स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: जब संभोग के समय ऊपर हो स्‍त्री!

कामसूत्र में आचार्य वात्‍स्‍यायन ने 'काम' को एक कला कहा है। स्‍त्री पुरुष इस कला को जितना अपने दांपत्‍य जीवन में उतारते हैं, उनका दांपत्‍य जीवन उतना ही मधुर होता चला जाता है। आधीआबादी आचार्य वात्‍स्‍यायन के कामसूत्र को आधुनिक शब्‍दावली के साथ पाठकों के समक्ष लेकर आया है। इसके लिए आधीआबादी डॉट कॉम की टीम ने सेक्‍स एक्‍सपर्ट, यूरोलॉजिस्‍ट, स्‍त्री रोग विशेषज्ञ, मनोचिकित्‍सक एवं सेक्‍स के क्षेत्र में अनुभव को आधार बनाकर काम करने वाले कई विशेषज्ञों से लगातार बातचीत की और उनके अनुभव के निचोड़ को पाठकों के समक्ष रखा है। इसका मकसद न केवल दांपत्‍य जीवन की एकरसता या उसके ऊब में फंसे पति पत्‍नी को इससे बाहर निकालना है, बल्कि उन्‍हें आनंददायक संभोग के अनुभव से खुद के काम ऊर्जा की अनुभूति भी कराना है।

परमात्‍मा तक पहुंचने का मार्ग है 'काम' अर्थात सेक्‍स
भारत की धरती पर न केवल 'कामसूत्र' की रचना हुई, बल्कि 'तंत्र' के जरिए 'काम ऊर्जा' का उर्ध्‍वगमन कर उस परम सत्‍ता परमात्‍मा तक पहुंचने का मार्ग भी तलाशा गया। प्राचीन भारत में काम को कभी पाप के नजरिए से नहीं, बल्कि तीन में से एक पुरुषार्थ और परमात्‍मा तक पहुंचने के लिए एक मात्र अनुभूत व प्रत्‍यक्ष ऊर्जा के रूप में देखा गया। मनोचिकित्‍सकों का मत है कि यदि स्‍त्री पुरुष अपने काम जीवन के आनंद की अनुभूति करें तो वह न केवल कई तरह की मानसिक व शारीरिक व्‍याधियों से मुक्‍त हो जाएंगे, बल्कि प्रेम की उस गहरी अनुभूति से भी रूबरू हो सकेंगे, जो पुरुष-प्रकृति के संम्मिलन से उत्‍पन्‍न होता है।   

राधा द्वारा कृष्‍ण से की गई 'विपरीत रति' ने 'गीत गोविंद' को कालजयी बना दिया

आधीआबादी डॉट कॉम चूंकि महिलाओं को समर्पित वेबसाइट है इसलिए इस कड़ी की शुरुआत उन यौन आसनों से की जा रही है, जिसमें ड्राइविंग पोजीशन में महिलाएं होती हैं। जयदेव की रचना गीत गोविंद में राधा और कृष्‍ण के 'काम केलि' में उस विपरीत आसन का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है, जिसमें राधा कृष्‍ण के वक्ष पर सवार होकर रतिक्रिया को संचालित करती हैं और थककर चूर हो जाती हैं। जयदेव जी ने इसे 'विपरीत रति' कहा है। विपरीत रति में सेक्‍स पर नियंत्रण हमेशा महिला के पास रहता है, जिससे वह रति क्रीड़ा की गति और योनि में लिंग के प्रवेश की गहराई व उसके धक्के को अपने हिसाब से नियंत्रित करती रहती हैं। मनोचिकित्‍सकों के मुताबिक विपरीत रति महिलाओं में आत्‍मविश्‍वास का संचार करता है। बेडरूम से निकला यह उत्‍साह व आत्‍मविश्‍वास उनके सामाजिक-आर्थिक जीवन की सफलता में भी बड़ा सहायक साबित होता है।

