जनता का प्रधानमंत्री जनता को अपने संबोधन से रुला गया!

संदीप देव, 15 अगस्‍त 2014. Narendra Modi देश के पहले PMO India हैं, जिन्‍होंने आज मुझे रुला दिया अपने भाषणों से! वर्ना तो  पिछले 10 साल से एक 'पेटिकोट सरकार' की घोटाले और घपलेबाजी ने ही जनता को खून के आंसू रुलाया है! मैं यदि अपने आंसू दबा लूं तो मेरे सिर में भयानक दर्द उठता है और फिर अगले 24 घंटे तक ठीक नहीं होता। सिर में भयानक दर्द है, लेकिन ह़दय में प्रसन्‍नता है कि हमें एक प्रधानमंत्री ऐसा मिला है जो केवल घोषणाएं नहीं करता, सबकुछ खुद करने का दावा नहीं करता, बल्कि देश को छोटे-छोटे काम के जरिए एक आंदोलन में बदल देना चाहता है!

 

महात्‍मा गांधी जी की सबसे बडी सफलता यही थी। जब वह सत्‍याग्रह नहीं कर रहे होते थे तो चरखा के जरिए देश को चलाए रखने की कोशिश करते थे। इस देश के सोए हुए मानस को झंकझोरना बहुत जरूरी है, अन्‍यथा हमारी धीमी अर्थव्‍यवस्‍था से लेकर हमारे विकास की धीमी गति तक को पश्चिम 'हिंदू ग्रोथ' कहता है। यह गर्व की बात नहीं, बल्कि पश्चिम हमारी धीमी गति और सोए हुए मानस का मजाक उडाता है और हमे यह स्‍वीकार करना चाहिए कि हम वास्‍तव में ऐसे ही हो गए हैं!

राह चलते लोगों पर लोग अपने घरों से कूडा फेंक रहे हैं, थोडी सी गाडी टकराने पर एक-दूसरे को मारने पर उतारू हैं, पडोसियों को प्रताडित करने के लिए घर के बाहर की नालियां बंद कर देते हैं, भले ही उससे अपने घर के बाहर पानी जमा हो। यह क्‍या कोई सरकार आकर दूर करेगी, या हमे ही करना होगा? वैसे मैं अपने जीवन में जागृत हूं, लेकिन जब देश का प्रधानमंत्री इसके लिए प्रेरित कर रहे हों तो देश जगेगा, ऐसी उम्‍मीद की जानी चाहिए!

आलोचना या किसी की बुराई लाख कीजिए, लेकिन एक बार अपने अंदर झांक जरूर लीजिए कि आपका जीवन 'मेरा क्‍या...मुझे क्‍या' से मुक्‍त है। यदि नहीं है तो खुद को इससे मुक्‍त कीजिए और नहीं कर सकते हैं तो मौत के इंतजार में जीवित रहिए क्‍योंकि नहीं बदलना केवल 'शव' होने की निशानी है। 'शिव' होना है तो जहर पीने की क्षमता विकसित करनी होगी!

कुतर्की पत्रकार जमात
हमारे हिंदुओं में सिंधी समाज व्‍यवसाय के लिहाज से बहुत ही विकसित समाज है। एक बहुत बड़े सिंधी बिजनसमैन राम बक्‍सानी की आत्‍मकथा ' ऊंची उड़ान की ओर' मैं पढ रहा था। उनका दुबई में काफी बडा साम्राज्‍य है। उन्‍होंने लिखा है कि युवावस्‍था बेहद रचनात्‍मक काल होता है। हम सिंधी लोग इसे बहुत सारी डिग्रिया बटोरने में खराब नहीं कर सकते, इसलिए होश संभालते ही बिजनस संभाल लेते हैं।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर कु‍तर्क करते तथाकथित पत्रकारों को देखकर मुझे राम बक्‍सानी का लिखा याद आ गया। उनकी आत्‍मकथा पढने के बाद टेलिविजन के चैनल, अखबार के संपादकीय पृष्‍ठ और सोशल मीडिया पर जब भी मैं किसी कुतर्की को देखता हूं तो उसका पूरा बायोडाटा सर्च करने लग जाता हूं! पाता हूं, सचमुच ऐसे कुतर्की व्‍यक्तियों ने खूब सारी डिग्रियां बटोरी है! फिर मुझे हंसी आती है, क्‍योंकि इनमें से अधिकांश डिग्रीधारी जेएनयू से पढ़े मिलते हैं....! मतलब मार्क्‍स और लेनिन को अपना माई-बाप मानने और लाल सलाम वाले...!!

