गुरु तेगबहादुर की हत्‍या से भी ‪#‎Aurangzeb‬ को बरी करते हैं वामपंथी इतिहास लेखक!

संदीपदेव‬। वामपंथी कितने कुत्सित और झूठे होते हैं, इसे देखना हो तो एनसीईआरटी की कक्षा- 11 के मध्‍यकालीन भारत का इतिहास पढ़ लीजिए। छत्रपति शिवाजी से लेकर गुरु तेगबहादुर तक के लिए एक वचन 'तुम' का प्रयोग वामपंथी इतिहासकारों ने किया है, जो भारत के गौरव को स्‍थापित करने वाले शासकों से इनकी नफरत को दर्शाता है। वहीं, औरंगजेब की कटटरता पर पर्दा डालने का इनका प्रयास पूरी पुस्‍तक में बिखरा पड़ा है। कुछ उदाहरण देखिए:

1) 1675 ई में गुरु तेगबहादुर और उसके (देखिए यहां एक धार्मिक पंथ के गुरु के लिए 'उसके' शब्‍द का प्रयोग है) पांच अनुयायियों को गिरफ्तार कर मौत के घाट उतार दिया गया। इसके कारण स्‍पष्‍ट नहीं है (औरंगजेब की कटटरता को छुपाने का प्रयास, जबकि गुरु को मारे जाने का स्‍पष्‍ट दस्‍तावेजी प्रमाण उपलब्‍ध हैं)। कुछ फारसी विवरणों के अनुसार गुरू ने हाफिज आदम नामक एक पठान से मिलकर पंजाब में अशांति पैदा कर दी थी। ( गुरु तेगबहादुर की हत्‍या से औरंगजेब को बचाने के लिए, लेकिन कुछ फारसी विवरणों- अर्थात बिना तथ्‍यों के गप के आधार पर गुरु को अशांति का जनक स्‍थापित करने का प्रयास किया गया है।)

2) गैर मुसलमानों पर सामूहिक अत्‍याचार की कहानियां अतिरंजित मालूम होती हैं(यदुनाथ सरकार ने एक एक मंदिर और फरमान का जिक्र अपने शोध में किया है, लेकिन वामपंथी इतिहासकारों ने इतिहास नहीं, यहां औरंगजेब को धर्मनिरपेक्ष साबित करने के लिए अपना विचार थोपा है)

3) यह बाद संदिग्‍ध है कि गुरु (गोविंद सिंह) के दो बेटों के साथ वह नृशंस व्‍यवहार(हत्‍या) वजीर खां ने औरंगजेब के कहने पर किया। मालूम होता है कि औरंगजेब गुरु का विनाश नहीं चाहता था। (क्‍या इतिहास लेखन में बिना तथ्‍य के 'संदिग्‍ध है', 'मालूम होता है'- जैसे शब्‍द चल सकते हैं।)

वामपंथी लेखन को देखकर कि लगता है कि किस तरह से इतिहास में तथ्‍यों से परे जाकर अपने विचार घुसेड़े गए हैं और हमारे बच्‍चों के मन-मस्तिष्‍क पर कब्‍जा किया गया है। तभी स्‍कूल जाते ही कमर से सरकते जींस को ठीक करते हुए ये तथाकथित आधुनिक युवा कहते मिलते हैं- 'या आइ एम ए सेक्‍युलर इंडियन'। नरक मचाया है, वामपंथियों ने देश के इतिहास लेखन में।
औरंगजेब पर पत्रिका लाकर आप लोगों तक सच पहुंचाने की मैं जितनी कोशिश करता जा रहा हूं, मैं दुखी होता जा रहा है। औरंगजेब का काल नृशंस इतिहास का दौर था। दुख उसकी नृशंसता से उतना नहीं, जितना कि देश के तथाकथित सेक्‍यूलरों व वामपंथियों के भांडपन से लबरेज लेखन से है!

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Web Title: sandeep deo blog on aurangzeb-8