सेहत

आपका परफ्यूम और डियोडेरेंट आपके शुक्राणुओं की गति को कर सकता है कम!

लंदन। आजकल टीवी एड में डियोडेरेंट के प्रचार में पुरुषों पर लड़कियों को मरते, कूदते दिखाया जाता है, लेकिन सच्‍चाई बिल्‍कुल इसके उलट है। आपका तेज परफ्यूम और डियाटेरेंट आपके शुक्राणुओं की गतिशीलता को कम कर सकता है, जिससे नपुंसता जैसी स्थिति का सामना भी आपको करना पड़ सकता है। इसके अलावा, वालपेपर, सैंडल, नेल पॉलिश, एवं कालीनों में पाए जाने वाले रसायन भी पुरुषों के शुक्राणुओं की गतिशीलता कम कर सकते हैं जिससे संतानोत्पत्ति में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

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महिलाओं में दिल की बीमारियां रह जाती हैं अनदेखी : WHO

कोलकाता। विश्व हृदय दिवस से एक दिन पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सोमवार को कहा कि भारतीय महिलाओं में दिल की बीमारियां अनदेखी रह जाती हैं और उनका इलाज नहीं होता।

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आयुर्वेद के हिसाब से आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए क्या करे क्या न करें का विधान!

* दूध और कटहल का कभी भी एक साथ सेवन नहीं करना चाहिये ।
*. दूध और कुलत्थी भी कभी एक साथ नहीं लेना चाहिए।
*. नमक और दूध (सेंधा नमक छोड़कर) दूध और सभी प्रकार की खटाइयां, दूध और मूँगफली, दूध और मछली, एक साथ प्रयोग ना करें।

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भारत में कम हुआ HIV का प्रकोप, एड्स से होने वाली मौतों में 41 फीसदी की कमी

भाषा, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि भारत वर्ष 2000 और 2014 के बीच एचआईवी संक्रमण के नए मामलों में 20 प्रतिशत से ज्यादा की कमी लाकर इस वायरस के प्रकोप को नियंत्रित करने में सफल रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस संबंध में जारी की गई एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2030 तक एड्स की महामारी को खत्म करने की दिशा में अग्रसर है।
इस रिपोर्ट का शीषर्क ‘किस तरह एड्स ने सबकुछ बदल दिया- सहस्त्राब्दी, विकास, लक्ष्य 6-15 वर्ष, एड्स पर प्रतिक्रिया से उम्मीद के 15 सबक’ है।

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अनाप-शनाप दवा खाने से पहले एक बार महिलाएं इस शोध को पढ़ लें

लंदन। दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव के प्रति महिलाएं पुरुषों से अधिक संवेदनशील क्यों होती हैं, इसका जवाब वैज्ञानिकों को मिल गया है। इसका कारण कोशिकाओं की संवेदनशीलता होती है। एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। महिलाएं खासकर जो रजोनिवृत्त हो चुकी हैं, की यकृत की कोशिकाएं दवाओं के दुष्प्रभावों के प्रति पुरुषों से ज्यादा संवेदनशील होती हैं।

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