स्‍त्री के यौन कष्‍ट और पुरुष के ऊब का निदान है विपरीत रति
आनंदविहीन संभोग अधिकांश महिलाओं के लिए कष्‍टप्रद प्रक्रिया बनकर रह जाती है। संभोग में पुरुष के लिंग को उस स्‍तर पर दर्द की अनुभूति नहीं होती, जिस स्‍तर पर स्‍त्री योनि को दर्द से गुजरता पड़ता है। ऐसा स्‍त्री के अंदर संभोग की इच्‍छा नहीं होने के बावजूद संभोग से गुजरने के कारण होता है। अधिकांश पत्नियां अपने पति का मन रखने के लिए संभोग के लिए तैयार तो हो जाती हैं, लेकिन पुरुष लिंग के धक्‍के और उससे उत्‍पन्‍न दर्द से वह इतना डर जाती है कि उनका मन सेक्‍स के प्रति अरुचि से भर उठता है। बार-बार कष्‍टप्रद सेक्‍स में घसीटने के लिए वह अपने मन से पति को कभी माफ नहीं कर पाती हैं। पुरुष भी एक जैसी ही क्रिया को बार-बार दोहरा कर ऊब जाता है और वह घर से बाहर सेक्‍स की तलाश शुरू कर देता है।

सेक्‍स नियंत्रण की यह क्रिया महिलाओं में करता है आत्‍मविश्‍वास का संचार
मनोचिकित्‍सकों के मुताबिक सेक्‍स के दौरान जब महिला पुरुष के तेज धक्‍के से डरती हो, सेक्‍स के दौरान दर्द से परेशान होती हो और पुरुष लिंग की लंबाई अधिक हो तो उस दंपत्ति के लिए विपरीत रति से उपयुक्‍त कोई यौन क्रिया नहीं है। मनोचिकित्‍सक मानते हैं कि सप्‍ताह में कम से कम एक बार स्‍त्री को पुरुष के ऊपर आकर यौन क्रिया को अंजाम देना ही चाहिए। इससे महिलाओं के लिए सेक्‍स कष्‍टप्रद प्रक्रिया नहीं, बल्कि आनंददायक क्रिया बन जाती है। संभोग के दौरान महिला के ऊपर होने से स्‍त्री का सेक्‍स के प्रति डर, दर्द व निरसता दूर होती है। इसके अलावा संभोग नियंत्रण की यह क्रिया स्त्रियों को जीवन की हर मुश्किल घड़ी को नियंत्रित करने में मदद देती है। सेक्‍स को अपने हिसाब से नियंत्रित करने से उनके अंदर आत्‍मविश्‍वास पनपता है और स्‍त्री पुरुष दोनों के लिए संभोग बिस्‍तर से निकल कर जीवन के प्रत्‍येक क्षण व कार्य में चिर आनंद बन कर समाहित हो जाता है।

स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक:
आधीआबादी ने विपरीत रति के इस सिरीज को 'स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक' का नाम दिया है। इस पूरी श्रृंखला में केवल उन्‍हीं रति क्रिया की चर्चा होगी, जिसमें पुरुष निष्क्रिय और स्‍त्री सक्रिय भूमिका में रहती है। स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक को संभोग के अलग-अलग आसनों के हिसाब से कई प्रकारों में बांटा है। हर एक लेख में स्‍त्री सक्रियता और उनके आनंद के नजरिए से पूर्ण होने वाली रतिक्रिया की जानकारी दी जाएगी। स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक खंड की समाप्ति पर पुरुष यौन स्‍ट्रोक श्रृंखला की शुरुआत की जाएगी....।

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: जब संभोग के समय ऊपर हो स्‍त्री

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: विपरीत रति, नए आनंद की पहल   

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: स्‍त्री का स्‍ट्रोक, पुरुष का नियंत्रण

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: स्‍त्री का पावर स्‍ट्रोक

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: स्‍त्री का मास्‍टर स्‍ट्रोक

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: स्‍त्री का पसंदीदा स्‍ट्रोक

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: स्‍त्री का फुर्तीला स्‍ट्रोक

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: स्‍त्री का विस्‍फोटक स्‍ट्रोक

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: स्‍त्री का चेयर स्‍ट्रोक

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: स्‍त्री का टेबल टॉप स्‍ट्रोक

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: उल्‍टी घुड़सवारी का मजा

* स्‍त्री यौन स्‍ट्रोक: स्‍त्री का पश्‍चगमन और पश्‍च मर्दन

 

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