महिलाएं सीखें सिलाई, बने आत्‍मनिर्भर

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आधीआबादी ब्‍यूरो। महिलाओं को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए वैसे तो रोजगार के भरपूर अवसर हैं,  लेकिन सिलाई एक ऐसी कला है जो महिलाएं अपने घर पर रहकर भी कर सकती हैं। इससे अच्‍छी आमदनी के साथ-साथ घर-परिवार की देखभाल और उनका साथ भी लगातार बना रहता है। यही कारण है कि महिलाओं में सिलाई सीखने की लगन सबसे अधिक देखी गई है। भारत में रोजगार के क्षेत्र में महिलाएं सर्वाधिक सिलाई-बु‍नाई-कढ़ाई के क्षेत्र से ही जुड़ी हुई हैं। सिलाई सिखने से पहले हमे यह जानना बेहद आवयशक हैं कि सिलाई  कितने तरह का होता है।


1 कच्ची सिलाई
2 तुरपाई

कच्ची सिलाई तीन प्रकार की होती हैं।
* कच्चा टांका  कपड़े के दो भागों को जाड़ने के लिए या दो किनारों की सुन्दरता बठ़ाने के लिए किया जाता है। ये भी दो प्रकार का होता है बड़ा कच्चा और छोटा कच्चा ।
* टेढ़ा कच्चा यह अपने नाम के अनुरुप तिरछे आकार में किया जाता है। अधिकतर जेबों के मुंह पर ,बैल्ट की लाइनिंग को दबाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।
* थै्रड मार्का  जिन कपड़ो पर फिरकी मार्का का प्रयोग नही किया जा सकता उसकी एक तह का निशान दूसरी तह पर लगाने के लिए इासका प्रयोग किया जाता है।

तुरपाई भी कई प्रकार की होती है
* बखिया का टाकां:  बखिया दो प्रकार की होती है हाथ एवं मशीन की बखिया। पहले जब मशीन का अविष्कार नही हुआ था तो हाथ की बखिया का प्रचलन था । लेकिन जब से  मशीन का अविष्कार हुआ है तब से हाथ की बखिया का इसतेमाल उन जगहो पर किया जाता है जहां मशीन का इसतेमाल नही हो सकता या फिर छोटी मोटी मरम्मत करने के लिए किया जाता है।
विधि: हाथ की बखिया लगाते समय टांक बायी ओर से लगाते हुए दायी ओर को जाती है । बखिया करते समय एक बार में सुई पर एक ही टांका लिया जाता है। जहां पहले सुई निकाली गई थी वही के अंतिम छोड़ से दूसरा टांका उठाया जाता है ।

* तुरपाई का टांका  जिन वस्त्रों के किनारो पर मशीन का बखिया शोभायमान नही होता है वहां पर तुरपाई का प्रयोग किया जाता है जैसे कि फ्राक के धेरे ,गला , बाजू के किनारे आदि। यह कई प्रकार के होते है । स्लिम हेम ,नैरो हेम, अन्धी तुरपाई।

* चाम्पे का टांका  इसका प्रयोग साड़ी के फॉल लगाने में किया जाता है ।
विधि: यह टांका भी बखिया के टांके के समान लेते है। किन्तू उल्टी ओर बड़ा टांका तथा सीधी ओर छोटा सा टांका लिया जाता है।

* सारजु का टांका  किनारों की तारों को रोकने के लिए इस टांके का प्रयोग किया जाता है।
विधि: जिस किनारे पर यह करना हो उस स्थान पर तिरछे टांके लेकर यह बनाया जाता हैं ।
* गोल तुरपाई  गोलाई मे कटा हुआ भाग सदा ही नीचे से ज्यादा तथा उपर से कम से कम होता चला जाता है अतः उसको मोड़ने में परेशानी होती है

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