जब कल रात मैं एक कांग्रेसी निर्देशक की असहिष्‍णुता का शिकार हुआ!

‎संदीपदेव‬। इस देश में बहुत असहिष्‍णुता की चर्चा चल रही है। हां, यह सच है कि देश में असहिष्‍णुता बढ़ी है, लेकिन इस असहिष्‍णुता को देखना है तो आप कांग्रेसी और वामपंथी विचारकों, पत्रकारों, कलाकारों, साहित्‍यकारों और बुद्धिजीवियों को देखिए, जो PMO India मोदी सरकार के आने के बाद से इस तरह तिलमिलाए हुए हैं कि अपनी मर्यादा तक को भंग कर रहे हैं! नरेंद्र मोदी पर पुस्‍तक लिखने के बाद से ही मैं अपने वरिष्‍ठ पत्रकार साथियों की असहिष्‍णुता का शिकार होता रहा हूं, कल एक धारावाहिक निर्देश की असहिष्‍णुता का भी शिकार हो गया!

यही है मेरी वह पुस्‍तक, जिसके कारण कांग्रेसी-वामपंथी विचारधारा की असहिष्‍णुता का शिकार मैं पिछले तीन साल से हो रहा हूं!

 

अभी एक टीवी चैनल पर बड़ा धारावाहिक आता है। उसके निर्देश वह व्‍यक्ति हैं, जिन्‍हें कांग्रेस ने कभी चार साल तक दूरदर्शन का सलाहकार संपादक बनाकर रखा था। उन महाशय के कुछ और भी बड़े धारावाहिक आने वाले हैं। मेरे एक डॉक्‍टर मित्र के वो मित्र हैं। उन्‍होंने उनसे कहा था कि मुझे अच्‍छे स्क्रिप्‍ट राइटर चाहिए। आजकल अच्‍छे लेखक मिल नहीं रहे हैं। मेरे डॉक्‍टर मित्र मुझे जबरदस्‍ती उनके पास ले गए कि आपको एक बड़ा ब्रेक मिल जाएगा। घरवालों का भी लगातार दबाव है कि यह फालतू के पंगे छोड़कर ढंग की नौकरी करो, जिसमें हर महीने की तनख्‍वाह सुनिश्चित हो। मैं डॉक्‍टर साहब के साथ चला गया।

डॉक्‍टर साहब मोदी और बाबा रामदेव पर लिखी मेरी पुस्‍तक उन्‍हें दिखाने के लिए ले गए थे। पुस्‍तक देखते ही महोदय भड़क गए और कहा 'तुम तो दक्षिणपंथी हो!' मैं मु‍स्‍कुराने लगा कि देखो, इस इंसान को, बिना पढ़े ही मोदी और रामदेव का नाम व तस्‍वीर देखकर ही यह पुस्‍तक को खारिज कर रहा है। वो मुझे समझाने लगे, 'याद रखना इस देश में 'राइट ऑफ द सेंटर' हमेशा कांग्रेस और वामपंथी विचार ही रहेगा। इसलिए कुछ न्‍यूट्रल( तात्‍पर्य- कांग्रेसी-वामपंथी विचार के अनुरूप) लिखो, अन्‍यथा तुम हमेशा खारिज ही रहोगे।' मैं मुस्‍कुराता रहा। मेरे जानने वाले जानते हैं कि मैं अच्‍छा श्रोता हूं, इसलिए कहीं भी नहीं बोलता न किसी से विवाद में उलझता हूं- जब तक कि कोई मुझे आखिरी बिंदू तक जलील न कर दे!

उनके और डॉक्‍टर साहब के बीच इतिहास, धर्म आदि पर चर्चा होती रही और मैं बैठकर उनके टीवी पर उनका ही सीरियल देखता रहा। डॉक्‍टर साहब ने राष्‍ट्रीय गान 'जन-गण-मन' पर चर्चा छेड़ दी और मुझसे कहा, संदीप जी आपने तो इस पर लेख लिख था, प्‍लीज इन्‍हें बताइए। मैं इनकार करता रहा कि छोडि़ए डॉक्‍टर साहब। डॉक्‍टर साहब ने जब उन्‍हें इसका अर्थ बताया तो महाशय भड़क गए और अपने तर्क रखने लगे। डॉक्‍टर साहब ने फिर मेरी ओर देखा और कहा, आप बोलिए तो।

