शख्सियत

मनु शर्मा व रामबहादुर राय, जिनके गले से लगकर सम्‍मानित हुआ 'पद्मश्री'

संदीप देव। आज मेरे लिए दोहरी खुशी का दिन है। मेरे दो-दो आदर्श व आदरणीय साहित्‍यकार-पत्रकार को आज पद्म पुरस्‍कार मिल रहा है। इनमें एक हैं मनु शर्मा और दूसरे हैं रामबहादुर राय। सच पूछिए तो ये दोनों ऐसी शख्सियत हैं, जो किसी भी पुरस्‍कार से कहीं ऊपर हैं। सरकार ने इन्‍हें पद्म पुरस्‍कार देकर पद्म पुरस्‍कार की ही गरिमा बढाई है। भारतीय साहित्‍य और पत्रकारिता को जो योगदान इन दो विभूतियों ने दिया है, वह किसी पुरस्‍कार की मोहताज न कभी थी और न ही कभी रहेगी।

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पद्मश्री एक सहज, सजग और सार्थक संवाद को

के. एन. गोविंदाचार्य। पद्म पुरस्कारों के आईने में देखा जाए तो पत्रकारिता का चेहरा इस बार ज्यादा सहज, सजग और सार्थक संवाद करता हुआ दिख रहा है। यह सच है कि व्यक्ति पुरस्कार से बड़ा या छोटा नहीं होता, हां व्यक्तित्व प्रभावी हो तो पुरस्कार की शोभा बढ़ जाती है। वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय को पद्मश्री से नवाजने से पद्मश्री की प्रासंगिकता और शोभा दोनों बढ़ गई। ऐसा नहीं कहता कि पद्मश्री रायसाहब के लिए मायने नहीं रखता। हां इतना जरूर है कि यह उनके लिए मील के एक पत्थर को पार कर सफर में आगे बढ़ जाने जैसा है। क्योंकि खुद राम बहादुर राय एक जीवंत मील के पत्थर हैं।

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राजनीति में अलग इतिहास बनाना चाहता हूं : मनोज तिवारी

गायन से करियर की शुरुआत करने वाले मनोज भोजपुरी सिनेमा का जानामाना चेहरा हैं। उन्होंने अनुराग कश्यप की सफल फिल्म ‘गैंग्स आफ वासेपुर’ के ‘जिया तू’ गाने में भी आवाज दी है। मनोज ने इससे सहमति जताई कि फिल्म और गायन से लोगों के बीच बनी उनकी छवि से उन्हें फायदा हुआ है।

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