विचार विमर्श

असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के बीच रहती हूं, लेकिन मैंने कभी भारत में भेदभाव महसूस नहीं किया!

सोफिया रंगवाला। मैं एक मुस्लिम महिला हूं और पेशे से डॉक्टर हूं। बंगलोर में मेरी एक हाइ एण्ड लेजर स्किन क्लिनिक है। मेरा परिवार कुवैत में रहता है। मैं भी कुवैत में पली बढ़ी हूं लेकिन 18 साल की उम्र में डाक्टरी की पढ़ाई करने के लिए मैं भारत लौट आयी थी। पढ़ाई खत्म होने के बाद जहां मेरे ज्यादातर साथी अच्छे भविष्य के सपने के साथ बाहर चले गये मैंने भारत में ही रहने का निश्चय किया। आज तक मैंने एक बार भी कभी यह महसूस नहीं किया कि एक मुसलमान होने के कारण हमें कोई दिक्कत हुई हो। मुझे अपने देश से प्रेम था और मैंने भारत में ही रहने का निश्चय किया।

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गो-वध बंदी का राष्ट्रीय कानून बने

रामबहादुर राय। गोरक्षा का सवाल सैकड़ों साल पुराना है। इसका संबंध भारत की सभ्यता से है। हमारी सभ्यता में गाय और गोवंश का स्थान बहुत ऊंचा है। जब कभी इस भावना को चोट पहुंची तो विरोध हुआ। आंदोलन हुए। गोरक्षा के लिए बलिदान और अपने जान की बाजी लगा देने वालों की कभी कमी नहीं रही। इस बारे में बहुत कुछ इतिहास के पन्नों में बिखरा हुआ है। गांधी धारा के विचारक और इतिहासकार धर्मपाल ने इस बारे में अध्ययन कर कुछ ऐसे तथ्य खोजे जो अज्ञात थे।

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वैदिक की जुबानी हाफिज सईद से मुलाकात और साक्षात्‍कार की पूरी कहानी

डॉ वेद प्रदाप वैदिक। हाफिज सईद से मेरी मुलाकात अचानक तय हुई। दो जुलाई की दोपहर को मैं भारत आनेवाला था। एक जुलाई की शाम को कुछ पत्रकार मुझसे बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आप भारत-विरोधी आतंकवाद का मुद्दा इतनी जोर से उठा रहे हैं तो आप कभी हाफिज सईद से मिले? मैंने कहा नहीं। उनमें से लगभग सबके पास हाफिज सईद के नंबर थे। उनमें से किसी ने फोन मिलाया और मुलाकात तय हो गई। सुबह 7 बजे इसलिए तय हुई कि मुझे लाहौर हवाई अड्डे पर 10-11 बजे के बीच पहुंचना था। मैंने कह दिया था कि अगर मुलाकात देर से तय हुई तो मैं नहीं मिल सकूंगा।

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हर रोज हजारों बलात्कार इज्जत की चादर में लपेट कर दफना दिए जाते हैं!

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'। हमारे देश में स्त्रियों के साथ बलात्कार तो रोज होते हैं, एकाध नहीं हजारों की संख्या में किये जाते हैं, लेकिन कुछ एक बलात्कार की घटनाएं किन्हीं अपरिहार्य कारणों और हालातों में सार्वजनिक हो जाती हैं। जिनके मीडिया के मार्फ़त सामने आ जाने पर औरतों, मर्दोँ और मीडिया द्वारा वहशी बलात्कारी मर्दों को गाली देने और सरकार को कोसने का सिलसिला शुरू हो जाता है। लेकिन हमारा अनुभव साक्षी है की इन बातों से न तो कुछ हासिल हुआ, न हो रहा और न होगा। क्योंकि हम इस रोग को ठीक करने के बारे में  ईमानदारी से विचार ही नहीं करना चाहते!

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वैदिक हाफिज भाई भाई!

सुधीर मौर्य। काश वैदिक जी ने जिस हिम्मत के साथ भारत के प्रधानमंत्री रहते नरसिम्हा राव जी के साथ ताश खेलते थे उसी हिम्मत के साथ हाफ़िज़ से विरोध दर्ज़ करते भारत के मुंबई में उसके द्वारा करवाये गए आतंकवादी हमले का। के वैदिक जी को हाफिज के घर पे नाश्ता करते हुए उसके द्वारा मुंबई में फैलाये गए सैकड़ो निरपराध लोगो का खून बिलकुल याद नहीं अाया। क्या संदीप उन्नीकृष्णन के बलिदान का कोई महत्व नहीं वैदिक जी की नज़र में।

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