पापा मेरी बलि न दो, मैं बीज हूं!

संजू मिश्रा। पापा मेरी बलि न दो, मैं बीज हूं,
सावन के झूले और हरियाली तीज हूं ।

 

एक दिन ये आंगन मेरी मुस्‍कान से खिलखिलायेगा,
मेरा विस्‍तार घर में खुशहाली और आनंद लाएगा ।

मैं सृष्टि हूं, संजोकर रखो,
मैं वृष्टि हूं, संचय करो ।

अपने इन करों से, इस धरती को सजाऊंगी,
आज मुझे बचा लो, कल पूरे विश्‍व को बचाऊंगी,
पूरे विश्‍व को बचाऊंगी ।

Web Title: beti bachao abhiyan kavita-1

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