असहिष्णुता: काश! सोनिया मैडम और आमिर खान तक कोई इस सच्चाई को पहुँचा दे!

संदीप देव। आखिर कांग्रेस, कांग्रेस समर्थक व आमिर-शाहरुख जैसे मुसलमान किस मुंह से सहिष्णुता की बात करते हैं? आपातकाल के दौरान इंदिरा-संजय गांधी ने दिल्ली की जनता, खासकर मुसलमानों पर इतना अधिक जुल्म ढाया था कि तत्कालीन दिल्ली के उपराज्यपाल ने इन दोनों का आदेश मानने की जगह आत्महत्या कर लिया था! जी हाँ, आत्महत्या!

तब दिल्ली के उपराज्यपाल किशनचंद थे। वह संजय गांधी के हर नाजायज आदेशों को लगातार लागू करते जा रहे थे। उन्होंने संजय गांधी के कहने पर जनता पर ऐसे-ऐसे जुल्म किए कि खुद उनकी रूह कांप गई! उन्हें अपराधबोध सताने लगा और उन्होंने संजय गांधी के आदेश को मानने की जगह खुद को ही समाप्त करने का फैसला किया। उन्होंने आत्महत्या कर लिया! ऐसी थी इंदिरा-संजय की तानाशाही! उपराज्यपाल डर के मारे आत्महत्या कर रहे थे, जबरन मुसलमानों का बधिया किया जा रहा था और जनता पर तरह तरह के जुल्म ढाए जा रहे थे! ताज्जुब देखिए तथाकथित इतिहासकारों ने गांधी परिवार का चप्पल उठाते हुए् ऐसे तथ्यों को पूरी तरह से दफनाया हुआ है!

मुझे भी इस तथ्य की पूरी और सही-सही जानकारी नहीं थी। प्रतिष्ठित पत्रकार रामबहादुर राय जी ने 'यथावत' के संपादकीय में टी वी राजेश्वर की पुस्तक ' इंडिया, द क्रुसियल इयर्स' का जिक्र किया है। पुस्तक के लेखक टी वी राजेश्वर कोई संघी नहीं, बल्कि इंदिरा गांधी के राजदार थे!

रामबहादुर राय जी लिखते हैं, 'टी वी राजेश्वर शासनतंत्र का वह नाम है जो इंदिरा गांधी को उनके दुर्दिन से उबारने के लिए जाना जाता है। कहा तो यहाँ तक जाता है कि टी वी राजेश्वर ने ही जनता पार्टी की मोरारजी सरकार की कमजोर कड़ियों को इंदिरा के हाथों में सौंपा था।'

हालांकि टी वी राजेश्वर ने बहुत सारे तथ्यों को छिपा लिया है, क्योंकि इंदिरा उनके व वह इंदिरा के अहसान तले दबे थे, लेकिन जो थोड़ा बहुत अपातकाल का सच वह सामने ला पाए हैं, वह भी कांग्रेस के क्रूर चेहरे को दर्शाने के लिए काफी है, जैसे दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल का अपराधबोध व डर के कारण आत्महत्या करना!

काश! कोई आमिर खान, सोनिया मैडम, राहुल पप्पू बाबा, शाहरुख खान, उदय प्रकाश, रविश कुमार, पुण्य प्रसून, मुनव्वर राणा जैसों तक यह सच्चाई पहुँचा दे! ‪

बेस्‍ट कमेंट:

BY Manmohan Sharma राम बहादुर राय आपातकाल के दौरान दिल्ली में नहीं थे और न ही वो उन दिनों पत्रकारिता करते थे। आपातकाल के दौरान मैं हिन्दुस्तान समाचार संवाद समिति में विशेष संवाददाता के रूप में कार्य करता था। इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी ने आपातकाल के दौरान देशवासियों और विशेष रूप से मुसलमानों पर जो अत्याचार ढाये थे मैं उसका प्रत्यक्षदर्शी हूं। तुर्कमान गेट में मेरे सामने मुसलमान बस्तिों को बुलडोजर लगाकर मिट्टी में मिलाया गया था। इस अवसर पर डीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष जगमोहन और पुलिस आयुक्त पी.एस. भिंडर भी संजय गांधी और उसके गिरोह के साथ मौजूद थे। अंधाधुंध फायरिंग का शिकार होने वालों की संख्या सरकारी तौर पर उन दिनों 25 बताई गई थी जबकि मरने वालों की संख्या इससे कई गुना अधिक थी और यह सभी मुसलमान थे। मुजफ्फरनगर के जिला खालापार मोहल्ले में जब नसबंदी का मुसलमानों ने विरोध किया तो वहां भी गोली चली। सरकारी तौर पर मरने वालों की संख्या 11 बताई गई थी मगर जब दिल्ली से जाने वालों ने पत्रकारों ने जांच की जिनमें मैं भी शामिल था मरने वालों की संख्या 31 थी। इसी तरह से मेवात के क्षेत्र में नसबंदी का विरोध करने वाले एक दर्जन के लगभग मुसलमान पुलिस की गोलियों को शिकार बनें जिसके समाचार को सदा के लिए दबा दिया गया। उन दिनों प्रेस पर सेंसर थी इसलिए इन अत्याचारों का शिकार होने वाले मुसलमानों के बारे में कोई समाचार नहीं छपा। जब जनता पार्टी सत्ता में आई तो 1978 में इस संदर्भ में कुछ समाचारपत्रों में जिनमें माया इलाहबाद प्रमुख था कुछ समाचार जरूर छपे थे। इमरजेंसी के दौरान दिल्ली में पुलिस के एक्शन से मरने वालों की संख्या एक सौ के लगभग बताई जाती है।

उन दिनों कृष्णचन्द दिल्ली के उपराज्यपाल हुआ करते थे मगर शासन उनके निजी सचिव नवीन चावला, पुलिस आयुक्त पी.एस. भिंडर और डीडीए के उपाध्यक्ष जगमोहन, नगर निगम के आयुक्त बी.आर. टम्टा और संजय गांधी की ब्रिगेड जिसमें रूकसाना सुल्ताना, फिल्मस्टार शाहरूख खान की मां कनिज़ फातिमा, अम्बिका सोनी आदि का चलता था। बाद में कृष्णचन्द को परेशान होकर आत्महत्या करनी पड़ी। आज जो कांग्रेसी सहिष्णुता का राग अलाप रहे हैं उन्हें अपने कारनामों पर नजर डालनी चाहिए। कठिनाई यह है कि पुराने लोग मर-खप गए और नए लोगों को कांग्रेसियों के इन काले कारनामों का कोई इल्म नहीं है। अगर कोई ईमानदारी से इमरजेंसी के दौरान हुई जज्यादतियों की जांच करे तो उस पर कई मोटे-मोटे ग्रंथ लिखे जा सकते हैं।

Web Title: who is real intolerant-2