दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!

आधी आबादी ब्‍यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में बचपन सुरक्षित नहीं है। शहर कंक्रीट का जंगल बनता जा रहा है। बच्चों के लिए खेलने के लिए जगह नहीं बची है। पार्क भी धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। अभिभावकों की अपेक्षाओं के बीच बचपन पिस रहा है। बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी नहीं हो पा रहा है। यह विचार दो दिवसीय बाल मेले में वक्ताओं ने व्यक्त किए। मेले में दो दिन बच्चों ने जमकर धमाल किया।

फाइल फोटो

सामाजिक संस्था 'व्हाईट शेडो' द्वारा पश्चिमी दिल्ली के बापरोला, प्रधान एन्कलेव में पिछले तीन वर्षों से लगातार बाल मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस बार भी दो दिवसीय बाल मेला आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन छोटी-सी बच्‍ची साक्षी ने हजारों रंग-बिरंगे गुब्बारे आसमान में उड़ाकर किया। मेले के प्रथम दिन बांसुरी वादक व गिनीज बुक ऑफ वर्ल्‍ड रिकार्ड में शामिल डॉ. दिनेश शांडिल्य ने 18 फीट की बांसुरी बजाकर सबका मन मोह लिया। इसके बाद वरिष्ठ साहित्यकार विनोद बब्बर ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं नाटिका की प्रस्तुति दी। डॉ. दिनेश शांडिल्य कार्यक्रम के पहले दिन मुख्य अतिथि थे।

* बाल मेले में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल
* अपेक्षाओं के बोझ तले दब रहा शारीरिक और मानसिक विकास
* दो दिवसीय मेले में बच्चों ने दिल खोलकर किया धमाल।

मेले के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में आगरा के बाल अधिकार कार्यकर्ता एवं समाजसेवी नरेश पारस उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि आज बच्चे बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। देश में हर दिन सैकड़ों बच्चे गायब हो रहे हैं। बच्चों से जबरन भिक्षावृत्ति एवं बालश्रम कराया जा रहा है। उनकों मुक्त कराना सरकार की जिम्मेदारी है। अभिभावकों भी अपेक्षाएं बच्चों के प्रति बहुत बढ़ गई हैं। बच्चों को खेलने कूदने का समय ही नहीं मिल पा रहा है। बच्चों का बचपन दीवारों की बीच घुट रहा है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए ऐसे बाल मेलों का आयोजन बहुत जरूरी है।

 

विशिष्ट अतिथि के रूप में फिल्म व म्यूजिक डायरेक्टर सतीश अर्पित और बाल अभिनेत्री एवं इण्डियन फैशन टीवी की ब्रांड एम्बेसडर वन्या सिंह रहे। सतीश अर्पित ने कहा कि फिल्में ऐसी बननी चाहिए जो सामाजिक संदेश दें। फिल्मों के संदेश से समाज और देश के विकास पर बहुत असर पड़ता है।

बाल मेला के संयोजक अनुपम आनंद झा के अनुसार, मेले में डॉ. राजवीर सोलंकी तथा अन्य अतिथियों द्वारा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजली अर्पित की गई। मेले का मुख्य आकर्षण झूले, नृत्य, खान-पीन की स्टाल, संगीत, योग, रॉक बैंड एवं कराटे रहे। मेले में सेल्फी विद बेटी, डांस एवं थिंक एंड ड्रा की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। कार्यक्रम के अंत में 'व्हाइट शेडो' द्वारा सभी अतिथियों को शाल ओढ़ाकर, बुके तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

मेले का सफल संचालन सत्यम झा, अमन खान, वंदना ,आदित्या कान्त एवं भिशाक मोहन ने किया। मेले को सफल बनाने में 'व्हाइट शेडो' के अनुपम आनंद झा, अमित झांगू, चंदन शाह, सचिन कुमार,गुलाब अंसारी सहित बाल मेले की पूरी टीम का सहयोग रहा।

Web Title: bal mela at west delhi-2015