विधानसभा चुनाव: हर राज्‍य के हिसाब से अलग-अलग चाल चल रहे हैं मोदी और अमित शाह

संदीपी देव,नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार राज्‍यो में होने वाले आगामी चुनाव की तैयारी सरकारी कार्यक्रमों के जरिए कर दी है। जम्‍मू-कश्‍मीर, हरियाणा, महाराष्‍ट्र और झारखंड में आचार संहिता लागू होने से पहले ही 'मोदी सरकार' ने चुनावी दांव खेल दिया है। और यह दांव है विकास का, जिसके सहारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार बहुमत वाली गैर कांग्रेसी सरकार को सत्‍ताशीन कराने में सफल हुए हैं। भाजपा के नवनियुक्‍त अध्‍यक्ष अमित शाह भी अलग-अलग राज्‍यों के हिसाब से अलग-अलग रणनीतियां बनाकर चाल चलना शुरू कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'सरकारी पहल' यह दर्शा रही है लोकसभा चुनाव के हनिमून पीरियड में फंसे बिना वह तेजी से राज्‍यसभा में भी बहुमत हासिल करने की ओर कदम बढ़ाने की योजना पर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी का सारा ध्‍यान हर राज्‍य के विधानसभा में बहुमत वाली भाजपा सरकार बनवाना है ताकि धारा-370, समान नागरिक संहिता के विरोध जैसे मुस्लिम तुष्टिकरण वाले कानूनों व नीतियों को पूरी तरह से पलट कर संविधान की मूल भावना को देश में स्‍थापित किया जा सके। वर्तमान में मोदी सरकार राज्‍यसभा में अल्‍पमत में है, इसलिए दो तिहाई बहुमत के संशोधन वाले मामलो को संसद के अंदर पास कराने में उन्‍हें भारी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है।

विकासपरक योजनाओं के सहारे विधानसभा जीतने का दांव
आप गौर से देखिए। जिन-जिन राज्‍यों में चुनाव होने वाले हैं, उन-उन राज्‍यों में चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी विकास का बिगुल फूंकने के लिए पहुंच रहे हैं। यही नहीं, उन राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों के लिए नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करने दोहरी मुसीबत बना हुआ हैा हरियाण और झारखंड में जिस तरह से प्रधानमंत्री के समक्ष वहां के मुख्‍यमंत्रियों की हुटिंग हुई, वह दर्शा रहा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव के लिए कमर कस ली है।

21 अगस्‍त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड की राजधानी रांची में  एनटीपीसी की एक परियोजना की नींव रखी। साथ ही प्रस्तावित नॉर्थ कर्णपुरा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट का भी ऑनलाइन शिलान्यास किया। इस अवसर पर कांग्रेस की पूर्ववर्ती केंद्र सरकार द्वारा झारखंड की जनता की हुई उपेक्षा पर भी उन्‍होंने तंज कसा। उन्होंने 10 वर्षो के कांग्रेस शासन की तरफ इशारा करते हुए कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयेयी ने परियोजना की आधारशिला रखी थी, लेकिन 10 वर्षो से कोई काम नहीं हुआ. मैं परियोजना को पूरा करूंगा."

प्रधानमंत्री के इस मंच पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ जनता ने हूटिंग भी की। ज्ञात हो कि इससे पहले नरेद्र मोदी ने 19 अगस्त को हरियाणा के कैथल में कैथल-सिवानी-राजगढ़ राजमार्ग को फोरलेन बनाने की अति महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया था। वहां के मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा को भी लोगों की हूटिंग का सामना करना पड़ा।

21 अगस्‍त को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागपुर में मेट्रो का शिलान्‍यास किया। साथ ही, उन्होंने एनटीपीसी के मौदा सुपर ताप बिजली परियोजना के 1,000 मेगावाट के पहले चरण का भी उद्घाटन किया, जिस पर 5,495 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। हरियाणा और झारखंड में प्रधानमंत्री की मौजूदगी में जनता की हूडिंग का शिकार हुए मुख्‍यमंत्रियों की दशा देखकर महाराष्‍ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने मोदी के कार्यक्रम से दूरी बना ली। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में हरियाणा और झारखंड के मुख्‍यमंत्री से पहले सोलापुर में मुख्‍यमंत्री पृथ्‍वीराज चव्हाण की हूटिंग वहां की जनता कर चुकी है, जिसके बाद से पृथ्‍वीराज चव्हाण बेहद घबराए हुए थे, जिस कारण उन्‍होंने नागपुर के कार्यक्रम से दूरी बनाना ज्‍यादा उचित समझा।

