दोष सेक्‍स में नहीं, आपके मस्तिष्‍क में है!

संदीप देव। मशहूर मनोचिकित्‍सक फ्रायड एक मनो रोगी का इलाज कर रहे थे। उन्‍होंने पुस्‍तक दिखाते हुए उससे पूछा, इसमें तुम्‍हें क्‍या दिखता है? उस रोगी ने कहा- सेक्‍स! फ्रायड ने उसे खिड़की के बाहर एक वृक्ष दिखलाते हुए पूछा, उस पर बैठी जो चिडि़या चहचहा रही है, वह क्‍या गा रही है? उस रोगी ने कहा- उसकी आवाज में एक मादकता है, वह सेक्‍स चाह रही है! फ्रायड का महान निष्‍कर्ष है, व्‍यक्ति सोते-जागते पूरे दिन बस सेक्‍स के विषय में सोचता रहता है और वह उसके अवचेतन में कैद है!

 

बाजार की सभी कंपनियों ने हर प्रोडक्‍ट के साथ स्‍त्री को बाइप्रोडक्‍ट के रूप में पेश किया और कुंठित बीमार लोगों को कार से लेकर टूथब्रश हाथ में थामे स्‍त्री में बस सेक्‍स ही दिखता रहा! कंपनी मनोरोगियों की काम वासना को भड़का कर मालामाल होती रही। कुंठित चोरी छिपे इसे देखते भी रहे और समाज के समक्ष इसका विरोध कर साधुता भी प्रदर्शित करते रहे!

समस्‍या जब पुरुषों के दिमाग में है तो महिलाओं को दोष क्‍यों देते हो? सनी लियोन मुझे तो उत्‍तेजित नहीं करती? सर्वहारा की बात करने वाले अतुल अंजान यदि सनि लियोन को देखते ही ठरकी हो जाते हैं तो इसमें सनी लियोन की क्‍या गलती है?
सेक्‍स को मन में दबाए-दबाए पुरुष सड़ता जा रहा है और जब भी मौका मिलता है दोष स्‍त्री को देता रहा है! सभी धर्म के शास्‍त्रों ने कहा- स्‍त्री नर्क का द्वार है! आज आप कह रहे हैं-सनी लियोन नर्क का द्वार है! फर्क कहां है?

आश्‍चर्य होता है कि कभी इसी देश में वैशाली की नगरवधु होती थी! कभी इसी देश में वात्‍स्‍यायन ने कामसूत्र की रचना की! कभी इसी देश में खजुराहो और कोणार्क का निर्माण हुआ! कभी इसी देश में सेक्‍स ऊर्जा को ऊर्ध्‍वगामी बनाने के लिए तंत्र विकसित हुआ! इसी देश में आज भी शिव-पार्वती प्रकृति व पुरुष के रूप में हर शिवालय में पूजे जा रहे हैं! इसी समाज में गीत गोविंद की रचना करने वाले जयदेव ने राधा-कृष्‍ण के बीच मनोहारी प्रेम का वर्णन किया है! और आज एक सनि लियोन लोगों की मानसिकता हिला रही है! सोच कर देखिए, पहले का समाज विकसित था, या आज का समाज विकसित है?

दोष सनी लियोन में नहीं, दोष उनमें है, जिन्‍हें सोते-जागते केवल सेक्‍स दिखता है! दमित सेक्‍स की बीमारी से ग्रसित लोग रेप भी कर रहे हैं, अर्धनग्‍न स्‍त्री को खड़ा कर कंडोम भी बेच रहे हैं और चुपके से उस कंडोम को खरीदने वाले लेकिन जोर-जोर से इसके विज्ञापन पर रोक लगाने की मांग भी कर रहे हैं!

सेक्‍स एक सृजन ऊर्जा है, लेकिन यह कुंठित व मनोरोगी भी बनाता है! सेक्‍स के प्रति साक्षीभाव की जरूरत है, लेकिन लोगों ने तो सेक्‍स के दमन पर अपना पूरा जोर लगा रखा है! फिर तो यह तरह तरह से प्रकट होगा ही! दोष यदि सेक्‍स को देंगे तो आपके जन्‍म लेने की पूरी प्रक्रिया ही दोषी हो जाएगी! दोष आपके मस्तिष्‍क का है, इलाज कराइए!

Web title: Sandeep deo on Sex With Tantra-1

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