होली हिंदुस्‍तान की गहरी प्रज्ञा से उपजा हुआ त्‍यौहार है

अमृत साधना। होली हिंदुस्तान की गहरी प्रज्ञा से उपजा हुआ त्योहार है। उसमें पुराण कथा एक आवरण है, जिसमें लपेटकर मनोविज्ञान की घुट्टी पिलाई गई है। सभ्य मनुष्य के मन पर नैतिकता का इतना बोझ होता है कि उसका रेचन करना जरूरी है, अन्यथा वह पागल हो जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए होली के नाम पर रेचन की सहूलियत दी गई है। पुराणों में इसके बारे में जो कहानी है, उसकी कई गहरी परतें हैं।

हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद कभी हुए या नहीं, इससे प्रयोजन नहीं है। लेकिन पुराण में जिस तरफ इशारा है, आस्तिक और नास्तिक का संघर्ष- वह रोज होता है, प्रतिपल होता है। पुराण इतिहास नहीं है, वह मनुष्य के जीवन का अंतर्निहित सत्य है। इसमें आस्तिकता और नास्तिकता का संघर्ष है, पिता और पुत्र का, कल और आज का, शुभ और अशुभ का संघर्ष है।

होली की कहानी का प्रतीक देखें तो हिरण्यकश्यप पिता है। पिता बीज है, पुत्र उसी का अंकुर है। हिरण्यकश्यप जैसी दुष्टात्मा को पता नहीं कि मेरे घर आस्तिक पैदा होगा, मेरे प्राणों से आस्तिकता जन्मेगी। इसका विरोधाभास देखें। इधर नास्तिकता के घर आस्तिकता प्रकट हुई और हिरण्यकश्यप घबड़ा गया। जीवन की मान्यताएं, जीवन की धारणाएं दांव पर लग गईं।

ओशो ने इस कहानी में छिपे हुए प्रतीक को सुंदरता से खोला है, 'हर बाप बेटे से लड़ता है। हर बेटा बाप के खिलाफ बगावत करता है। और ऐसा बाप और बेटे का ही सवाल नहीं है -हर 'आज' 'बीते कल' के खिलाफ बगावत है। वर्तमान अतीत से छुटकारे की चेष्टा करता है। अतीत पिता है, वर्तमान पुत्र है। हिरण्यकश्यप मनुष्य के बाहर नहीं है, न ही प्रहलाद बाहर है। हिरण्यकश्यप और प्रह्लाद दो नहीं हैं - प्रत्येक व्यक्ति के भीतर घटने वाली दो घटनाएं हैं।

जब तक मन में संदेह है, हिरण्यकश्यप मौजूद है। तब तक अपने भीतर उठते श्रद्धा के अंकुरों को तुम पहाड़ों से गिराओगे, पत्थरों से दबाओगे, पानी में डुबाओगे, आग में जलाओगे- लेकिन तुम जला न पाओगे। जहां संदेह के राजपथ हैं; वहां भीड़ साथ है। जहां श्रद्धा की पगडंडियां हैं; वहां तुम एकदम अकेले हो जाते हो, एकाकी। संदेह की क्षमता सिर्फ विध्वंस की है, सृजन की नहीं है। संदेह मिटा सकता है, बना नहीं सकता। संदेह के पास सृजनात्मक ऊर्जा नहीं है।

आस्तिकता और श्रद्धा कितनी ही छोटी क्यों न हो, शक्तिशाली होती है। प्रह्लाद के भक्ति गीत हिरण्यकश्यप को बहुत बेचैन करने लगे होंगे। उसे एकबारगी वही सूझा जो सूझता है- नकार, मिटा देने की इच्छा। नास्तिकता विध्वंसात्मक है, उसकी सहोदर है आग। इसलिए हिरण्यकश्यप की बहन है अग्नि, होलिका। लेकिन अग्नि सिर्फ अशुभ को जला सकती है, शुद्ध तो उसमें से कुंदन की तरह निखरकर बाहर आता है। इसीलिए आग की गोद में बैठा प्रह्लाद अनजला बच गया।

उस परम विजय के दिन को हमने अपनी जीवन शैली में उत्सव की तरह शामिल कर लिया। फिर जन सामान्य ने उसमें रंगों की बौछार जोड़ दी। बड़ा सतरंगी उत्सव है। पहले अग्नि में मन का कचरा जलाओ, उसके बाद प्रेम रंग की बरसात करो। यह होली का मूल स्वरूप था। इसके पीछे मनोविज्ञान है अचेतन मन की सफाई करना। इस सफाई को पाश्चात्य मनोविज्ञान में कैथार्सिस या रेचन कहते हैं।

साइकोथेरेपी का अनिवार्य हिस्सा होता है मन में छिपी गंदगी की सफाई। उसके बाद ही भीतर प्रवेश हो सकता है। ओशो ने अपनी ध्यान विधियां इसी की बुनियाद पर बनाई हैं।

होली जैसे वैज्ञानिक पर्व का हम थोड़ी बुद्धिमानी से उपयोग कर सकें तो इस एक दिन में बरसों की सफाई हो सकती है। फिर निर्मल मन के पात्र में, सद्दवों की सुगंध में घोलकर रंग खेलें तो होली वैसी होगी जैसी मीराबाई ने खेली थी :

बिन करताल पखावज बाजै, अनहद की झनकार रे
फागुन के दिन चार रे, होली खेल मना रे
बिन सुर राग छत्तीसों गावै, रोम-रोम रस कार रे
होली खेल मना रे।।

साभार: नवभारत टाइम्‍स: http://navbharattimes.indiatimes.com/astro/holy-discourse/religious-discourse/-/articleshow/2888106.cms?

