तो कौन-सी गलत बात कह दी बाबा रामदेव ने, राजदीप सरदेसाई और तीस्‍ता सीतलवाड़ जैसों को क्‍या बिना लॉबिंग के पद्म पुरस्‍कार मिला था?

संदीप देव, नई दिल्‍ली। बाबा रामदेव पर एक बार फिर से मीडिया हमलावर है। पद्म पुरस्‍कारों को लेकर जो बात सत्‍ता के गलियारे से लेकर देश की जनता तक जानती है, उसे यदि स्‍वामी रामदेव ने कह दिया तो इसे विवाद बनाकर मीडिया लगातार उन पर हमला कर रही है। स्‍वामी रामदेव ने यह कहा कि पद्म पुरस्‍कारों से लेकर नोबल पुरस्‍कार तक अच्‍छे लोगों को मिलते हैं, लेकिन कुछ मामलों में लॉबिंग भी होती है। पद्म पुरस्कार कई बार उन लोगों को मिलते हैं जिनका राजनीतिक गलियारों में असर होता है, तो इसमें कौन सी झूठ बात कह दी बाबा ने जो मीडिया को मिर्ची लगी हुई है?

दरअसल मीडिया हर बार बाबा रामदेव के बहाने मोदी सरकार को टारगेट करती है और इस बार भी यही हो रहा है। देश के एक बड़े खबरिया न्‍यूज चैनल ने तो बकायदा खबर चलाया कि नरेंद्र मोदी समर्थक बाबा रामदेव ने मोदी सरकार द्वारा दिए गए पद्म पुरस्‍कारों पर उठाया सवाल। जबकि स्‍वामी रामदेव ने आजादी के बाद से पुरस्‍कार की अब तक की चली आ रही प्रक्रिया के एक हिस्‍से की सच्‍चाई बतायी थी। इसे कौन नहीं जानता है? कोई खुलकर तो इसे स्‍वीकारे? 

देश में पिछले करीब 60 साल से कांग्रेस सत्‍तासीन रही है और उसने न केवल पद्म पुरस्‍कारों को, बल्कि भारत रत्‍न तक को अपनी गंदी राजनीति का शिकार बनाया है, लेकिन आज तक मीडिया ने कभी कांग्रेस से सवाल नहीं पूछा। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अकेले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनके प्रधानमंत्री रहते एक नहीं, बल्कि दो-दो युद्ध में देश हारा। पाकिस्‍तान ने कबाइलियों के सहयोग से जब कश्‍मीर पर हमला किया तो नेहरू माउंटबेटेन के कहने पर उसे संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ में ले गए। इसके कारण पाकिस्‍तान के कब्‍जे में आया कश्‍मीर भारत के हाथ से जो निकला, वह अभी तक निकला ही हुआ है।

इसी तरह 1962 में जब चीन ने भारत पर हमला कर नेहरू के 'पंचशील' सिद्धांत और 'हिंदी-चीनी भाई-भाई' नारे की पूरी धज्‍जी उड़ा कर रख दी। सबसे बड़ी बात तो यह कि उस वक्‍त भारतीय सेना युद्ध के लिए किसी भी तरह तैयार नहीं थी। उसके अस्‍त्र-शस्‍त्र पुराने थे। उस समय रक्षा मंत्री कृष्‍णा मेनन थे। नेहरू सरकार ने उस वक्‍त इतना बड़ा घोटाला किया था कि आप चौंक जाएंगे। दस्‍तावेज और नक्‍शे में चीन की सीमा तक सड़क का निर्माण दिखाया गया था, सड़क निर्माण के लिए फंड भी सरकार ने आवंटित किया था, लेकिन जब सैनिक उस जगह पहुंचे तो पाया कि नक्‍शे में जहां सड़क दिखाई गई है, वहीं कभी सड़क बनी ही नहीं।

चीन ने बोमडिला तक का सारा क्षेत्र अपने कब्‍जें में ले लिाय और एक तरफा युद्ध विराम की घोषणा कर दी। तत्‍कालीन बेशर्म प्रधानमंत्री ने संसद में कहा, ''चीन ने जिस क्षेत्र पर कब्‍जा किया है, वह 'नो मैन लैंड' है। वह एकदम उजाड़ है।'' लेकिन चीन की सीमा तक सड़क नहीं बनवाने वाले ऐसे जवाहरलाल नेहरू ने चीन युद्ध से सात साल पहले सन 1955 में खुद को  भारत रत्‍न घोषित करते हुए पुरस्‍कार हासिल कर लिया था!