मेट्रो के शिलान्‍यास के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा वहां के मुख्‍यमंत्री चव्हाण का नाम न लिया जाना भी, यह दर्शाता है कि मोदी कांग्रेस के राज्‍य सरकारों की पूरी तरह से उपेक्षा और पूर्ववर्ती केंद्र सरकार पर हमला कर पूरी तरह से चुनावी मूड में हैं। वैसे उनके दूसरे मंत्री भी पीछे नहीं हैं। मंच से शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि अगर इस अवसर पर मुख्यमंत्री भी उपस्थित होते तो उन्हें खुशी होती। नायडू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को 'टीम इंडिया' के तौर पर मिलकर काम करना चाहिए। भाजपा संचालित एनडीए सरकार ने जनता के बीच यह यह दर्शाने की कोशिश की कि कांग्रेस की मौजूदा राज्‍य सरकार को न तो जनता की कोई फिक्र है और न ही उन्‍हें जनता से किसी तरह का लगाव ही है।  गौरतलब है कि नागपुर में 38.215 किलोमीटर की मेट्रो परियोजना को मार्च, 2018 तक पूरा होना है। इसमें राज्य और केंद्र की बराबर की हिस्सेदारी होगी।

इसके पहले मोदी जम्मू-कश्मीर भी गये थे जहां लेह में उन्होंने एक हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया और 349 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन का शिलान्यास किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो महीने में दूसरी बार जम्मू-कश्मीर का दौरा किया है। पिछले महीने उन्होंने कटरा रेल लिंक और कटरा के लिए व‌िशेष ट्रेन का उद्घाटन किया था। उन्होंने लेह में हाईड्रो पॉवर प्रोजेक्ट परियोजना की नींव रखी और एक अन्य परियोजना का लोकार्पण किया। लेह में पारंपरिक परिधान में मोदी ने कश्मीर के ‌विकास के लिए कई घोषणाएं की। मोदी ने कहा कि एक वक्त था, जब प्रधानमंत्री कई वर्षों तक कश्मीर की यात्रा नहीं करते ‌थे, लेकिन मैं महीने भर में दूसरी बार कश्मीर आया हूं।

इन चारों राज्‍यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। केंद्र सरकार की विकास परक योजनाओं का इन राज्‍यों से शुरुआत और मंच से लगातार हमलावर प्रधानमंत्री कांग्रेस को बेचैन कर रहा हैा चुनाव से पूर्व नरेंद्र मोदी जिस तरह से मंच से जनता से सीधा संवाद स्‍थापित करने की कोशिश करते थे, प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनकी यह कोशिश जारी है। ऐसा आजाद भारत मे पहली बार हो रहा है कि कोई प्रधानमंत्री न तो लिखित भाषण पढ़ रहा है और न ही जनता से दूरी बना रहा है, बल्कि वह तो सीधे जनता से प्रश्‍न पूछकर ही अपनी रैली की शुरुआत कर रहा है। आजादी की 68 वीं सालगिरह पर काल किले की प्राचीर से भी जिस तरह से नरेंद्र मोदी ने जनता से खुद को जोड़ा वह कांग्रेस को डरा रहा है कि लोकसभा का परिणाम आगामी चार राज्‍यों के विधानसभा चुनाव में भी देखने को न मिलेा यदि ऐसा होता है तो कांग्रेस का एक तरह से पूरे देश से ही सूपड़ा साफ हो जाएगा और लोकसभा की तरह राज्‍यसभा में भी एनडीए बहुमत के करीब पहुंच जाएगी।

अमित शाह के राह में आरएसएस का रोड़ा
भाजपा के नए अध्‍यक्ष बने अमित शाह के औपचारिक रूप से चुने जाने से पहले उत्‍तराखंड में आए चुनाव परिणाम ने भाजपा को डरा भी दिया है। वहां की तीन की तीन सीट कांग्रस ने जीत ली, जबकि दो सीटें पहले भाजपा के ही पास थी। अमित शाह के चयन के बाद 21 अगस्‍त को चार राज्‍यों की विधानसभा की 18 सीटों पर उपचुनाव हुए। इसमें बिहार में विधानसभा की 10 सीटों पर हुआ उपचुनाव इसलिए महत्‍वपूर्ण हो गया है कि नरेंद्र मोदी की लहर को रोकने के लिए वर्षों के राजनै‍तिक दुश्‍मन व बिहार के दो पूर्व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार व लालू प्रसाद यादव ने हाथ मिला लिया है। इस गठबंधन का तीसरा कोण कांग्रेस का है। यदि तीनों मिलकर बिहार के चुनाव को प्रभावित कर लेते हैं तो माना जाएगा कि बिहार में नरेंद्र मोदी की लहर को इन्‍होंने रोक दिया है। इसके बाद अन्‍य राज्‍यो में भी विरोधी मोदी लहर को थामने के लिए इस फॉर्मूले को आजमा सकते हैं।

