कविता : नारी तुम हो सबकी आशा !

किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.

सरस्वती का रूप हो तुम
लक्ष्मी का स्वरुप हो तुम
बढ़ जाये जब अत्याचारी
दुर्गा-काली का रूप हो तुम.

किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा .

खुशियों का संसार हो तुम
प्रेम का आगार हो तुम
घर आँगन को रोशन करती
सूरज की दमकार हो तुम.

किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.

ममता का सम्मान हो तुम
संस्कारों की जान हो तुम
स्नेह, प्यार और त्याग की
इकलौती पहचान हो तुम.

किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.

कभी कोमल फूल गुलाब सी
कभी शक्ति के अवतार सी
नारी तेरे रूप अनेक
तू ईश्वर के चमत्कार सी.

किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.

लेखिका: मोनिका जैन ‘पंछी’

Web Title: hindi poems on women's_1

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