दुनिया की सबसे वैज्ञानिक लिपि है देवनागरी लिपि

‪संदीपदेव‬। दुनिया की सबसे वैज्ञानिक लिपि है देवनागरी लिपि। देखिए, देवनागरी का पहला अक्षर है 'अ' अर्थात 'अज्ञान' और देवनागरी का आखिरी अक्षर है 'ज्ञ' अर्थात 'ज्ञान'। देवनागरी मतलब- 'अज्ञान से ज्ञान की यात्रा'। जब एक बच्‍चा 'अ' सीखता है, उस समय वह एकदम से निरक्षर होता है और जब वह 'ज्ञ' सीख लेता है तो वह हिंदी भाषा में लिखना-पढ़ना जान जाता है। यही है एक भाषा का मूल उदृेश्‍य, जो देवनागरी लिपि की बनावट तक में दृष्टिगोचर होता है।

 

देवनागरी की दूसरी विशेषता, यह दुनिया की एक मात्र लिपि है, जो संसार के हर शब्‍द को उसके उच्‍चारण के अनुरूप हुबहू लिख सकती है। इसकी तीसरी विशेषता है, यह ध्‍वन्‍यार्थक अर्थात ध्‍वनि प्रधान लिपि है। जिससे न केवल आपका उच्‍चरण दोष समाप्‍त होता है, बल्कि बोलने में स्‍पष्‍टता आती है और मस्तिष्‍क सहित चेहरे के ऊपरी हिस्‍से के सभी नसें उच्‍चारण के साथ गतिशील रहती हैं। आप सही उच्‍चारण करें और उसे साक्षीभाव से देखें, आप अपनी नसों की सक्रियता को महसूस कर सकते हैं!

मैं अपने सोशल मीडिया के उन सभी साथियों से यह आग्रह करना चाहता हूं, जो रोमन लिपि में हिंदी लिखते हैं। मोबाइल पर मैं भी लिखता हूं और सच मानिए मुझे भी देवनागरी में लिखने में बड़ी कठिनाई आती थी, लेकिन मैंने उस कठिनाई को अभ्‍यास से पार किया है। यदि आप अपनी लिपि में नहीं लिखेंगे तो ब्रि‍टेन या अमेरिका से तो कोई आएगा नहीं जो आपकी भाषा को बचाए? अपनी भाषा को बचाने के लिए आपको ही आगे आना होगा!

इसलिए प्रार्थना है कि राहुल गांधी और चेतन भगत न बनें। या तो पूरा अंग्रेज बन जाएं या फिर पूरी तरह अपनी मातृभाषा का होकर रहें। अधकचरे व्‍यक्तित्‍व को विकसित न करें। आप भी अधकचरे और आपकी आने वाली पीढ़ी भी अधकचरी- फिर समाज, देश व मातृभूमि का ऋण कैसे उतारेंगे आप? राहुल का व्‍यक्तित्‍व देखिए और चेतन भगत को पढ़ कर देखिए, दोनों मूढ़मति प्रतीत होते हैं! उनके मशहूर होने पर न जाइए, चंगेज खान तो आज तक मशहूर है!

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