तिरंगे के भगवा रंग से जिन्‍हें आपत्ति है!
तथाकथित पत्रकार ओम थानवी, पुण्‍य प्रसून वाजपेयी एवं उनकी कुत्सित जमात को आज सुनकर लगा कि इन्‍हें तिरंगे के भगवा रंग से परेशानी है। इनका वश चले तो ये तिरंगे से भगवा हटाकर वहां लाल लगा दें। मार्क्‍स-लेनिन की तानाशाही और इनकी इटालियन माता के देश के झंडे का रंग इनकी जुबान पर चढा तो दिखता है, लेकिन इनके चेहरे और हृदय में कालिख भरी लगती है!

इन्‍हें परेशानी थी कि PMO India Narendra Modi लालकिला पर झंडा फहराने केसरिया साफा पहनकर क्‍यों आए थे? जब भाजपा प्रवक्‍ता शाहनवाज ने कहा कि महोदय वह तिरंगे के रंग में रंगे हुए आए थे, उसमें सफेद और हरा रंग भी था तो कुतर्की ओमथानवी ने कहा पूंछ की तरह हरा रंग पीछे था! महोदय तिरंगे में हरा रंग नीचे ही है! क्‍यों बुढापे में उपहास का पात्र बनते हो! इतना ही भारतीय तिरंगे से नफरत है तो किसी और देश में चले जाओ, क्‍यों यहां की धरती पर बोझ बढ़ा रहे हो!

तुम सब अपने चेहरे बड़े गौर से शीशे में देखो, कितना घटियापन है वहां! क्‍यों सुबह-सुबह लोगों का दिन मनहूस करने चले आते हो! पूरी जिंदगी दूसरों के टुकड़ों पर इसी चापलूसी के बल पर पले हो, आखिर तुम्‍हारी आत्‍मा में बल कहां से आएगा? ओम थानवी तुम सामर्थ्‍यवान तो तब होते जब माननीय प्रभाष जोशी जी के जाने के बाद जनसत्‍ता की सर्कुलेशन अपनी लेखनी के बल पर बढ़ा कर दिखाते, उल्‍टा तुम्‍हारे संपादन काल में जनसत्‍ता सिमटता चला गया है!

और Punya Prasun Bajpai तुम्‍हारा तो कहना ही क्‍या, टीवी स्‍टूडियो में बैठकर अरविंद केजरीवाल के प्रवक्‍ता की भूमिका में हाथ मलते रहते हो...जानते हो न हाथ कौन मलता है, जिसके शरीर में तपिश नहीं होती..और ठंडापन मुर्दे की निशानी है...! जिस शरीर में स्‍वतंत्र आत्‍मा का वास न हो वह व्‍यक्ति मुर्दा समान ही तो है....! सुना है तुम्‍हारे व अंजना ओम कश्‍यप के शो के कारण Aaj Tak के प्राइम टाइम की टीआरपी घट गई है, जिसकी वजह से वहां बैठकों का दौर चल रहा है....अरे शर्म करो और अपनी-अपनी विचारधारा वाली पार्टी ज्‍वाइन कर आशुतोष की तरह खुलकर सामने आ जाओ, क्‍यों पत्रकारिता को कलंकित कर रहे हो.....!

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