बिहार चुनाव में भाजपा के खलनायक: प्रशांत किशोर जैसों को यदि नहीं जोड़े रखा तो आगे बंगाल, उत्‍तरप्रदेश, पंजाब में नहीं जीत पाएगी भाजपा!

संदीप देव। बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की पहली जीवनी वरिष्‍ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने लिखी थी। संकर्षण को आप अकसर एबीपी न्‍यूज पर देखते होंगे। वो टेलीग्राफ में शायद रोविंग एडिटर हैं। संकर्षण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दामन छोड़कर नीतीश का दामन थामने वाले प्रशांत किशोर के पीछे की वह कहानी लिखी है, जिसे आप निश्चित रूप से जानना चाहेंगे कि आखिर अमेरिका से यहां आकर 2011 में गुजरात विधानसभा और 2014 में लोकसभा चुनाव में मोदी के लिए सोशल मीडिया कैंपेन संभालने वाले प्रशांत ने नीतीश का मीडिया मैनेजमेंट क्‍यों संभाला।

 

संकर्षण के अनुसार, लोकसभा चुनाव में जीत के बाद अमितशाह व प्रशांत में तनाव बढ गया था। एक दिन अमितशाह ने उन्‍हें बहुत जलील किया और वह दिल्‍ली से पटना के लिए निकल गए। टाइम्‍स ऑफ इंडिया में दिए अपने बयान में भी प्रशांत ने कहा है कि वह नरेंद्र मोदी को कभी नहीं छोड़ते, लेकिन उनके आसपास के लोगों ने उन्‍हें ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया।

संकर्षण ने नीतीश के लिए प्रशांत के काम करने के तरीके पर भी लिखा है, जिसे पढकर भी एक पाठक के तौर पर आपका फायदा ही होगा। वैसे देखा जाए तो प्रशांत किशोर अकेले नहीं हैं, बल्कि अरुण शौरी, रामजेठमलानी, डॉ सुब्रहमनियन स्‍वामी, चेतन भगत- आदि जिन्‍होंने भी चुनाव से पूर्व नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए अपने-अपने तरीके से प्रयास किया था, आज उनके आसपास के लोगों द्वारा मिले असम्‍मान के कारण मोदी से अलग होते जा रहे हैं।

आखिर गांधीनगर में मोदी के निजी आवास के ऊपरी मंजिल पर रहकर उनके पूरे प्रचार को चार साल तक संभालने वाले व्‍यक्ति को सम्‍मान नहीं मिलेगा तो वह और क्‍या करेगा। चाणक्‍य ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए ही मगध के शासक धनानंद के विरुद्ध चंद्रगुप्‍त मौर्य को तैयार किया था। आज फिर से मगध की धरती से ही वह कहानी दुहराई गयी और वहीं से प्रशांत ने अमितशाह से अपने अपमान का बदला लिया। इसी मगध की धरती ने नीतीश कुमार के अहंकार को भी चकनाचूर किया था, जब उसने लोकसभा में नीतीश नहीं, नरेंद्र मोदी को 40 में से 31 सीट दिलायी थी। अहंकार को मगध की धरती चकनाचूर करती रही है। यह यहां का इतिहास रहा है।

व्‍यक्ति भूखा तो रह जाता है, लेकिन अपमान सहन नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री मोदी को यह समझना चाहिए। यदि प्रशांत किशोर नीतीश कुमार को उस माइक्रो लेबल का मैनेजमेंट नहीं देते तो वो शायद आज ऐसा नतीजा देखने को नहीं भी मिल सकता था। सोचिए, मोदी के आसपास के लोगों ने अपने अहंकार में आखिर किसका नुकसान किया। जिस सुब्रहमनियन स्‍वामी पर मोदी जी ने जेटली को तरजीह दे रखा है, कल को उनके हटते ही जितना बड़ा नुकसान होगा, उसका अंदाजा शायद अभी तक मोदी को नहीं है। समय रहते चेतने वाला ही वास्‍तव में जिंदा इंसान है। ‪‬

पढि़ए संकर्षण की जुबानी, प्रशांत किशोर की कहानी:
http://www.telegraphindia.com/1151109/jsp/nation/story_52204.jsp#.VkGWBdKrQ1h

#‎SandeepDeo‬ ‪#‎BiharElection

Web Title: sandeep deo blog on ‬‎BiharElection 2015-3

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