महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पेशकश: अगर मर्दों को मासिक धर्म होता!

सुमिरन प्रीत कौर बीबीसी संवाददाता। मासिक धर्म या माहवारी एक ऐसा विषय है जिस पर न लड़कियां खुलकर बात कर पाती हैं और न ही परंपरागत भारतीय समाज में आमतौर पर ऐसे विषयों पर बात करने की इजाज़त है. इसी वजह से महिला स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे अहम मुद्दों पर भी कई तरह की भ्रांतियां जन्म लेती हैं.

कुछ युवाओं ने इस विषय पर फ़िल्म और डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने का बीड़ा उठाया है. दिल्ली के अनीश बांगिया और श्रेय छाबड़ा के इसी विषय पर बनाए गए एक वीडियो ने यूट्यूब पर लोगों का ध्यान खींचा. इसके अलग प्रस्तुतिकरण ने वीडियो को वायरल होने में मदद दी. इसका विषय था, 'वॉट इफ़ बॉयज़ हेड पीरियड्स' (क्या होता अगर लड़कों को मासिक धर्म होता). वीडियो में कुछ युवकों से यही सवाल पूछा गया. कुछ जवाब मज़ाकिया किस्म के थे तो कुछ बेहद गंभीर.
बात तो करें

अनीश कहते हैं, ''इस बारे में बात करने का वीडियो भी एक तरीका है. हमारी कोशिश थी कि लोगों का ध्यान इस ओर कैसे खींचा जाए? इसके लिए ह्यूमर बहुत काम आता है."

वो कहते हैं, "क्योंकि आजकल लोगों को जल्दी है तो वीडियो छोटा होना चाहिए. कम से कम मज़ाक में ही सही, पर लोग अब इसके बारे में बात तो करने लगे हैं."

वहीं श्रेय छाबड़ा का कहना है, ''जब तक किसी मुद्दे पर बात नहीं करेंगे, आने वाली पीढ़ियों को वो बात कैसे समझ में आएगी. हमारे देश में मासिक धर्म के बारे में बात ही नहीं होती, इसलिए कई सामाजिक रूढ़ियां, पूर्वाग्रह और धारणाएं मासिक धर्म से जुड़ी हुई हैं.'' श्रेय बताते हैं, ''मैं तो कहूंगा कि अगर मर्दों को मासिक धर्म होता तो वो भी बच्चे पैदा कर सकते.''

'मुझे शर्म आती है'
देहरादून में रहने वाली स्वतंत्र फ़िल्म निर्माता-निर्देशक खुशबू दुआ इस विषय पर डॉक्यूमेंट्री बना रही हैं. फ़िल्म बनाने की प्रक्रिया में उन्होंने रंगीला कुमारी नाम की एक किशोरी से सबसे पहले बात की. रंगीला की मां घर-घर जाकर काम करती हैं और उनके पिता एक मज़दूर हैं. रंगीला बताती है, "मेरे यहां मासिक धर्म के दौरान बार-बार नहाने का रिवाज़ है."

उन्होंने बताया, ''हम उन दिनों मंदिर नहीं जाते, पूजा नहीं करते क्योंकि हमें अछूत माना जाता है.'' सौम्या शर्मा देहरादून के एक कॉलेज में पढ़ती हैं. सौम्या के लिए सैनिट्री पैड्स ख़रीदना आसान काम नहीं है. वह कहती हैं, "मैं अपने लिए पैड्स नहीं लेती. मुझे शर्मिंदगी महसूस होती है. मैं मंदिर नहीं जाती. आचार नहीं छूती."

मनाना पड़ा
खुशबू दुआ ने इस बारे में कई लड़कियों से बात की. लेकिन उनमें से अधिकतर को बात करने के लिए मनाना पड़ा और ये काम आसान नहीं था.

खुशबू बताती हैं, "लोग बात करने को तैयार नहीं थे. अगर लड़कियां तैयार हो भी जाती हैं तो उनके परिवार वाले नहीं मानते. वो कहते हैं कि जैसा चल रहा है उसे बदलने की क्या ज़रूरत है? मेरा ये कहना है कि जब कोई चीज़ प्रकृति ने खुद बनाई है तो शर्म कैसी?."

इन युवाओं ने मासिक धर्म पर लोगों की झिझक दूर करने की कोशिश शुरू की है और उन्हें यक़ीन है कि इससे शायद एक बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है.

महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पेशकश: अगर मर्दों को मासिक धर्म होता!

महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पेशकश: सैनिटरी पैड बनाती थीं, अब पाथती हैं उपले

महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पेशकश: ‘ढाई लोटे पानी से ढाई दिन माहवारी होगी’

महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पेशकश: यहां होता है पहली माहवारी पर जश्न

महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पेशकश: 'इसे छूने के बाद रोटी नहीं खाई जाती'

महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पेशकश: औरतों की माहवारीः कब तक जारी रहेगी शर्म?

