आज विज्ञान ओम की शक्ति को पहचान रहा है जबकि हमारे ऋषि-मुनी, योगी तो पहले ही इस तथ्य को जान चुके थे!

आधी आबादी ब्‍यूरो। वेदों में ओम (ऊॅ) को शब्दब्रह्म कहा गया है। यह तथ्य भी उल्लेखित है कि तेजस तत्व के अधिष्ठाता भगवान भास्कर की तेज ऊर्जा के संग निकलने वाली ध्वनि में ओम स्वर उच्चरित होता है। अब विज्ञान ने भी इसकी पुष्टि कर दी है कि सूर्य से ध्वनि निकलती है और इस ध्वनि में ओम उच्चारण सुनाई देता है।

 

भौतिकी विभाग (आइआइटी बीएचयू) के प्रो. बीएन द्विवेदी बताते हैं कि यूरोपियन स्पेस एजेंसी और नेशनल एयरोनाटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) की संयुक्त प्रयोगशाला सोलर हिलियोस्फेरिक आब्जर्वेटरी (सोहो) ने संयुक्त रूप से धरती से 15 लाख किलोमीटर दूर से उपकरणों के सहारे सूर्य से निकलने वाली ध्वनि पकड़ी। इसके लिए उपयोग में लाई गई माइकल्सन डापलर इमेजर विधि। सोहो प्रयोगशाला से जुड़े प्रो. द्विवेदी बताते हैं कि यह बड़ी उपलब्धि है। महीनों के विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकला कि यह ध्वनि ओम के उच्चारण की तरह ही है, जो भारतीय वैदिक मनीषा का आधार है।

प्रो. द्विवेदी यह भी जोड़ते हैं कि भले ही विज्ञान अपनी पुष्टि करता रहे लेकिन भारतीय वैदिक ज्ञान तो विज्ञान के इन तथ्यों को पहले ही जानता रहा है। हालांकि बदलते दौर में अपनी वैदिक ज्ञान धारा को नवीन आयाम देने की जरूरत है जिसमें विज्ञान की भूमिका हो सकती है।

इसी क्रम में संस्कृत विद्या धर्मविज्ञान संकाय (बीएचयू) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. हृदय रंजन शर्मा भी कहते हैं कि आज विज्ञान ओम की शक्ति को पहचान रहा है जबकि हमारे ऋषि-मुनी, योगी तो पहले ही इस तथ्य को जान चुके थे। वेदों में ओमकार को ही नित्य कहा गया है।

बताते हैं कि सूर्य से निकलने वाली ध्वनि चार प्रकार की है। बैखरी नामक ध्वनि सुनी जा सकती है। इसके अतिरिक्त सूक्ष्म ध्वनियां भी निकलती हैं जिन्हें वेदों में मध्यमा, पश्यंती और परा कहा गया है। ये सभी ध्वनियां ब्रह्मांड में गूंजती हैं। इन ध्वनियों को योगियों ने सुना है और इसके प्रमाण भी हैं।

Web Title: The Power of Om-1 

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