आरुषि मर्डर केस पर बनी फिल्‍म 'तलवार' कसी हुई पटकथा के साथ एक बेहतरीन फिल्‍म

चंद्रमोहन शर्मा, नवभारत टाइम्‍स। करीब 7 साल पहले देश की राजधानी से सटे नोएडा में एक ऐसा दोहरा मर्डर केस हुआ जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। ऐसा शायद पहली बार हुआ जब देश की नंबर वन जांच एजेंसी सीबीआई ने इस केस की एक नहीं, दो बार अलग-अलग एंगल से जांच की और उसके बाद भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई। ताज्जुब होता है कि एक ऐसी दोहरी हत्या की गुत्थी जो सिर्फ चार लोगों के आसपास टिकी, इनमें से भी दो इस दुनिया में नहीं हैं और बाकी बचे दो पर पुलिस और खूफिया एजेंसियां बरसों बाद भी एकमत नहीं हो पाईं। शायद यही वजह रही बॉलिवुड में हर बार कुछ अलग और लीक से हटकर फिल्म बनाने में अपनी पहचान बना चुके विशाल भारद्वाज ने ऐसे संवेदनशील मसले पर फिल्म बनाने का फैसला किया।

 

इस फिल्म को शुरू करने से पहले विशाल भारद्वाज के साथ इस फिल्म का निर्देशन कर रहीं मेघना गुलजार ने इस दोहरे हत्याकांड की जांच से जुड़े हर पहलू पर गौर से काम करने पर अपनी रिसर्च टीम को लगा दिया था। ऐसे में इस टीम ने जांच रिपोर्टों का गहन अध्ययन किया तो नोएडा में जाकर इस हत्याकांड के बिखरे अलग-अलग तारों को भी अपने ढंग से जोड़ने का बाखूबी काम हुआ। स्टार्ट टु लास्ट एक पल भी फिल्म की कहानी अपने ट्रैक से जरा भी नहीं भटकती। मेघना की तारीफ करनी होगी कि उन्होंने फिल्म का ऐसा क्लाइमैक्स पेश करने की हिम्मत जुटाई जो इस दोहरे हत्याकांड पर अलग-अलग जांच सीमित द्वारा पेश की गई हो। ताज्जुब होता है कि लोकल पुलिस की जांच के बाद सीबीआई की दो टीमों ने अपनी जो फाइनल रिपोर्ट पेश की उसमें कहीं समानता नजर नहीं आती।

रिलीज से पहले ही इस फिल्म का क्रेज हर तरफ नजर आया, तभी तो इस फिल्म को 40वें टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के लिए भी चुना गया। नोएडा के आरुषि मर्डर पर बनी इस फिल्म को बनाने में डायरेक्टर ने कुछ फिल्मी आजादी भी ली है। मसलन, फिल्म के किरदारों के नामों और अपार्टमेंट के नाम में बदलाव किया गया।

कहानी : नोएडा के समीर अपार्टमेंट में अपने डॉक्टर माता-पिता रमेश टंडन (रमेश काबी) और नूतन टंडन (कोंकणा सेन शर्मा) के साथ रह रहीं 14 साल की श्रुति टंडन (आयशा परवीन) की हत्या के बाद लोकल पुलिस इंस्पेक्टर धनीराम (गजराज राव) अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचता है। धनीराम इस बेहद गंभीर केस की जांच किस एंगल से कर रहा है इसका अंदाजा आप यहीं से लगा सकते हैं कि सिपाही मौके और लाश की तस्वीरे लेने के लिए आए फोटोग्राफर से अलग-अलग पोज में फोटो खिंचवाने में बिजी है। पूरी जांच में धनीराम को पता नहीं चलता कि यहीं पर एक और मर्डर टंडन परिवार के घरेलू नौकर का भी हुआ है। लोकल पुलिस आनन-फानन में केस को खत्म करने में लगी है, क्योंकि मीडिया में पुलिस की खूब किरकिरी हो रही है।

श्रुति के पापा डॉक्टर टंडन को दोषी मानकर पुलिस अरेस्ट करके जेल भेज देती है। इसके बाद सीबीआई की टीम अश्विन कुमार (इरफान खान) के नेतृत्व में केस की गहराई से परत दर परत जांच करने के बाद डॉक्टर टंडन को बेगुनाह पाती है, लेकिन एजेंसी चीफ इस रिर्पोट से सहमत नहीं है। एकबार फिर जांच शुरू होती है। इस कहानी के साथ-साथ फिल्म में अश्विन कुमार और उनकी वाइफ रीमा कुमार (तब्बू) की कहानी भी चलती है, जो शादी के कई साल गुजर जाने के बाद अब अलग रहने का फैसला कर चुके हैं।

ऐक्टिंग : डॉक्टर रमेश टंडन के रोल में नीरज काबी ने बेहतरीन ऐक्टिंग की है, एक ऐसे पिता के किरदार में जो अपनी बेटी को खो चुका है और पुलिस उसे ही हत्यारा साबित करने पर आमादा है। ऐसे पिता की बेबसी और असहज स्थिति को नीरज ने पर्दे पर जीवंत कर दिखाया है। श्रुति टंडन की मां के किरदार में कोंकणा सेन शर्मा ने एक बार फिर खुद को बेहतरीन साबित किया। सीबीआई जांच अधिकारी अश्विन कुमार के रोल में इरफान खान का जवाब नहीं। इरफान जब-जब स्क्रीन पर आए तो कहानी की रफ्तार पहले से और तेज हो गई। फिल्म में इरफान की वाइफ बनी तब्बू को फुटेज बेशक कम मिली, लेकिन अपने किरदार में वह खूब जमी हैं। अन्य कलाकारों में यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर धनीराम के किरदार में गजराज राव का अभिनय तारीफे काबिल है।

निर्देशन : स्क्रिप्ट के साथ मेघना गुलजार ने सौ फीसदी न्याय किया है। शूटिंग शुरू करने से पहले कंप्लीट होमवर्क और टीम की फुल रिसर्च ने फिल्म को एक ऐसी बेहतरीन फिल्म बना दिया है, जो हॉल से बाहर आने के बाद भी दर्शकों को इस दोहरे हत्याकांड पर कुछ सोचने को बाध्य करती है। मेघना ने हर किरदार से बेहतरीन काम लिया तो करीब सवा दो घंटे की फिल्म की स्पीड कहीं कम नहीं होने दी।

संगीत : मेघना और विशाल इस सच्चाई को शायद पहले से जानते थे कि ऐसे सब्जेक्ट पर बनने वाली फिल्म में गानों की गुंजाइश नहीं रहती, लेकिन इन दोनों ने कहानी की गति को धीमा करे बिना गानों को उस सिचुएशन पर बैकग्राउंड में पेश किया, जहां यह गाने कहानी का हिस्सा बन जाते हैं।

क्यों देंखे: अगर अच्छी, बेहतरीन फिल्मों के शौकीन हैं तो मिस न करें। देशभर को हिला देने वाले आरुषि हत्याकांड की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म को अगर हम इस दोहरे हत्याकांड पर तैयार एक श्वेतपत्र कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

कलाकार- इरफान खान, कोंकणा सेन शर्मा, नीरज काबी, तब्बू। निर्देशक मेघना गुलजार

Web Title: movie-review-Talvar


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