औरंगजेब‬: भारत विभाजन पर पहला हस्‍ताक्षर!

‪‎संदीप देव‬। राणा सफ़वी इतिहासकार हैं। उन्‍होंने गुलाम वंश की शासक रजिया सुल्‍तान पर बीबीसी हिंदी के लिए एक रिपोर्ट लिखी है। रजिया या उनके पिता इल्‍तुतमिश आदि सभी के लिए कितने सम्‍मान से उन्‍होंने लिखा है। 'आप' का बोध, बहुवचन के 'हैं' का बोध। दूसरी तरफ 11 वीं कक्षा के 'मध्‍यकालीन भारत' का इतिहास पढि़ए औरंगजेब वाले अध्‍याय में वामपंथी इतिहासकार प्रो सतीश चंद्र एवं अनुवादक बिमल प्रसाद, मधु त्रिवेदी और जमालुद्दीन ने गुरु तेगबहाुदर से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह- सभी के लिए तू-तड़ाक वाले लहजे का प्रयोग किया है। भारत के गौरव को लौटाने वाले महापुरुषों के प्रति वामपंथी नफरत इतनी अधिक रही है कि न केवल तथ्‍यों में, बल्कि भाषा में भी वह क्षुद्रता से बाज नहीं आते हैं।

'‎Aurangzeb‬ : भारत विभाजन पर पहला हस्‍ताक्षर' विशेषांक से हम-आप निकृष्‍ट मानसिकता से वामपंथियों द्वारा लिखे गए भारतीय इतिहास की परतें उघाड़ने की शुरुआत करने जा रहे हैं। पत्रिका का नाम 'द्वारका एक्‍सप्रेस' रखा गया है। जिस तरह श्रीकृष्‍ण की 'द्वारका' नगरी समुद्र में डूबी है, उसी तरह इन घटिया मानसिकता के वामपंथियों ने हमारे गौरवशाली इतिहास को भी डुबाने का प्रयास किसा है। 'द्वारका' मेरे लिए प्रतीक है- डूबे हुए इतिहास की खोज का और यही हमारा पंचलाइन भी है- ' दबे हुए इतिहास की खोज'।

पत्रिका छपने के लिए प्रेस में कल ही गयी है। शुरू में 10 हजारा कॉपियां प्रकाशित होने गयी हैं। धीरे-धीरे राष्‍ट्रवादी साथियों की मांग पर यह और प्रकाशित होती चली जाएंगी। आप लोगों का सहयोग यदि बराबर मिला तो यह भारत की अपनी तरह की पहली विशुद्ध 'इतिहास आधारित पत्रिका' होगी, जिसमें ओरिजनल इतिहासकारों के लिखे को आप तक हुबहू पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा ताकि जो सच लिखा तो गया है, लेकिन नेहरूवादी-वामपंथी साजिशों के कारण हमारे टेक्‍सटबुक का हिस्‍सा नहीं बना, उसे आप और आपके बच्‍चों तक सरल हिंदी भाषा में पहुंचाई जा सके। हर तीन महीने पर प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका की एक प्रति की कीमत 30 रुपए रखी गयी है और केवल इसे डाक से भेजने की व्‍यवस्‍था ही उपलब्‍ध है।

पत्रिका का कवर आपके सामने है। औरंगजेब ने जिस तरह से इस्‍लामी राज्‍य स्‍थापित करना चाहा था, वह तस्‍वीर में परिलक्षित हो रहा है। उनके एक हाथ में कुरान और दूसरे में तलवार है। सामने उसकी मंदिर तोड़ने की 'जिहादी' नीति का गवाह काशी का ज्ञानवापी मस्जिद है। और अंदर वह सारा तथ्‍य है, जिसे इरफान हबीब, रामचंद्र गुहा, टाइम्‍स ऑफ इंडिया, एबीपी न्‍यूज, इंडियन एक्‍सप्रेस आदि झुठलाने का प्रयास कर रहे हैं। भारत का पहला दस्‍तावेजी विभाजन औरंगजेब ने ही किया था, इसलिए शीर्षक -'Aurengzeb‬ : भारत विभाजन पर पहला हस्‍ताक्षर' रखा है।

 

Web title: sandeep deo blog on aurangzeb-9

SandeepDeo|‬ ‪‎संदीप देव।‬ Sandeep Kumar Deo| ‎TheTrueIndianHistory‬| औरंगजेब एक क्रूर मुगल बादशाह