पीडीपी के बीच गठबंधन का बहुत ज्‍यादा विरोध भी हो रहा है और समर्थन भी। मुझे लगता है मौका दिया जाना चाहिए, क्‍योंकि आप दिल्‍ली में बैठकर विरोध तो कर रहे हैं लेकिन 1990 के बाद आपमें से किसी ने कश्‍मीरी पंडितों के दर्द को न झेला है, न समझा है। लेकिन मुझे लगता है कि उजड़े हुए कश्‍मीरी पंडितों को घाटी में बसाने वाली यह पहली सरकार आई है, अन्‍यथा कोई उनकी सुध नहीं लेता था। उनकी बात करना भी सांप्रदायिकता के खांचे में आता था। यह तय मानिए कि कश्‍मीर की घाटी को नेहरू से लेकर आज तक के सेक्‍यूलरवादियों ने इतना उलझा दिया है कि बिना जनसंख्‍या में बदलाव लाए, बिना नया प्रयोग किया सीधे सीधे आप वहां से 370 नहीं हटा सकते हैं। 65 साल इंतजार किया है, तो थोड़ा और इंतजार करने में अर्धर्य क्‍यों हो रहे हैं...

मैं जनसंघ का पहला घोषणा पत्र पढ़ रहा था, जिसमें जम्‍मू-कश्‍मीर को लेकर बड़ा की खूबसूरत फॉर्मूला दिया गया था, जो मुझे उचित लगता है। उस घोषणा पत्र को डॉ श्‍यामाप्रसाद मुखर्जी के कहने पर बलराज मधोक ने तैयार किया था। उस फॉर्मूला के तहत जम्‍मू व लददाख के लोग धारा- 370 की समाप्ति चाहते हैं, इसलिए इन्‍हें मिलाकर एक स्‍वतंत्र राज्‍य बना देना चाहिए, जो धारा 370 से पूरी तरह से मुक्‍त होगा।

इसके बाद केवल घाटी बचेगा जहां धारा 370 लगा रहे। धारा 370 के कारण घाटी का अविकास तो दिख ही रहा है, जब 370 के बिना जम्‍मू-लदाख में विकास होगा तो घाटी के लोग भी देर सवेर धारा 370 को हटाने की मांग के लिए सडक पर उतरेंगे और यही वह मौका होगा जब घाटी से भी 370 को हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

मुझे लगता है भाजपा ने तत्‍काल श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी के सिद्धांतो से समझौता तो किया है, लेकिन इसका दूरगामी परिणाम होगा, जिसके बारे में आप हम सोच भी नहीं पा रहे हैं। सरकार चली तो भी और नहीं चली तो भी, कल जो हुआ उसका परिणाम वह होने वाला है जो लोगों की सोच से परे है। संभव है जम्‍मू-कश्‍मीर को अलग अलग राज्‍यों की ओर बढने के लिए यह कदम सार्थक हो। महाभारत में हस्‍तीनापुर के बंटवारे ने ही बाद में पूरे आर्यावर्त को एक झंडे के नीचे लाने की नींब रखी थी।

जम्‍मू-कश्‍मीर में जो कुछ चल रहा है, कोई भी राष्‍ट्रवादी उसका समर्थन तो नहीं ही कर सकता है, लेकिन संभव है यह कश्‍मीर से अलग काटकर जम्‍मू व लदाख को जोड़कर एक नए राज्‍य का मार्ग प्रशस्‍त करे। यदि मोदी सरकार जनसंघ के पहले घोषणापत्र के अनुरूप चली तो निश्चित रूप से जम्‍मू-लददाख को जोड़कर एक अन्‍य राज्‍य के निर्माण का इससे अच्‍छा अवसर नहीं मिल सकता है। जम्‍मू-लददाख के नागरिक घाटी के अलगाववावदियों के साथ बहुत पिस गए, अब नहीं। प्‍लीज PMO India Narendra Modi & Amit Shah जी जनसंघ के पहले घोषणा पत्र का ध्‍यान कीजिए और पीडीएफ को एक दो और अलगाववादी कदम उठाने का मौका दीजिए ताकि जम्‍मू-लददाख के लोगों के सही प्रतिनिधित्‍व के लिए अलग राज्‍य के निर्माण का मार्ग प्रशस्‍त किया जा सके।

एक झंडा, एक निशान, एक विधान में वक्‍त लगेगा, लेकिन सेक्‍यूलरिज्‍म के नाम पर देश भर में जो गंदगी चल रही है, उसके बीच मैं इसे ठंडी बयार कहूंगा। तय मानिए यह निर्णय सेक्‍यूलरों को नेस्‍तनाबूत करेगा...। हो सकता है भविष्‍य में मैं गलत साबित होऊं, लेकिन अभी तो मुझे यह उचित प्रतीत हो रहा है, दूरदृष्टि के हिसाब से...

Web Title: Article 370-The untold story-2

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