तंत्र सेक्‍स और मनोविज्ञान

दोष सेक्‍स में नहीं, आपके मस्तिष्‍क में है!

संदीप देव। मशहूर मनोचिकित्‍सक फ्रायड एक मनो रोगी का इलाज कर रहे थे। उन्‍होंने पुस्‍तक दिखाते हुए उससे पूछा, इसमें तुम्‍हें क्‍या दिखता है? उस रोगी ने कहा- सेक्‍स! फ्रायड ने उसे खिड़की के बाहर एक वृक्ष दिखलाते हुए पूछा, उस पर बैठी जो चिडि़या चहचहा रही है, वह क्‍या गा रही है? उस रोगी ने कहा- उसकी आवाज में एक मादकता है, वह सेक्‍स चाह रही है! फ्रायड का महान निष्‍कर्ष है, व्‍यक्ति सोते-जागते पूरे दिन बस सेक्‍स के विषय में सोचता रहता है और वह उसके अवचेतन में कैद है!

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In Tantra the worship of the Divine Goddess Shakti

Shaktism is probably the oldest form of Hinduism. Goddess worship in India dates back at least 20,000 years. In the Son Valley of Northern India a rectangular platform was found with natural circles installed in the centre dating back to this time. It is the Shrine of Kalika Mai (Mother Kali). Another one found in the same area is the Kerai Ki Devi shrine dating roughly between 8000 to 200 BCE and reflects an extraordinary continuity of Mother Goddess worship.

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तंत्र साधना में नारी क्यों है जरूरी...

ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (अष्टक 8, मं. 10 सू. 129) में वर्णित है कि प्रारंभ में अंधकार था एवं जल की प्रधानता थी और संसार की उत्पत्ति जल से ही हुई है। जल का ही एक पर्यायवाची 'नार' है। सृजन के समय विष्णु जल की शैया पर विराजमान होते हैं और नारायण कहलाते हैं एवं उस समय उनकी नाभि से प्रस्फुटित कमल की कर्णिका पर स्थित ब्रह्मा ही संसार का सृजन करते हैं और नारी का नाभि से ही सृजन प्रारंभ होता है तथा उसका प्रस्फुटन नाभि के नीचे के भाग में स्थित सृजन पद्म में होता है।

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