यह शुद्ध रूप से वैचारिक लड़ाई है, ‪‎Beefban‬ अभियान में शामिल हों!

संदीप देव। समाज में नफरत फैलाने वाले मीडियाकर्मी और निकृष्‍ट अरविंद केजरीवाल एंड गिरोह को दादारी गांव के ग्रामीणों ने गांव में प्रवेश नहीं करने दिया। यही सभ्‍य और लोकतांत्रिक तरीका है। हमें भी बहिष्‍कार का तरीका ही अपनाना चाहिए। मीडिया का, नेताओं का, नफरत फैलाने वाले लोगों का- हर उसका जो राष्‍ट्र और समाज के तानेबाने को तोड़ने में जुटा है- उसका बहिष्‍कार होना ही चाहिए।

 

हम-आपने ‪#‎आजतक‬, ‪#‎एबीपीन्‬‍यूज, ‪#‎टाइम्‬‍सनाउ, ‪#‎एनडीटीवी‬, #टाइम्‍ऑफइंडिया, ‪#‎इंडियनएक्‬‍सप्रेस आदि का बहिष्‍कार किया, देखिए वह अपने पूर्व की रेटिंग से किस तरह लुढ़ने लगे हैं। बहिष्‍कार में न हिंसा है और न ही अहिंसा- यह मध्‍य मार्ग है। इसे ही अपनाएं।

जो हिंदू सेक्‍यूलर बनने के लिए गाय का मांस खाते या उसका समर्थन करते हैं, उनके पास से उठ जाएं, उन्‍हें देखते ही उबकाई करने लगें, नाक पर रुमाल रख लें, उनके पास जमीन पर थूक दें- उनका जीना हराम हो जाएगा। और ऐसे बहिष्‍कार के अपने कार्यों को सोशल मीडिया पर हैशटैग #Beefban पर शेयर करें ताकि औरों को भी बल मिले।

जो फिल्‍मकार गाय के मांस के समर्थन में कूद पड़े हैं, उनका फिल्‍म देखना छोड़ दें, उन्‍हें नुकसान पहुंचाने के लिए नकली वीसीडी गांव-मोहल्‍ले में बांट दें ताकि जो देखने जाने वाला हो, वह मुफ्त में ही देख ले और उन निकृष्‍ट फिल्‍मकारों का नुकसान हो। नकली वीसीडी को हथियार बनाएं। मैंने आयुष्‍मान खुराना की 'हवाईजादे' जैसी फिल्‍म केवल इसलिए नहीं देखी कि उसने गाय मांस का समर्थन किया था। शोभा डे, ऋषि कपूर जैसों का सोशल मीडिया पर बहिष्‍कार करें।

गो मांस भक्षण के समर्थक हिंदुओं का तो सबसे अधिक बहिष्‍कार करें। ये अधर्मी लोग, वो कारतूस हैं, जिन्‍हें मार्क्‍स-मसीह-मोहम्‍मदवादी सेक्‍यूलरिज्‍म के नाम पर हम पर ही चलाते हैं। इन विधर्मियों का सबसे अधिक बहिष्‍कार करें। झाड़ू हमेशा अंदर से बाहर की ओर बुहारती है। अपने घर की सफाई सबसे पहले जरूरी है।

कहने का तात्‍पर्य यह कि दादरी गांव के लोगों के दिखाए रास्‍ते पर चलें और अपने गांव से लेकर, अपने सोशल सर्कल, मोहल्‍ला, सिनेमा थियेटर, साहित्‍य- सब जगह निकृष्‍ट, हिंसक और पशु सदृश्‍य लोगों व समूह का बहिष्‍कार करें। हथियार नहीं, विचार को धार दें... । यह शुद्ध रूप से वैचारिक लड़ाई है। ‪

घटना का दूसरा पहलू:
‪#‎Beefban:‬ तय मानिए कि वर्तमान में बिहार में लालू-नीतीश-सोनिया गठबंधन की स्थिति खराब है, जिसके कारण उनके अन्‍य सहयोगी एनडीटीवी-एबीपी न्‍यूज-टाइम्‍स ग्रुप- इंडियन एक्‍सप्रेस-आदि समाज को बांटने के लिए सांप्रदायिक मुददा लेकर चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं। मृतक अखलाक का बेटा जब यह कह रहा है कि 'सारे जहां से अच्‍छा हिंदोस्‍तां हमारा' तो एनडीटीवी की बरखा दत्‍ता सवाल उठाती है- 'अभी भी आप यही कहेंगे कि सारे जहां से अच्‍छा हिंदूतां हमारा' । अखलाक का बेटा कहता है- 'कुछ लोगों की गलती को देश की गलती कैसे बनाया जा सकता है।' बरखा दत्‍ता अखलाक अहमद के बेटे को राष्‍ट्र के प्रति विष वमन के लिए उकसाती है, लेकिन वह एक सैनिक है, इसलिए बरखा जैसे राष्‍ट्रद्रोहियों के मूल उददेश्‍यों को ठीक से देखता और समझता आया है। इसलिए उनकी जाल में नहीं फंसता।

यह स्थिति है। हिंदू-मुसलमान लड़ना नहीं चाहते, लेकिन बरखा दत्‍ता और रवीश कुमार जैसे पत्रकार दोनों में खूनी संघर्ष चाहते हैं ताकि उनके माई-बाप-अन्‍नदाता: लालू-नीतीश-सोनिया गिरोह के पक्ष में मुस्लिम ध्रवीकरण हो और यह महाठगबंधन बिहार में हारी हुई बाजी जीत जाए।

मीडिया बार-बार यह कहती है कि चुनाव में नेता हिंदू-मुस्लिम दंगे कराते हैं, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में कांग्रेसी पक्ष में मीडिया इस देश में दंगा कराने वालों की मुख्‍य भूमिका में रही है। संभव है अभी और आग लगाया जाए और इस ठगबंधन के साथ-साथ ओवैसी, आजम खान- जैसे सांप्रदायिक नेताओं को खुलकर खेलने के लिए जमीन उपलब्‍ध कराया जाए। हमें अखलाक के बेटे जैसे भारतीय पर गर्व है और बरखा दत्‍ता जैसे पत्रकारों के पूरे व्‍यक्तित्‍व पर लानत है... . ‪

Web Title: Systematic anti-hundu campaign by national and International mainstream media-1

SandeepDeo|‬ ‪‎संदीप देव।‬ Sandeep Kumar Deo| ‪DadriLynching|‬ Beefban| cow slaughter