Web title: discourse on holi-1

Keywords: होली| होली के त्‍यौहार का महत्‍व| होली की कथा| ओशो प्रवचन| ओशो वाणी| होली पर ओशो के विचार|holi discourse

भारत में ज्ञान प्राप्‍त करने और भारत में...
भारत में ज्ञान प्राप्‍त करने और भारत में ही शरीर त्‍यागने वाले ईसा मसीह की वास्‍तविकता पर ईसायत मौन!

सच चाहे किसी भी धर्म के बारे में हो, उसे स्वीकार करने में उक्त धर्म के अनुयायियों को बहुत कठिनाई होती है। आज का दौर धार्मिक कट्टरता का दौर है ऐसे में सभी अपने अपने कुएं में बंद हैं। [...]

आप प्रतिक्रिया मत दीजिए, बल्कि मसीह-मोहम...

संदीप देव।ने इतिहास अभियान को लेकर मैं जो कुछ लिख रहा हूं, उसमें कुछ वामपंथी-सेक्‍यूलर-इस्‍लामी जमात घुसकर उसे संदर्भ से काटकर लोगों को भटकाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। ओशो ने [...]

दुनिया की सबसे वैज्ञानिक लिपि है देवनागर...
दुनिया की सबसे वैज्ञानिक लिपि है देवनागरी लिपि

‪संदीपदेव‬।निक लिपि है देवनागरी लिपि। देखिए, देवनागरी का पहला अक्षर है 'अ' अर्थात 'अज्ञान' और देवनागरी का आखिरी अक्षर है 'ज्ञ' अर्थात 'ज्ञान'। देवनागरी मतलब- ' [...]

असहिष्णुता: क्‍या आप जानते हैं शाहरुख खा...
असहिष्णुता: क्‍या आप जानते हैं शाहरुख खान की मां आपातकाल में संजय गांधी की उस टीम में शामिल थीं, जिसने मुसलमानों के जबरन नसबंदी का फैसला किया था!

संदीप देव। पर जिन तथ्‍यों सामने रख रहा हूं, उससे पहले बहुत कम लोग परिचित थे और यह दर्शाता है कि कांग्रेस-वामपं‍थियों ने किस तरह झूठ की बुनियाद पर देश का पूरा इतिहास लिखा [...]

अब रिमोर्ट से कंट्रोल करें अपने गर्भनिरो...
अब रिमोर्ट से कंट्रोल करें अपने गर्भनिरोधक को!

नर्इ दिल्‍ली। अमेरिका के मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक कंप्यूटर चिप आधारित गर्भनिरोधक विकसित किया है, जिसे रिमोट कंट्रोल से ऑपरेट किया जा सकेगा। यह लगातार 16 साल तक काम कर सकता है। खास बात यह है [...]

स्ट्रेस मॅनेजमेंट का फंडा...
स्ट्रेस मॅनेजमेंट का फंडा

एक मनोवैज्ञानिक स्ट्रेस मॅनेजमेंट के बारे में, अपने छात्रों से मुखातिब था। उसने पानी से भरा एक ग्लास उठाया। सभी ने समझा की अब "आधा खाली या आधा भरा है", यही पुछा और समझाया जाएगा! मगर [...]

साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार लौटाए जाने के ...
साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार लौटाए जाने के पीछे की राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय साजिश!

संदीप देव।ुरस्‍कार लौटाने का यह जो खेल चल रहा है, आप लोग इसे हल्‍के में न लें। PMO India मोदी सरकार पर किए गए इस वार में पर्दे [...]

हिंदू हैं तो आदि गुरु शंकराचार्य के रास्...

संदीप देव।नवर है, जैसे कि घोड़ा एक जानवर है. तो फिर उसे गोमाता कैसे कहा जा सकता है.?" जस्टिस मार्केंडेय काटजू साहब पूछ रहे हैं। और वह यह भी पूछ [...]

दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!...
दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!

आधी आबादी ब्‍यूरो, नई दिल्ली। जंगल बनता जा रहा है। बच्चों के लिए खेलने के लिए जगह नहीं बची है। पार्क भी धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। अभिभावकों की [...]

नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदे...
नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश

दिल्‍ली।  कमल इंसटिट्यूट ऑफ हायर एडूकेशन के छात्र और छात्राओ ने 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ ' अभियान पर नुक्कड नाटक का आयोजन किया। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र [...]

असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के ब...
असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के बीच रहती हूं, लेकिन मैंने कभी भारत में भेदभाव महसूस नहीं किया!

सोफिया रंगवाला। पेशे से डॉक्टर हूं। बंगलोर में मेरी एक हाइ एण्ड लेजर स्किन क्लिनिक है। मेरा परिवार कुवैत में रहता है। मैं भी कुवैत में पली बढ़ी हूं लेकिन 18 साल [...]

प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम कर...
प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम करे, सूचना प्रसारण मंत्री को तो क्रिकेट डिप्‍लोमेसी से ही फुर्सत नहीं है!

संदीप देव।उटलुक पत्रिका के एक गलत खबर के कारण जो हंगामा हुआ और सदन को स्‍थगित करना पड़ा, इसका जिम्‍मेवार कौन है? क्‍या मोदी सरकार मीडिया के इस तरह के गैरजिम्‍मेवार और सबूत [...]

Other Articles