करियर

महिलाएं सीखें सिलाई, बने आत्‍मनिर्भर

आधीआबादी ब्‍यूरो। महिलाओं को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए वैसे तो रोजगार के भरपूर अवसर हैं,  लेकिन सिलाई एक ऐसी कला है जो महिलाएं अपने घर पर रहकर भी कर सकती हैं। इससे अच्‍छी आमदनी के साथ-साथ घर-परिवार की देखभाल और उनका साथ भी लगातार बना रहता है। यही कारण है कि महिलाओं में सिलाई सीखने की लगन सबसे अधिक देखी गई है। भारत में रोजगार के क्षेत्र में महिलाएं सर्वाधिक सिलाई-बु‍नाई-कढ़ाई के क्षेत्र से ही जुड़ी हुई हैं। सिलाई सिखने से पहले हमे यह जानना बेहद आवयशक हैं कि सिलाई  कितने तरह का होता है।

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स्ट्रेस मॅनेजमेंट का फंडा

एक मनोवैज्ञानिक स्ट्रेस मॅनेजमेंट के बारे में, अपने छात्रों से मुखातिब था। उसने पानी से भरा एक ग्लास उठाया। सभी ने समझा की अब "आधा खाली या आधा भरा है", यही पुछा और समझाया जाएगा! मगर मनोवैज्ञानिक ने पूछा..''कितना वजन होगा इस ग्लास में भरे पानी का?'' सभी ने 300 से 400 ग्राम तक अंदाज बताया!

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अपने कर्मचारियों को कार और घर बांटने वाले सावजी ने 169 रुपए से शुरू की थी नौकरी!

नई दिल्ली। अपने कर्मचारियों को दिवाली के मौके पर बोनस के तौर पर कार, गहने और घर जैसे उपहार देने वाली कंपनी हरिकृष्णा एक्सपोर्ट्स और उसके मालिक सव्जी ढोलकिया की कहानी बेहद दिलचस्प है।1978 में धोलकिया ने जब काम शुरू किया तो उनका मासिक वेतन 169 रुपए था, जबकि आज उनकी कंपनी की नेटवैल्यू 6 हजार करोड़ रुपए है।

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विश्व में नंबर एक रैंकिंग हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल

साइना नेहवाल दुनिया की नंबर वन रैंकिंग हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई। उन्‍होंने यह खितान स्पेन की कैरोलिना मारिन को इंडिया ओपन सुपर सीरिज के सेमीफाइनल में हरा कर हासिल किया। नेहवाल ने इंडिया ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट में चैंपियन बनने का अपना ख्वाब भी रविवार को खिताबी मुकाबले में थाईलैंड की रत्चानोक इंतानोन को लगातार गेमों में 21-16, 21-14 से हराकर पूरा कर लिया।

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मनु शर्मा व रामबहादुर राय, जिनके गले से लगकर सम्‍मानित हुआ 'पद्मश्री'

संदीप देव। आज मेरे लिए दोहरी खुशी का दिन है। मेरे दो-दो आदर्श व आदरणीय साहित्‍यकार-पत्रकार को आज पद्म पुरस्‍कार मिल रहा है। इनमें एक हैं मनु शर्मा और दूसरे हैं रामबहादुर राय। सच पूछिए तो ये दोनों ऐसी शख्सियत हैं, जो किसी भी पुरस्‍कार से कहीं ऊपर हैं। सरकार ने इन्‍हें पद्म पुरस्‍कार देकर पद्म पुरस्‍कार की ही गरिमा बढाई है। भारतीय साहित्‍य और पत्रकारिता को जो योगदान इन दो विभूतियों ने दिया है, वह किसी पुरस्‍कार की मोहताज न कभी थी और न ही कभी रहेगी।

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