डॉक्‍टर साहब के बार-बार आग्रह पर मैंने राष्‍ट्रगान का तिथिवार इतिहास उनके सामने रखा। जब उन्‍हें बताया कि राष्‍ट्रगान में रविंद्रनाथ टैगोर ने केवल उन प्रदेशों की चर्चा की है, जो ब्रिटिश आधिपत्‍य में था, उन प्रदेशों की नहीं तो ब्रिटिश आधिपत्‍य से बाहर था- इससे ही साबित होता है कि वह इसमें किस 'अधिनायक' को संबोधित कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा, उदाहरण दो- मैंने कहा, जैसे राजपुताना सहित वो 562 रिसायत जो ब्रिटिश आधिपत्‍य से बाहर था और जिसे सरदार पटेल ने बाद में भारत में मिलाया था। उन्‍होंने कहा- गंगा-यमुना की चर्चा कर रविंद्र ने उत्‍तर भारत की चर्चा तो कर दी। मैंने कहा, लेकिन महोदय राजस्‍थान में गंगा-यमुना नहीं बहती? इतना सुनना था कि वह भड़क गए और कहा, तुम्‍हारी तो पुस्‍तक देखकर ही पता लग गया था कि तुम दक्षिणपंथी हो! फालतू इतिहास में घुसने की कोशिश मत करो!

मैंने कहा, जरा सहिष्‍णु बनिए! चर्चा इस टेबल पर बैठकर राष्‍ट्रगान पर चल रही है और आप सीधे मेरी पुस्‍तक पर पहुंच गए, मुझे खरी-खोटी सुनाने लगे। आपलोगों के साथ समस्‍या यही है। प्रधानमंत्री मोदी, महेश भटट से लेकर मुनव्‍वर राणा तक को चर्चा के लिए बुला रहे हैं, लेकिन वो नहीं पहुंच रहे। दरअसल, आपलोगों ने समाज में इतना झूठ फैलाया है कि आप चर्चा से हमेशा भागते हैं। आपकी पूरी कोशिश होती है कि जिनसे आप तर्क में परास्‍त हों, उन्‍हें दक्षिणपंथी, संघी आदि कह कर खारिज कर दें। आप मेरे साथ भी यही कर रहे हैं। मैं तो विपिनचंद्रा और सुमित सरकार से लेकर जेवियर मोरो की 'रेड साड़ी', जिसमें सोनिया गांधी का स्‍तुतिगान है- सब पढ़ता हूं। हर विचार को जानना चाहिए, लेकिन आपलोग तो दूसरे विचार को सुनने तक को तैयार नहीं हैं। यह है असहिष्‍णुता, जिसका प्रदर्शन आज साहित्‍यकार से लेकर फिल्‍मकार और पत्रकार तक कर रहे हैं।

कर्मचारियों और दोस्‍तों के बीच उनके पास कोई तर्क नहीं था। मैं वहां से निकल आया। घरवाले नाराज हैं कि कोई ढंग का काम नहीं करता, केवल सभी से उलझता है। मैं कैसे समझाऊं कि मैं कभी किसी से नहीं उलझता, लेकिन जब लोग बार-बार अनर्गल प्रलाप करते हैं तो बस मैं उनके समक्ष तर्क रख देता हूं और उसके बाद ऐसे लोग फिर मुझसे कभी मिलना नहीं चाहते। आखिर मैं क्‍या करूं।

Narendra Modi के खिलाफ हर साजिश को पुस्‍तक लिखकर ध्‍वस्‍त करने का प्रयास किया है, पूरी उम्र भुगतना तो पड़ेगा ही! केवल मोदी ही नहीं, उनका तथ्‍यगत पक्ष रखने वाले भी आज वैचारिक रूप से अछूत हैं, कांग्रेसी-वामपंथी विचारधारा की अहिष्‍णुता के शिकार हैं! हां, समाज में असहिष्‍णुता तो बढ़ ही रही है। पिछले तीन साल से तो मैं ही इसका शिकार हो रहा हूं!

 

जन-गण-मन पर मेरा वह लेख, जिसमें इसके पूरे इतिहास का तथ्‍यपरक विश्‍लेषण है

वंदेमातरम और जन गण मन का इतिहास: सच्‍चाई, सोच और साजिश

Web Title: extreme intolerance with me by a congressi director- ‪sandeep Deo‬