इतना ही नहीं, भाजपा अध्‍यक्ष बनने के बाद यदि इन 18 सीटों पर हार मिलती है तो अमित शाह पर सवाल उठाने को न केवल विरोधी पार्टी, बल्कि राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (RSS) भी तैयार बैठी है। अमित शाह आरएसएस की पसंद कभी नहीं रहे, लेकिन मोदी की मर्जी के आगे आरएसएस की एक नहीं चली। यही कारण है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहले ही अमित शाह को कह दिया है कि आगामी चार राज्‍यों का विधानसभा चुनाव वह अपने बलबूते लड़े, आरएसएस भाजपा की मोई मदद नहीं करेगा। इतना ही नहीं, नरेंद्र मोदी ने जब अमित शाह को लोकसभा चुनाव-2014 का 'मैन ऑफ द मैच' करा दिया तो मोहन भागवत ने यह कहने में देर नहीं लगाई कि लोकसभा का परिणाम किसी एक व्‍यक्ति की वजह से नहीं, बल्कि जनता द्वारा बदलाव चाहने की वजह से आया है। उन्‍होंने तो व्‍यंग्‍य करते हुए कहा कि 'यह व्‍यक्ति, पार्टी व संगठन पहले भी था, लेकिन इस तरह की सरकार बनाने में सफलता क्‍यों नहीं मिली।

वैसे अमितशाह की टीम में अपने स्‍वयंसेवकों को शामिल करा कर आरएसएस ने पार्टी पर नियंत्रण रखने की कोशिश तो की है। पार्टी के सात महत्वपूर्ण पदों पर संघ से सीधे जुड़े व्‍यक्तियों की नियुक्ति की गयी है। संगठन महासचिव का पद राम लाल फिर संभालेंगे। इसके अलावा महासचिवों में राम माधव और मुरली धर राव संघ के आदमी हैं। संघ के चार अन्य कार्यकर्ता वी. सतीश, सौदान सिंह, शिव प्रकाश और बी.एल. संतोष सह-संगठन महामंत्र्णी बनाये गये हैं। साफ है कि पार्टी संगठन पर संघ पूरी तरह पकड़ बनाये रखना चाहता है और वह अमित शाह को खुलकर निर्णय लेने की प्रक्रिया में एक बैरियर के रूप में सदा उपस्थित रहना चाहता है।

चार राज्‍यों के चुनाव का असर पार्टी के गठन में भी दिखा
आगामी चार राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनाव का प्रभाव भाजपा की टीम के गठन पर भी देखने को मिला। पार्टी ने चुनावी राज्यों को निगाह में रखते हुए महिला मोर्चा अध्यक्ष पद पर महाराष्ट्र की विजया राहतर, सचिव पद पर महाराष्ट्र की ही पूनज महाजन, श्याम जाजू और उपाध्यक्ष पद पर विनय सहस्रत्रबुद्धे की नियुक्ति की है। झारखंड से रघुवर दास और हरियाणा से सुधा यादव को पार्टी संगठन में शामिल किया गया है।

चार राज्‍यों के लिए अमित शाह का अलग-अलग प्‍लान

जम्‍मू-कश्‍मीर: सबसे पहले भारत के मुकुट जम्‍मू-कश्‍मीर की बात करते हैं। नरेंद्र मोदी व अमित शाह की जोड़ी जम्‍मू-कश्‍मीर में भाजपा सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है। धारा-370 हटाने के लिए जम्‍मू-कश्‍मीर विधानसभा से इस आशय का प्रस्‍ताव पारित होना जरूरी है। यही कारण है कि पार्टी की नजर 87 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा की 44 सीटों पर है, जिसे वह जीतना चाहती है। अमित शाह को भरोसा है कि जम्मू-कश्मीर के चुनाव में भी उन्‍हें मोदी लहर का फायदा मिलेगा। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जम्मू और लद्दाख क्षेत्र में तीन सीटें जीती थीं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस को यहां से लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली है। तीन अन्‍य सीटें पीडीपी के खाते में गई हैं।

