रिश्ते नाते

लगभग 400 वर्ष पुराना है मदर्स डे का इतिहास

मदर्स डे दुनिया भर में मनाया जाता है। भारत में मदर्स डे मई माह के दूसरे रविवार को मनाते हैं। मदर्स डे का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। प्राचीन ग्रीक और रोमन इतिहास में मदर्स डे को मनाया जाता था। इसके पीछे कई धार्मिक कारण जुड़े थे।

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मां को कुछ देना ही चाहते हो तो अपना समय दो, बाजारू गिफ्ट उन्हें नहीं चाहिए!

सौरभ गुप्ता, नई दिल्ली। 12 मई को सुबह से ही देख रहा था कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया सभी पर माँ और माँ ही दिख रही थी। आज से कुछ साल पहले तक किसी को इसका पता नहीं था। भले ही एक दिन के लिए ही सही, लेकिन हम अपनी माँ को खास होने का एहसास तो दिलाते है! वैसे पश्चिम और बाजार के अंधानुकरण से हमने मदर्स डे को तो अपना लिया, लेकिन क्या कभी सोचा कि जिस मां से हमारा वजूद है वो हमसे क्या चाहती हैं...?

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पड़ोसी से बनाए मधुर रिश्ते

साकेत में रहनेवाली हिमानी शुक्ला वर्षों से इस इलाके में रह रही हैं लेकिन उन्हें इतना पता नहीं है कि उनके पड़ोस में कौन रहता है। उनके नाम तक नहीं मालूम है, वे लोग क्या करते हैं और कहां के हैं ये तो दूर की बात है। सुबह पति के ऑफिस और बच्चों के स्कूल जाने के बाद हिमानी पूरे दिन अकेली रहती है । अक्सर उन्हें ये अकेलापन खलता भी है लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पाती है। कई बार अचानक से तबियत खराब होने पर वो अकेली परेशानी में फंस जाती है, उस समय उन्हें लगता है कि काश कोई जानने वाला पास में होता तो कितना अच्छा होता लेकिन अफसोस कि पड़ोसी भी जानने वाला नहीं है।

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पापा जल्‍दी न आना...अब आपका नहीं किसी और का इंतजार करती रहती हूं मैं

नई दिल्‍ली। पापा जो बचपन में हमारा ख्याल रखते हैं। पापा जो युवावस्था में हमें सही मार्ग दिखाते हैं और दुनिया से बचाते हैं। और वही पापा एक दिन हमारे लिए आंख बचाने की 'वस्तु' हो जाते हैं। वस्तु, जी हां 'वस्तु' क्योंकि किसी वस्तु का ही हम उपयोग करते हैं। जिनसे हमें प्यार होता है, उनके लिए हमारे दिल में सम्मान और समर्पण की भावना होती है, लेकिन आधुनिकता की होड़ में शामिल कुछ युवतियों में पापा को सिर्फ वस्तु बनाने की होड़ है। 'माई पापा इज माई एटीम...' कनाट प्लेस में बिकती टी-शर्ट को पहने एक युवती शायद यही बताना चाह रही थी।

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राष्‍ट्रीय नायक नरेंद्र मोदी की राष्‍ट्र...
राष्‍ट्रीय नायक नरेंद्र मोदी की राष्‍ट्रनीति!

संदीप देव । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्‍तासीन हुए एक महीना हो चुका है। बहुत कुछ 'मोदी सरकार' का विजन और रोड मैप स्‍पष्‍ट हो चुका है और अभी बहुत कुछ स्‍पष्‍ट होना बांकी है। लेकिन एक बात [...]

होली हिंदुस्‍तान की गहरी प्रज्ञा से उपजा...
होली हिंदुस्‍तान की गहरी प्रज्ञा से उपजा हुआ त्‍यौहार है

अमृत साधना।गहरी प्रज्ञा से उपजा हुआ त्योहार है। उसमें पुराण कथा एक आवरण है, जिसमें लपेटकर मनोविज्ञान की घुट्टी पिलाई गई है। सभ्य मनुष्य के मन पर नैतिकता का इतना बोझ होता है कि उसका [...]

महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पे...
महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पेशकश: यहां होता है पहली माहवारी पर जश्न

सुशीला सिंह, बीबीसी संवाददाता।ी हो रही है. अनोखी इस मायने में कि असम की परंपरा के अनुसार यहां दुल्हन तो होती है लेकिन दूल्हा एक केले का पौधा [...]

भारत को कुछ बनने की जरूरत नहीं, भारत को ...
भारत को कुछ बनने की जरूरत नहीं, भारत को भारत ही बनना चाहिए: नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली।द्र मोदी ने अपनी अमेरिका यात्रा से पहले सीएनएन के वरिष्ठ पत्रकार फरीद जकारिया को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया। पढ़िए उस इंटरव्यू के सवालों के जवाबः-

योग गुरु से बिजनस टाइकून बने बाबा रामदेव...
योग गुरु से बिजनस टाइकून बने बाबा रामदेव, 2000 करोड़ का FMCG कारोबार

नई दिल्ली। भले ही योग और एफएमसीजी का संयोजन एक-दूसरे से एकदम उलट हो (योग आंतरिक शांति के लिए और एफएमसीजी बाहरी सौंदर्य के लिए) लेकिन बाबा रामदेव ने इन दोनों ही क्षेत्रों में एकदम सटीक ' [...]

मेरे लिए पंडित मदनमोहन मालवीय और अटलबिहा...
मेरे लिए पंडित मदनमोहन मालवीय और अटलबिहारी वाजपेयी का अर्थ!

संदीप देव। खुशी का दिन है। पंडित मदनमोहन मालवीय जी को भारतरत्‍न मिलना गर्व की बात तो है ही, मुझे इसका गर्व ज्‍यादा है कि जिस काशी हिंदू विश्‍वविद्यालय की उन्‍होंने स्‍थापना की, मैं [...]

गुरु तेगबहादुर की हत्‍या से भी ‪#‎Aurang...
गुरु तेगबहादुर की हत्‍या से भी ‪#‎Aurangzeb‬ को बरी करते हैं वामपंथी इतिहास लेखक!

संदीपदेव‬।ित और झूठे होते हैं, इसे देखना हो तो एनसीईआरटी की कक्षा- 11 के मध्‍यकालीन भारत का इतिहास पढ़ लीजिए। छत्रपति शिवाजी से लेकर गुरु तेगबहादुर तक के लिए एक वचन 'तुम' [...]

यह इतिहास है और यह क्रूर है! यह न मेरा ह...

संदीप देव। जातिवाद पर ऐतिहासिक तथ्‍यों के जरिए मैंने कुछ रोशनी डालने की कोशिश की है, लेकिन कुछ तथाकथित दलितवादी और सवर्ण जाति की ऊंची नाक वाले लोगों को यह पसंद नहीं आ रहा है। [...]

दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!...
दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!

आधी आबादी ब्‍यूरो, नई दिल्ली। जंगल बनता जा रहा है। बच्चों के लिए खेलने के लिए जगह नहीं बची है। पार्क भी धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। अभिभावकों की [...]

नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदे...
नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश

दिल्‍ली।  कमल इंसटिट्यूट ऑफ हायर एडूकेशन के छात्र और छात्राओ ने 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ ' अभियान पर नुक्कड नाटक का आयोजन किया। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र [...]

असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के ब...
असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के बीच रहती हूं, लेकिन मैंने कभी भारत में भेदभाव महसूस नहीं किया!

सोफिया रंगवाला। पेशे से डॉक्टर हूं। बंगलोर में मेरी एक हाइ एण्ड लेजर स्किन क्लिनिक है। मेरा परिवार कुवैत में रहता है। मैं भी कुवैत में पली बढ़ी हूं लेकिन 18 साल [...]

प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम कर...
प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम करे, सूचना प्रसारण मंत्री को तो क्रिकेट डिप्‍लोमेसी से ही फुर्सत नहीं है!

संदीप देव।उटलुक पत्रिका के एक गलत खबर के कारण जो हंगामा हुआ और सदन को स्‍थगित करना पड़ा, इसका जिम्‍मेवार कौन है? क्‍या मोदी सरकार मीडिया के इस तरह के गैरजिम्‍मेवार और सबूत [...]

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