साहित्‍य

jim corbett के अंदर जब हमने उसका पीछा किया!

सौरभ गुप्‍ता....Jim Corbett यात्रा का अगला पड़ाव। हाथी से उतर कर हम अपने कमरे मे नहीं गए, हम इतने ज्यादा उत्साहित थे कि वहां खड़े लोगो के पास ही रुक गए क्योकि वो लोग बहुत ज्यादा उत्सुक थे सब कुछ जानने के लिए। वैसे भी यह बहुत रोमांचक अनुभव था। कुछ देर वहां रहने के बाद हम अपने कमरे की ओर चल दिए। कुछ थकान भी महसूस हो रही थी इसलिए चाहते थे कि नहा कर थोड़ी देर कमर सीधी कर लें। थोड़ी देर कमर सीधी करने के दौरान भी दिमाग मे सिर्फ दिन का अनुभव था।

Read more...

नरेंद्र मोदी ज्‍यादा 'आम' हैं या अरविंद केजरीवाल, आप खुद पढकर बताएं!

संदीप देव। नरेंद्र मोदी का पूरा नाम नरेंद्र दामोदरदास मोदी है। 17 सितंबर 1950 को उनका जन्म वाडनगर के एक छोटे से कस्बे में हुआ था। पिता दामोदर दास और मां हीराबेन की छह संतानों में नरेंद्र तीसरे नंबर की संतान हैं। नरेंद्र का परिवार बेहद गरीब था। अति पिछड़ी जाति से आने वाले नरेंद्र मोदी के पिता की आय का स्रोत एक तेल निकालने वाला कोल्हू मशीन व एक चाय की दुकान थी। चाय की दुकान पर नरेंद्र मोदी भी अपने पिता व भाई का हाथ बंटाते थे। रेलगाडि़यों में सफर करने वाले मुसाफिरों को चाय पिलाते-पिलाते नरेंद्र मोदी का बचपन गुजरा है।

Read more...

दुनिया की सबसे वैज्ञानिक लिपि है देवनागरी लिपि

‪संदीपदेव‬। दुनिया की सबसे वैज्ञानिक लिपि है देवनागरी लिपि। देखिए, देवनागरी का पहला अक्षर है 'अ' अर्थात 'अज्ञान' और देवनागरी का आखिरी अक्षर है 'ज्ञ' अर्थात 'ज्ञान'। देवनागरी मतलब- 'अज्ञान से ज्ञान की यात्रा'। जब एक बच्‍चा 'अ' सीखता है, उस समय वह एकदम से निरक्षर होता है और जब वह 'ज्ञ' सीख लेता है तो वह हिंदी भाषा में लिखना-पढ़ना जान जाता है। यही है एक भाषा का मूल उदृेश्‍य, जो देवनागरी लिपि की बनावट तक में दृष्टिगोचर होता है।

Read more...

औरंगजेब‬: भारत विभाजन पर पहला हस्‍ताक्षर!

‪‎संदीप देव‬। राणा सफ़वी इतिहासकार हैं। उन्‍होंने गुलाम वंश की शासक रजिया सुल्‍तान पर बीबीसी हिंदी के लिए एक रिपोर्ट लिखी है। रजिया या उनके पिता इल्‍तुतमिश आदि सभी के लिए कितने सम्‍मान से उन्‍होंने लिखा है। 'आप' का बोध, बहुवचन के 'हैं' का बोध। दूसरी तरफ 11 वीं कक्षा के 'मध्‍यकालीन भारत' का इतिहास पढि़ए औरंगजेब वाले अध्‍याय में वामपंथी इतिहासकार प्रो सतीश चंद्र एवं अनुवादक बिमल प्रसाद, मधु त्रिवेदी और जमालुद्दीन ने गुरु तेगबहाुदर से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह- सभी के लिए तू-तड़ाक वाले लहजे का प्रयोग किया है। भारत के गौरव को लौटाने वाले महापुरुषों के प्रति वामपंथी नफरत इतनी अधिक रही है कि न केवल तथ्‍यों में, बल्कि भाषा में भी वह क्षुद्रता से बाज नहीं आते हैं।

Read more...

jim corbett में हाथी के हमलावर होने पर पता चला, अरे हम तो हथिनी पर सवार हैं!

सौरभ गुप्‍ता, jim corbett से लौटकर। जब तक मै नौकरी कर रहा था तो हम 6 लोगो का एक ग्रुप था जो एक साथ ही घूमने जाते थे और हर दो महीने में कहीं न कही का कार्यक्रम बना ही लेते थे। अब तो ऐसे कार्यक्रम बनते ही नहीं है। हम छह लोगो में  मै, भगवानदास जी, मनमोहन, मनोज, योगेश, और भाटिया जी हैं।

साथियों संग हथिनी की सफारी!

Read more...

एक प्रोफेसर की तरह जापानियों से संवाद कर...
एक प्रोफेसर की तरह जापानियों से संवाद करते नजर आए मोदी

टोक्यो, एजेंसी। परमाणु अप्रसार संधि पर भारत के हस्ताक्षर न करने की वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में व्याप्त चिंता को दूर करने की कोशिश करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि शांति और अहिंसा के लिए देश [...]