साभार: बीबीसी हिंदी
बीबीसी की 'हम गुनाहगार औरतें' श्रृंखला का मूल लिंक:

http://www.bbc.co.uk/hindi/indepth/women_issues_cluster_va


Web Title: women health series menstruation taboo-6
Keywords: women health series| menstruation taboo| महिला स्वास्थ्य पर बीबीसी हिंदी की पेशकश| माहवारी| महीना| पीरियड| मासिक धर्म| sanitary napkin|

वेद में आदर्श स्त्री शिक्षा का वर्णन...
वेद में आदर्श स्त्री शिक्षा का वर्णन

डा. अशोक आर्य। जिन शिक्षाओं को आवश्यक माना है , उनमें पाक शिक्षा प्रमुख है | वास्तव में स्त्री शिक्षा के वैदिक आधार में पाक शिक्षा को अत्यावश्यक माना गया है | [...]

किताबों में ही दफन रह गया, नेहरू खानदान ...
किताबों में ही दफन रह गया, नेहरू खानदान का काला इतिहास!

14 नवंबर, नेहरू जयंती पर विशेष। दिनेश चंद्र मिश्र। जम्मू-कश्मीर में आए महीनों हो गए थे, एक बात अक्सर दिमाग में खटकती थी कि अभी तक नेहरू के खानदान का कोई क्यों नहीं मिला, [...]

इस्‍लामी कटरता व आतंकवाद का आखिरी निशाना...
इस्‍लामी कटरता व आतंकवाद का आखिरी निशाना हिंदुस्‍तान ही है!

संदीप देव।ार इस्‍लामी आतंकवादी संगठन बोको हराम ने खतरनाक इस्‍लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) से हाथ मिला लिया है। बोको हराम ने इस्लामिक स्टेट समूह के प्रति अपनी औपचारिक निष्ठा जाहिर की [...]

भारत में ज्ञान प्राप्‍त करने और भारत में...
भारत में ज्ञान प्राप्‍त करने और भारत में ही शरीर त्‍यागने वाले ईसा मसीह की वास्‍तविकता पर ईसायत मौन!

सच चाहे किसी भी धर्म के बारे में हो, उसे स्वीकार करने में उक्त धर्म के अनुयायियों को बहुत कठिनाई होती है। आज का दौर धार्मिक कट्टरता का दौर है ऐसे में सभी अपने अपने कुएं में बंद हैं। [...]

मां आशीर्वाद दे कि इस नवरात्रि मैं अपने ...
मां आशीर्वाद दे कि इस नवरात्रि मैं अपने 'मैं' को विसर्जित कर सकूं!

संदीप देव। आज से नवरात्रि शुरु हो रही है। इस नवरात्रि के समाप्‍त होते-होते मां दुर्गा हममें से कम से कम कुछ लोगों का ही सही, लेकिन 'मन' हर ले! 'मन' अर्थात ' [...]

यदि नानाजी नहीं होते तो जयप्रकाश नारायण ...
यदि नानाजी नहीं होते तो जयप्रकाश नारायण नहीं बचते: नरेंद्र मोदी

आधीआबादी ब्‍यूरो, नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपातकाल के दौरान यदि नानाजी देशमुख नहीं होते तो जयप्रकाश नारायण जिंदा नहीं बचते। पटना में लाठीचार्ज के दौरान लाठी जयप्रकाश जी के सिर पर लगी थी, लेकिन [...]

महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पे...
महिलाओं की माहवारी पर बीबीसी हिंदी की पेशकश: अगर मर्दों को मासिक धर्म होता!

सुमिरन प्रीत कौर बीबीसी संवाददाता।र बात कर पाती हैं और न ही परंपरागत भारतीय समाज में आमतौर पर ऐसे विषयों पर बात करने की इजाज़त है. [...]

मुगल सल्‍तनत के आखिरी वारिशों का हश्र या...

संदीपदेव‬।ासन करने वाले मुगल साम्राज्‍य के शासक भी बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की तरह अहंकार से भरे थे, उन्‍हें सत्‍ता का गुमान था, लालू यादव के 'भूराबाल [...]

दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!...
दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!

आधी आबादी ब्‍यूरो, नई दिल्ली। जंगल बनता जा रहा है। बच्चों के लिए खेलने के लिए जगह नहीं बची है। पार्क भी धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। अभिभावकों की [...]

नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदे...
नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश

दिल्‍ली।  कमल इंसटिट्यूट ऑफ हायर एडूकेशन के छात्र और छात्राओ ने 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ ' अभियान पर नुक्कड नाटक का आयोजन किया। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र [...]

असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के ब...
असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के बीच रहती हूं, लेकिन मैंने कभी भारत में भेदभाव महसूस नहीं किया!

सोफिया रंगवाला। पेशे से डॉक्टर हूं। बंगलोर में मेरी एक हाइ एण्ड लेजर स्किन क्लिनिक है। मेरा परिवार कुवैत में रहता है। मैं भी कुवैत में पली बढ़ी हूं लेकिन 18 साल [...]

प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम कर...
प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम करे, सूचना प्रसारण मंत्री को तो क्रिकेट डिप्‍लोमेसी से ही फुर्सत नहीं है!

संदीप देव।उटलुक पत्रिका के एक गलत खबर के कारण जो हंगामा हुआ और सदन को स्‍थगित करना पड़ा, इसका जिम्‍मेवार कौन है? क्‍या मोदी सरकार मीडिया के इस तरह के गैरजिम्‍मेवार और सबूत [...]

Other Articles