बॉलिवुड को उद्योग का दर्जा एनडीए ने दिया था, लेकिन फिल्‍मवालों के निशाने पर हमेशा भाजपा ही रहती है!

आधीआबादी ब्‍यूरो। फिल्‍मों को लेकर फिल्‍म इंडस्‍ट्रीज वाले अधिकांश लोगों का रवैया भाजपा सरकार की आलोचना करना ही रहा है। लेकिन फिल्‍म इंडस्‍ट्रीज को पहली बार उद्योग का दर्जा एनडीए की वाजपेयी सरकार ने ही दिया था, जिसके बाद बैंकों व शेयर बाजार से कर्ज लेकर करोड़ों की लागत से फिल्‍म बनाने और करोड़ों कमाने का रास्‍ता खुला। कांग्रेस के राज में तो फिल्‍म में भी दाउद जैसे लोगों का कालाधन ही लगता था। सच पूछिए तो कांग्रस की माया ही पूरी तरह से काला धन रही है और हर उद्योग को उसने बैक डोर से ही चलाने की कोशिश की है।

 

इंडिया टीवी बेव लिखता है, "करोड़ों रुपए कमाने वाली फिल्में न केवल देश में करोड़ों लोगों के मनोरंजन का एक साधन हैं बल्कि देश की तरक्की में भी इन फिल्मों का अहम किरदार है। इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलेगा कि देश में बॉलीवुड को इंडस्ट्री का दर्जा वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के शासनकाल में दिया गया था। यह दर्जा किसी भी उद्योग के लिए बाजार से कर्ज उठाते वक्त अहम भूमिका निभाता है। सीधे शब्दों में समझें तो इंडस्ट्री का दर्जा मिलने के बाद कोई भी प्रोड्यूसर कानूनी तौर पर अपने वेंचर के लिए वित्तीय संस्थाओं या शेयर बाजार से पैसा जुटा सकता है। शुरुआती वर्षों में इस नवजात इंडस्ट्री को टैक्स हॉलि-डे यानी तमाम तरह के टैक्सों से मुक्ति दी गई। लेकिन बाद में 50 से 60 फीसदी तक टैक्स देकर ये इंडस्ट्री सीधे तौर पर देश की जीडीपी में सहयोग करने लगी।"

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