पत्रकार-दलाल-नौकरशाह-कारपोरेट गठजोड़ पिछ...

संदीप देव।लय में पिछले कई वर्षों से जिस तरह जासूसी का खेल चल रहा था, उसका पर्दाफाश यह दर्शाता है कि मीडिया-दलाल-नौकरशाह-कंपनियों का नेक्‍सस किस तरह गहराई तक देश को घुन की तरह खा [...]

भेदभाव से बचने के लिए अपना धर्म छोड़ने व...
भेदभाव से बचने के लिए अपना धर्म छोड़ने वाले हिंदू आज भी मुस्लिम और ईसाई समाज में हैं दोयम दर्ज के नागरिक!

संदीप देव।रक्षण की वकालत करने वाले हिंदू समाज के दलितों को भरमाने के लिए 'दलित-मुस्लिम' भाई-भाई का नारा लगाते हैं। Narendra Mo [...]

वह महात्‍मा गांधी थे, जिन्‍होंने कस्‍तूर...
वह महात्‍मा गांधी थे, जिन्‍होंने कस्‍तूरबा का स्‍मारक बनवा कर परिवार को महिमा मंडित करने की शुरुआत की थी! ‪‎

संदीपदेव‬।ी थे, जिन्‍होंने सबसे पहले परिवारवाद की मूर्ति पूजा का चलन इस देश में शुरु किया। और यह भी बता दूं कि देश के सबसे बढिया स्‍मारक में उनकी पत्‍नी कस्‍तूरबा गांधी का स्‍मारक शामिल [...]

भारत को कुछ बनने की जरूरत नहीं, भारत को ...
भारत को कुछ बनने की जरूरत नहीं, भारत को भारत ही बनना चाहिए: नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली।द्र मोदी ने अपनी अमेरिका यात्रा से पहले सीएनएन के वरिष्ठ पत्रकार फरीद जकारिया को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया। पढ़िए उस इंटरव्यू के सवालों के जवाबः-

वेतन बढ़ते ही अमेरिकी युवा हो जाते हैं अ...
वेतन बढ़ते ही अमेरिकी युवा हो जाते हैं अविश्‍वासी

वाशिंगटन। अमेरिका में युवाओं के बीच किए गए एक सर्वे में पता चला है कि आय बढ़ने के साथ युवाओं में दूसरों के प्रति भरोसा और सामाजिक संस्थानों में विश्वास कम होता जाता है। आज के युवा अपने पक्षों को [...]

पुस्‍तक के जरिए भोजपुरी अस्मिता की तलाश...
पुस्‍तक के जरिए भोजपुरी अस्मिता की तलाश

नई दिल्‍ली। भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग एक बार फिर बहुत जोर-शोर से उठाई गई है। अवसर था भोजपुरी समाज दिल्‍ली द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित समाज के अध्‍यक्ष अजीत दुबे द्वारा [...]

पढ़ना मत! अपनी मूर्खता को पकड़े रखना- कश...
पढ़ना मत! अपनी मूर्खता को पकड़े रखना- कश्‍मीरी पंडित के पूर्वजों ने मूर्खता की थी, उनकी अगली पीढ़ी गाजर-मूली की तरह काट दी गयी, भगा दी गयी! ‎

संदीपदेव‬।िचित्र बात है, वह अपने इतिहास से सबक लेने को तैयार ही नहीं है! और ऐसा नहीं कि यह आज की बात हो, यह हमारे पूर्वजों से चली आ रही मूढ़ता है, जिसका [...]

दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!...
दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!

आधी आबादी ब्‍यूरो, नई दिल्ली। जंगल बनता जा रहा है। बच्चों के लिए खेलने के लिए जगह नहीं बची है। पार्क भी धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। अभिभावकों की [...]

नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदे...
नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश

दिल्‍ली।  कमल इंसटिट्यूट ऑफ हायर एडूकेशन के छात्र और छात्राओ ने 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ ' अभियान पर नुक्कड नाटक का आयोजन किया। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र [...]

असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के ब...
असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के बीच रहती हूं, लेकिन मैंने कभी भारत में भेदभाव महसूस नहीं किया!

सोफिया रंगवाला। पेशे से डॉक्टर हूं। बंगलोर में मेरी एक हाइ एण्ड लेजर स्किन क्लिनिक है। मेरा परिवार कुवैत में रहता है। मैं भी कुवैत में पली बढ़ी हूं लेकिन 18 साल [...]

प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम कर...
प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम करे, सूचना प्रसारण मंत्री को तो क्रिकेट डिप्‍लोमेसी से ही फुर्सत नहीं है!

संदीप देव।उटलुक पत्रिका के एक गलत खबर के कारण जो हंगामा हुआ और सदन को स्‍थगित करना पड़ा, इसका जिम्‍मेवार कौन है? क्‍या मोदी सरकार मीडिया के इस तरह के गैरजिम्‍मेवार और सबूत [...]

Other Articles