सच हुए सपने

अपने कर्मचारियों को कार और घर बांटने वाले सावजी ने 169 रुपए से शुरू की थी नौकरी!

नई दिल्ली। अपने कर्मचारियों को दिवाली के मौके पर बोनस के तौर पर कार, गहने और घर जैसे उपहार देने वाली कंपनी हरिकृष्णा एक्सपोर्ट्स और उसके मालिक सव्जी ढोलकिया की कहानी बेहद दिलचस्प है।1978 में धोलकिया ने जब काम शुरू किया तो उनका मासिक वेतन 169 रुपए था, जबकि आज उनकी कंपनी की नेटवैल्यू 6 हजार करोड़ रुपए है।

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करोड़ों की नौकरी छोड़ कर बन गया किसान!

खंडवा। कोलकाता के दीपक गोयल के सिर पर खेती करने का जुनून ऐसा चढ़ा कि वे सालाना डेढ़ करोड़ रुपए पैकेज की नौकरी छोड़ किसान बन गए। श्री गोयल ने खंडवा के बंजारी गांव के पास 100 एकड़ जमीन खरीदी। अनार के पौधे लगाए। छह साल कड़ी मेहनत की। एक-एक पौधे की देखभाल की। अब यह पौधे बेहतर क्वालिटी के अनार उगल रहे हैं। अनार विदेशों में भी एक्सपोर्ट किया जा रहा है। श्री गोयल अपनी इस नई पहचान से बेहद खुश है। वे पत्नी शिल्पा के साथ शहर की चमक-दमक वाली कॉर्पोरेट लाइफ छोड़ ठेठ देहाती अंदाज में गांव में ही रह रहे हैं!

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आनंद कुमार की पापड़ बेचने से सुपर 30 तैयार करने तक की कहानी

सुपर 30 के संस्‍थापक आनंद कुमार। मेरे बच्चो और बच्चियो, मैं आनंद कुमार पटना बिहार से आया हूं। किसी समय इसका इतिहास गौरवशाली था और नालंदा विश्वविद्यालय का नाम पूरी दुनिया के शिक्षा जगत में था। ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज तो बाद में आए। आज बिहार क्राइम की चपेट में है, लेकिन वो अलग बात है। आज मुझे बुलाया गया है आपसे बतियाने के लिए। मैं आपको कुछ छोटी-छोटी कहानियां सुनाऊंगा- ये कहानियां दादा-दादी, नाना-नानी की नहीं बल्कि रियल लाइफ की कहानियां हैं।

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