भाजपा को जम्मू क्षेत्र की हिंदू आबादी का वोट मिल सकता है और वह विजेता के तौर पर उभर सकती है। जम्मू में विधानसभा की 37 सीटें हैं। लद्दाख में मुसलमानों और बौद्धों की संख्या लगभग बराबर है। वहां से पहली बार भाजपा के किसी नेता ने लोकसभा का रास्ता तय किया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कारगिल में हुई सफल रैली के बाद पार्टी को इस मुस्लिम बहुल क्षेत्र से भी विजय का भरोसा है। भाजपा के पक्ष में हिंदू वोटों के ध्रूवीकरण के भय से ही पहली बार कांग्रेस ने यह नारा उछाला है कि जम्‍मू-कश्‍मीर में कोई हिंदू नेता मुख्‍यमंत्री क्‍यों नहीं बन सकता है। कांग्रेस नेता और राज्य सरकार में मंत्री शाम लाल शर्मा ने अखूनर सीमावर्ती क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि "यदि  अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री बन सकता है तो क्यों कोई हिंदू राज्य का मुख्यमंत्री नहीं हो सकता है।"

हरियाणा: कांग्रेस और ओमप्रकाश चौटाला के लोकदल पार्टी की वर्चस्‍व वाली हरियाणा में पहली बार भाजपा अपने बूते सरकार बनाने का सपना देख रही है। अमित शाह ने हरियाणा के जिंद में हुई अपनी रैली में स्‍पष्‍ट तौर पर कहा कि भाजपा बिना किसी गठबंधन के अपनी सरकार बनाएगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस नेता व 40 साल से अपनी मेहनत से कांग्रेस को खड़ा करने में मुख्‍य भूमिका निभाने वाले बीरेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्‍या में दिग्गज नेताओं को भाजपा में शामिल कर यह संदेश दिया है कि हरियाणा विधानसभा में दो विधायकों की संख्या वाली भाजपा की हैसियत अब दमदार हो गई है।

भारतीय जनता पार्टी हुड्डा सरकार को जमीन घोटाले के मामले में घेरने की तैयारी कर रही है। पार्टी के नेता कैप्टन अभिमन्यु ने राज्य में जमीनों के मामले में की जा रही हेराफेरी पर सवाल उठा कर इसका संकेत भी कर दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा की ओर से मुख्‍यमंत्री पद के उम्‍मीदवार कैप्‍टन अभिमन्‍यु ही होंगे। उठाया है।

महाराष्‍ट्र: प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष देवेंद्र फडनवीस अमित शाह की ताजपोशी के बाद से महाराष्‍ट्र में भाजपा सरकार के गठन को लेकर निश्चिंत हैं। उनका कहना है कि 'हमारे प्रतिद्वंद्वियों को जब से यह पता चला है कि अमित शाह यहां आएंगे, वे अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं, क्योंकि वे शाह की संगठन प्रबंधन की क्षमता से अवगत हैं।'  भाजपा यहां शाह के उत्‍तर प्रदेश में आजमाए फॉर्मूले अर्थात सीट दर सीट प्रचार एवं मुस्लिम तुष्टिकरण के खिलाफ आक्रामकता को ही आजमाएगी। बीजेपी की सहयोगी शिवसेना भी अमित शाह को अध्यक्ष बनाए जाने पर राज्य में बड़ी जीत की उम्मीद जता चुकी है। सामना में उद्धव ठाकर ने लिखा है, 'केंद्र की राजनीति में मोदी सर्वोपरि हैं और अमित शाह उनका दायां हाथ। मोदी की प्रतिमा और अमित शाह की प्रतिभा के सहारे ही आम चुनाव में बीजेपी की जीत हुई है। मोदी ने सरकार में बदलाव किए हैं। अध्यक्ष बनने के बाद शाह पार्टी में सकारात्मक बदलाव करेंगे। उम्मीद है कि अमित शाह की अगुआई में शिवसेना-बीजेपी का गठबंधन महाराष्ट्र में जीत दर्ज करेगा।'

झारखंड: झारखंड के लिए भी अमित शाह का फॉर्मूला उत्‍तरप्रदेश और हरियाणा की तरह ही दूसरी पार्टियों के अंदर तोड-फोड कर उनकी पार्टी के बड़े नेताओं को अपने यहां मिलाने की है। अमित शाह ने इसमें कामयाबी भी हासिल की है। प्रदेश की लगभग सभी पार्टियों में बीजेपी ने सेंध लगाना शुरू कर दिया है। भाजपा से बागी होकर निकले बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा में भगदड़ की स्थिति है। मरांडी के 11 विधायकों में से 7 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक और हेमंत सोरेन सरकार के पूर्व मंत्री साइमन मरांडी ने भी बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की। मरांडी ने कहा कि जो हालात हैं, उनमे बीजेपी में शामिल होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जेवीएम विधायक निर्भय साहाबादी ने भी अपनी पार्टी के 7 विधायकों के साथ बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की थी। साहाबादी ने बीजेपी चीफ अमित शाह से मुलाकात कर जेवीएम के ज्यादातर विधायकों के बीजेपी शामिल होने की बात कही थी।

Web title: Amit Shah Prepare for upcoming assembly polls in four states  

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