ब्राहमणों की हठधर्मिता ने पूरे पूर्वी बंगाल (बंग्‍लादेश) को मुसलमान बना डाला था!

संदीप देव। सेवानिवृत्‍त जस्टिस काटजू की मूर्खता (खुद कह चुके हैं 90 फीसदी भारतीय मूर्ख हैं, इसलिए मैं उन्‍हें 10 फीसदी में गिनने की मूर्खता नहीं करूंगा) देखिए कि वह बिना किसी तथ्‍यात्‍मक जानकारी के कह रहे हैं कि भारत के 95 फीसदी मुसलमानों ने स्‍वेच्‍छा से धर्मांतरण किया था और केवल 5 फीसदी का बलात् धर्मांतरण हुआ था। इस मूर्ख व्‍यक्ति को दिल्‍ली के शीशगंज गुरुद्वारा ले जाइए और गुरु तेगबहादुर के बलियान का इतिहास बताइए!

 

वैसे मैं आपको अरब से लेकर भारत के एक एक बडे शहर के धर्मांतरण की तथ्‍यपरक सच्‍चाई अपने इतिहास अभियान में बताता रहूंगा। और जब पत्रिका शुरू हो जाएगी तो पूरे संदर्भ ग्रंथों के साथ बताऊंगा, तब तक छिटपुट बताता चलता हूं। आज पूर्वी बंगाल अर्थात वर्तमान बंग्‍लादेश से के धर्मांतरित होने की जानकारी से शुरू करता हूं।

बंगाल के एक प्रसिद्ध राजा हुए जिनका नाम कालाचंद राय था। उनकी इस्‍लामी बर्बरता के लिए लोग उन्‍हें काला पहाड़ पुकारने लगे थे और इतिहास में वह इसी नाम से जाने जाते हैं। काला पहाड़ की बर्बरता का कारण घोर जातिवादी मानसिकता के भरे कुछ ब्राहणों की हठधर्मिता थी, जिसका बदला उसने पूरे पूर्वी बंगाल को मुसलमान बनाकर लिया।

कालाचंद राय एक बंगाली ब्राहण युवक था। पूर्वी बंगाल के उस वक्‍त के मुस्लिम शासक की बेटी से उसे प्‍यार हो गया। बादशाह की बेटी ने उससे शादी की इच्‍छा जाहिर की। वह उससे इस कदर प्‍यार करती थी कि उसने इस्‍लाम छोड़कर हिंदू विधि से उससे शादी की इच्‍छा जाहिर की। ब्राहमणों को जब पता चला कि कालाचंद राय एक मुस्लिम राजकुमारी से शादी कर उसे हिंदू बनाना चाहता है तो ब्राहमण समाज ने इसका विरोध किया। उसने युवती के हिंदू धर्म में आने का न केवल विरोध किया, बल्कि कालाचंद राय को भी जाति बहिष्‍कार की धमकी दी।

कालाचंद राय गुस्‍से से आग बबुला हो गया और उसने इस्‍लाम स्‍वीकारते हुए उस युवती से निकाह कर उसके पिता के सिंहासन का उत्‍तराधिकारी हो गया। राजा बनने से पूर्व ही उसने तलवार के बल पर ब्राहमणाों को मुसलमान बनाना शुरू किया। पूरे पूर्वी बंगाल में उसने इतना कत्‍लेआम मचाया कि लोग तलवार के डर से मुसलमान होते चले गए। इतिहास में इसका जिक्र है कि पूरे पूर्वी बंगाल को इस अकेले व्‍यक्ति ने तलवार के बल पर इस्‍लाम में धर्मांतरित कर दिया और यह केवल उन मूर्ख, जातिवादी, अहंकारी व हठधर्मी ब्राहमणों को सबक सिखाने के उददेश्‍य से किया गया था। उसकी निर्दयता के कारण इतिहास उसे काला पहाड़ के नाम से जानती है।

मूर्ख काटजू साहब पूर्वी बंगाल किसी सूफीवाद या अपने स्‍वेच्‍छा से मुसलमान नहीं बना था, बल्कि बदले में जलते एक युवक ने तलवार के जोर पर पूरी कौम को ही मुसलमान बना दिया था। स्‍वेच्‍छा से केवल काला पहाड ने इस्‍लाम अपनाया था। आप देख लीजिए, आपके फीसदी वाले में काला पहाड व 95 फीसदी वाले में पूरा पूर्वी बंगाल आता है। यदि इतिहास का ज्ञान नहीं है तो देश को मूर्ख बनाने की कोशिश न करें। देश की जनता उस 90 फीसदी वाले क्‍लब में शमिल होना नहीं चाहती, जिसके अध्‍यक्ष आप हैं।

और हां महोदय काटजू साहब, भारत विभाजन से पूर्व 1946 में पूर्वी बंगाल में डेढ करोड हिंदू थे, आज वो हिंदू कहां गए, जरा यह भी बता दीजिए? 1946 में कौन से सूफीवाद की लहर चली थी कि डेढ करोड हिंदू पूर्वी बंगाल से गायब हो गए। महोदय, जघन्‍य हत्‍या से या तो उनका नामोनिशान मिट गया, या तो मुसलमान हो गया, या कुछ भाग कर भारत में आ गए। कहां गए वो हिंदू, बताएंगे मूर्ख क्‍लब के अध्‍यक्ष श्रीमान काटजू साहब....!


काला पहाड़ के संदर्भ में पुस्‍तक संदर्भ:
1) संस्‍कृति के चार अध्‍याय: रामधारी सिंह दिनकर
2) पाकिस्‍तान का आदि और अंत: बलराज मधोक

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