जोगेंद्रनाथ मंडल के इतिहास से सबक लो सेक्‍यूलरवादियों...!

संदीप देव। आजकल के तथाकथित सेक्‍यूलरों के समान ही भारत विभाजन के समय एक सेक्‍यूलर नेता था, जोगेंद्रनाथ मंडल। नीतीश कुमार, लालू यादव और मुलायम सिंह यादव की तरह वह भी अनुसूचित जाति का नेता था। नीतीश-लालू-मुलायम की ही तरह वह मुस्लिम तुष्टिकरण के बल पर मुस्लिम-अनुसूचित जाति गठजोड़ का बड़ा नेता बनना चाहता था। जिन्‍ना के भारत विभाजन की मांग को उसने जायज ठहराया, ठीक वैसे ही जैसे नीतीश-लालू-मुलायम जैसे नेता कटटर मुस्लिमों की हर नाजायज मांग को जायज ठहराते हैं।

जोगेंद्रनाथ मंडल ने जिन्‍ना और लियाकत अली खान की हां में हां मिलाते हुए अलग पाकिस्‍तान की मांग को मुसलमानों का हक बताया था। उसे इसका ईनाम भी मिला और पाकिस्‍तान का निर्माण होते ही पाक के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने जोगेंद्रनाथ मंडल को अपनी सरकार में पहला विधि व श्रम मंत्री बनाया था।

1950 में लियाकत अली खान ने तब के पूर्वी पाकिस्‍तान और आज के बंग्‍लादेश में रह रहे हिंदुओं को पाकिस्‍तान खाली करने का हुक्‍म जारी किया। जब हिंदुओं ने अपना घर-बार नहीं छोड़ा तो उनके नरसंहार के लिए जेहादी मुसलमानों को इशारा कर दिया गया। 1950 में पूर्वी पाकिस्‍तान में बडे पैमाने पर हुए हिंदुओं के नहसंहार का मास्‍टर माइंड पाकिस्‍तान का प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को ही माना जाता है। और आपको यह भी जानना चाहिए कि वह भी मुलायम सिंह यादव की तरह मूल रूप से उत्‍तर प्रदेश का ही बाशिंदा था। लियाकत अलीखान उप्र के मुस्लिम जमींदार खानदान से ताल्‍लुक रखता था।

यह इसलिए कह रहा हूं कि पाकिस्‍तान निर्माण की सबसे अधिक मांग जिन मुस्लिमों ने उठाई थी, उसमें उप्र, बिहार व बंगाल के मुस्लिम सर्वाधिक थे और आज भी यही वो प्रदेश हैं, जहां सबसे अधिक मुस्लिम कटटरता की समस्‍या बनी हुई है। धन-संपत्ति को छोड़ कर मजबूरी में पाकिस्‍तान नहीं जाने वाले कटटर मुस्लिम आज भी इन प्रदेशों बने हुए हैं और कहीं न कहीं भारत को तोड़ कर फिर एक पाकिस्‍तान के निर्माण की मंशा में जुटे हुए हैं। वैसे मुंबई, मद्रास, हैदराबाद, अहमदाबाद, गोधरा के मुस्लिमों ने भी बड़े पैमाने पर पाकिस्‍तान के समर्थन में वोट दिया था और मजबूरीवश ये अलगाववादी मानसिकता के मुसलमान आज भी इसी देश में बने हुए हैं। भारत विभाजन से लेकर आज तक देश में जहां-जहां सर्वाधिक सांप्रदायिक दंगे हुए हैं, वो वही क्षेत्र है, जहां के मुस्लिमों ने इस्‍लामी राज्‍य की स्‍थापना के लिए पाकिस्‍तान के पक्ष में मांग उठाई थी। इसमें पंजाब और दिल्‍ली का सिख नरसंहार एक अपवाद है।

हां तो असली ऐतिहासिक सच्‍चाई पर आते हैं। जब पूर्वी पाकिस्‍तान में हिंदुओं का नरसंहार चल रहा था तो पाकिस्‍तान के विधि व श्रम मंत्री होने के नाते जोगेंद्रनाथ मंडल ने इसका विरोध किया। फिर क्‍या था, प्रधानमंत्री लियाकत अलीखान ने उन्‍हें बंदी बनाने का हुक्‍म जारी कर दिया। बेचारे सेक्‍यूलर जोगेंद्रनाथ मंडल जान बचाने के लिए गददी छोड़कर भाग खड़े हुए और इसी भारत में उन्‍हें शरण मिली।

ओवेसी जैसों कटटर मुस्लिमों की हर नाजायज मांग पर ता-थईया कर नाच करने वाले सेक्‍यूलरों को यह याद रखना चाहिए कि उनकी सेक्‍यूलर दुदुंभि तभी तक बज रही है जब तक मुस्लिम इस देश में अल्‍पसंख्‍यक हैं। मुस्लिमों के बहुसंख्‍यक होते ही लालू, मुलायम, नीतीश, मायावती, ममता बनर्जी, दिग्विजय सिंह, सुशील कुमार शिंदे व इन सभी की सेक्‍यूलर सरगना सोनिया गांधी और समूची तथाक‍थित पत्रकार, बुद्धिजीवी व मार्क्‍सवादी बिरादरी की हालत भी जोगेंद्रनाथ मंडल जैसी होनी तय है और तब कोई भारत नहीं बचेगा, जहां वो भाग कर अपनी जान बचा सकें।

Web Title: indian secularism.1

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