1971 में पाकिस्‍तान ये इंदिरा गांधी के नेतृत्‍व में भारत ने युद्ध जीता, लेकिन सबसे बड़ी बात यह हुई कि शिमला समझौते के टेबल पर भारत पुन: हार गया। युद्ध के मैदान में सैनिकों ने जिस कुर्बानी को देकर पाकिस्‍तान को हराया था, उसके दो टुकड़े करते हुए बंग्‍लादेश का निर्माण किया था, इंदिरा गांधी ने उस पाकिस्‍तान को न केवल उसकी पूरी हारी हुई जमीन वापस कर दी, बल्कि बंग्‍लादेशी शरणार्थी समस्‍या का समाधान भी नहीं किया। आज जाकर मोदी सरकार के कार्यकाल में  बांग्‍लादेश से जुड़ा सीमा विधेयक पास हुआ है।

इतना ही नहीं, पाकिस्‍तान को लाहौर तक की जमीन वापस देने के एवज में इंदिरा गांधी ने पाक द्वारा कब्‍जाए कश्‍मीर को भी वापस नहीं लिया। इतिहास की पुस्‍तकें गवाह है कि भारतीय सेना इंदिरा गांधी-भुट्टो के बीच हुए शिमला समझौते के वक्‍त गुस्‍से से उफन रही थी। युद्ध के मैदान में जीती हुई जमीन को समझौते के टेबल पर हारने वाली इंदिरा गांधी ने जीत के बाद खुद को उसी वर्ष सन 1971 में भारत रत्‍न घोषित कर लिया था!

अपातकाल के बाद मोरारजी सरकार द्वारा पारित होने जा रहे धर्मांतरण विरोधी कानून को रोकने वाली कैथोलिक नन और मिशनरी ऑफ चेरेटी की संस्‍थापक मदर टेरेसा को भी 1980 में भारत रत्‍न दिया गया था। जनता पार्टी की सरकार के विदा होते ही आखिर इंदिरा गांधी मदर टेरेसा पर इतनी मेहरबान क्‍यों हुई। क्‍या यह सच नहीं है कि जनता पार्टी की सरकार में धर्मांतरण विरोधी कानून को रुकवाने में सफल होने पर मदर टेरेसा को भारत रत्‍न दिलाने के लिए वेटिकन चर्च ने लॉबिंग की थी?

भोपाल गैस कांड के आरोपी एंडरसन को देश से निकालने में मदद करने वाले, बोफोर्स घोटाला में क्‍वात्रोच्चि को बचाने के आरोपी और श्रीलंका में शांति सेना भेजने का खामियाजा अपनी जान देकर भुगतने वाले राजीव गांधी को सन 1991 में कांग्रेस सरकार ने भारत रत्‍न से नवाजा था। क्‍या नरसिम्‍हा राव मंत्रीमंडल में शामिल गांधी परिवार के चाटुकार मंत्रियों ने लॉबिंग नहीं की थी?

बाबा रामदेव जिन पद्म पुरस्‍कारों की बात कह रहे हैं, उनमें 2004 से लेकर 2013 तक यूपीए सरकार ने हर उस एनजीओकर्मी, न्‍यायविद और पत्रकार को पद्म पुरस्‍कार दिया, जिसने गुजरात के पूर्व मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए कांग्रेस के पक्ष में चालें चलीं। चाहे वह बरखा दत्‍त हो, राजदीप सरदेसाई हो या फिर तीस्‍ता सीतलवाड़! इन सभी की उपलब्धि केवल गुजरात दंगे में कांग्रेस को खुश करने वाले की रही है। क्‍या बिना लॉबिंग के इन लोगों को पद्म पुरस्‍कार मिला था? बाबा रामदेव यही तो कह रहे हैं! वह और क्‍या कह रहे हैं?

यहां तक की सोनिया गांधी की 'मनमोहनी सरकार' के दौरान एक साथ एक ही मीडिया हाउस के कई-कई लोगों को पद्म पुरस्‍कार बांटा गया था, तब मीडिया खामोश क्‍यों थी? लॉबिंग के न्‍यूज को क्‍यों नहीं उछाल रही थी? दरअसल मीडिया की सबसे बड़ी चिंता मोदी सरकार को घेरने की है, क्‍योंकि देश का इतिहास गवाह है कि जब-जब कांग्रेस की सरकार के इतर कोई अन्‍य सरकार इस देश में बनी है, दिल्‍ली की मीडिया उसे गिराने, उसे बदनाम करने और उसे गरीब विरोधी दर्शाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा देती है!

स्‍वामी रामदेव ने लोकसभा चुनाव से पूर्व खुलकर नरेंद्र मोदी की वकालत की थी, उन्‍हें प्रधानमंत्री के उम्‍मीदवार के रूप में समर्थन दिया था और उनके पक्ष में देश भर में सभा-रैली की थी। लोकसभा का परिणाम 16 मई 2014 में आया और बाबा रामदेव ने सितंबर 2013 में ही अपने भारत मंथन से निकले अनुभव के आधार पर कह दिया था कि मोदी के नेतृत्‍व में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलेगी और एनडीए को 300 से अधिक सीटें आएंगी और कांग्रेस 50 के नीचे सिमट जाएगी। परिणाम आया तो अक्षरश: यही हुआ! कांग्रेस के नेताओं, गांधी परिवार के चाटुकारों और कांग्रेस समर्थित मीडियाकर्मियों  के पेट में तब से जो दर्द उखड़ा है, वह आज तक ठीक नहीं हुआ है और न ही 2019 तक उसके ठीक होने की कोई गुंजाइश ही दिखती है!

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बेहद मिलनसार और देश पर सबकुछ न्‍यौछावर करने वाले संत हैं बाबा रामदेव

वैदिक के बाद अब आसान निशाना हैं बाबा रामदेव!



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