मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य

नींद न आने की बीमारी के शिकार हैं भारतीय!

नई दिल्ली। एक ताजा सर्वे में पाया गया है कि भारतीयों में नींद की समस्याएं भरपूर हैं लेकिन वह इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं। फिलिप्स एंड नेलसन कंपनी ने अपने ताजा सर्वे में भारतीयों के सोने की आदतों का पता लगाया है। इसमें पाया गया कि 93 फीसद भारतीयों को आवश्यकतानुसार नींद नहीं मिलती। इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जिन्हें एक रात में आठ घंटे से कम की ही नींद मिलती है।

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कहीं आप भी नींद में तो नहीं कर रहे हैं सेक्‍स!

आजकल लोग नींद के दौरान कई अजीबोगरीब हरकतें कर रहे हैं, जिसमें सेक्‍स करने से लेकर खाना खाने और एसएमएस करने तक की क्रिया शामिल है। ब्रिटेन में इन परेशानियों के उपचार के लिए लोग मनोचिकित्‍सकों के पास जा रहे हैं। ब्रिटेन के मेंटल हेल्थ फ़ांउडेशन के अनुसार ब्रिटेन के तीस प्रतिशत लोग नींद से संबंधित किसी न किसी बीमारी के शिकार हैं। तो कहीं आप भी नींद के झोके में ही यौन क्रिया को तो नहीं अंजाम दे रहे हैं। अच्‍छी नींद से आप इस तरह की परेशानियों से बच सकते हैं।

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एचआईवी का पता लगते ही, सेक्स से मुंह फेर लेते हैं स्त्री पुरुष

नई दिल्ली। एचआईवी एड्स का पता लगते ही स्त्री पुरुष का सेक्स के प्रति रुझान में गिरावट आ जाता है। वह इस कदर depression से घिर जाते हैं कि सेक्‍स से उन्‍हें अरुचि हो जाती है और वह इससे मुंह फेर लेते हैं। एचआईवी एडस की जानकारी मिलते ही महिला और पुरुष दोनों के यौन व्‍यवहार में गिरावट आती है, लेकिन पुरुषों की मन:स्थिति अधिक चिंताजनक स्‍तर पर पहुंच जाती है।

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वीर्य महिलाओं को उबारता है डिप्रेशन से

न्‍यूयॉर्क। सेक्‍स महिलाओं को न केवल रिचार्ज करता है, बल्कि तनाव और अवसाद अर्थात डिप्रेशन (depression) से उबरने में भी उनकी मदद करता है। एक नए शोध में पता चला है कि पुरुषों के वीर्य में मौजूद रसायन महिलाओं के शरीर में रसायनिक बदलाव ले आता है, जिससे उनका मूड खुशगवार हो जाता है।

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दुनिया में सबसे अधिक तनाव में जी रही हैं भारतीय महिलाएं

दुनिया भर में महिलाएं इस वक्त खुद को बेहद तनाव और दबाव में महसूस करती हैं। यह समस्या आर्थिक तौर पर उभरते हुए देशों में ज्यादा दिख रही है। एक सर्वे में भारतीय महिलाओं ने खुद को सबसे ज्यादा तनाव में बताया। 21 विकसित और उभरते हुए देशों में कराए गए नीलसन सर्वे में सामने आया कि तेजी से उभरते हुए देशों में महिलाएं बेहद दबाव में हैं, लेकिन उन्हें आर्थिक स्थिरता और अपनी बेटियों के लिए शिक्षा के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद भी दूसरों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। सर्वे में 87 प्रतिशत भारतीय महिलाओं ने कहा कि ज्यादातर समय वे तनाव में रहती हैं और 82 फीसदी का कहना है कि उनके पास आराम करने के लिए वक्त नहीं होता।

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