जीवनी

नरेंद्र मोदी ज्‍यादा 'आम' हैं या अरविंद केजरीवाल, आप खुद पढकर बताएं!

संदीप देव। नरेंद्र मोदी का पूरा नाम नरेंद्र दामोदरदास मोदी है। 17 सितंबर 1950 को उनका जन्म वाडनगर के एक छोटे से कस्बे में हुआ था। पिता दामोदर दास और मां हीराबेन की छह संतानों में नरेंद्र तीसरे नंबर की संतान हैं। नरेंद्र का परिवार बेहद गरीब था। अति पिछड़ी जाति से आने वाले नरेंद्र मोदी के पिता की आय का स्रोत एक तेल निकालने वाला कोल्हू मशीन व एक चाय की दुकान थी। चाय की दुकान पर नरेंद्र मोदी भी अपने पिता व भाई का हाथ बंटाते थे। रेलगाडि़यों में सफर करने वाले मुसाफिरों को चाय पिलाते-पिलाते नरेंद्र मोदी का बचपन गुजरा है।

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जब एक देह दूसरे देह में विलीन होता रहा: तसलीमा नसरीन

रूद्र (तसलीमा का पति) जब खाना लेकर लौटा , मैंने उससे दरयाफत किया ,''यह महिला कौन है,जिसे तुमने अपनी जिन्दगी ही समर्पित कर डाली है ?
''हां,कभी अर्पित की थी ।'
'कौन है वह औरत ?'
'यह जानना क्‍या बहोत जरूरी है ?'
'बता दो । मैं भी सुन रखूं ।'
'नेली ।'

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तसलीमा को उस रात सेक्‍स सुख के साथ मिला था यौन रोग!

उस रात भी घर लौटकर, रूद्र मेरी मिन्नतें करता रहा, सुनो रानी बहू थोड़ी सहज हो जाओ। अपने को इतना सख्त मत रखो। अपनी देह को जरा नरम करो।रूद्र उस रात भी प्रशस्त किए गए राह में फिर दाखिल हुआ। अंधेरे कमरे में आंखें मून्दे-मून्दे  और अंधेरा महसूस करते हुए जब मै रूद्र की दी हुई पीड़ा अपने अंग-अंग में समो रही थी अचानक....अचानक एक सुखद अहसास! मेरे सिर से पांव तक, बिजली का करंट दौड़ गया। उस विद्युत की कौंध से रूद्र की पीठ पर मैने दसों उंगलियां गड़ा दी। मै हांफने लगी। हांफते-हांफते मैने पूछा क्या हुआ? रूद्र ने कोई जवाब नहीं दिया। मेरी सोना, मेरी माणिक, मेरी रानी बहू कहते हुए वह मुझ पर झुक आया। उस रात उसने एक बार नहीं बल्कि कई-कई बार मुझे तीखे सुख ने विभोर कर दिया। इस सुखद पीड़ा से मेरी नस-नस अवश होती रही। मै गहरे सुख-महासुख में आकुल-व्याकुल होती रही

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तसलीमा नसरीन की वो सुहागरात!

अचानक वीथि पानी के प्रसंग से हटकर, बिल्कुल नया सवाल कर बैठी, 'अच्छा भाभी तुम अपने गहने वगैरह कुछ क्यों नहीं लाईं? घर की बहू हो, आखिर लोग क्या कहेंगे? कल शाम सीमू के जन्मदिन पर, लोग-बाग आएंगे! चलो, ठीक है, मै ही कुछ एक गहने दे जाऊंगी। तुम वही पहन लेना।' शाम ढल गई रात आ पहुंची। मै बार-बार घड़ी देखती रही और छटपटाती रही। 'तुम्हारे भैया अभी तक नहीं लौटे?'

'लौट आएंगे तुम फिक्र ना करो। मरद बच्चा है, बाहर यार दोस्त हैं। वहां भी जाना पड़ता है, इसलिए इतनी रात कर दी?'  'अरे लौट आएंगे! घर में बीवी मौजूद है, चाहे जितनी भी रात हो जाए वे लौट आएंगे।' वीथि हंस पड़ी। उसकी हंसी में मानो मोती झड़ रहे थे।

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तसलीमा की पहली शादी बड़ी अजीब थी!

उस बार, रूद्र जब ढाका लौट गया, उसके करीब सात दिनों बाद मै क्लास दाखिल हो रही थी, ऊपर की क्लास की एक लड़की ने मुझे सूचना दी कि नीता लाहिरी ने सन्देश भेजा है कि मै इसी वक्त उससे घर पर मिलूं। क्लास छोड़कर मै गुन के घर भागी। वहां जाकर देखा, गुन के बैठक कमरे में रूद्र बैठा हुआ था। कमरे के काठ की दो अदद कुर्सियां और एक अदद चौकी! उसे देखकर मन नाच उठा। रूद्र को देखते ही मेरे मन में इसी तरह की हलचल होती थी, मन एक बारगी नाच उठता था।

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