धर्म गुरु

भारत में ज्ञान प्राप्‍त करने और भारत में ही शरीर त्‍यागने वाले ईसा मसीह की वास्‍तविकता पर ईसायत मौन!

सच चाहे किसी भी धर्म के बारे में हो, उसे स्वीकार करने में उक्त धर्म के अनुयायियों को बहुत कठिनाई होती है। आज का दौर धार्मिक कट्टरता का दौर है ऐसे में सभी अपने अपने कुएं में बंद हैं। कोई भी सच को जानना नहीं चाहता, क्योंकि इससे उसके जीवन के अब तक बनाए गए आधार गिरते हैं। वह खुद को असहाय महसूस करते हैं और इस तरह उनमें दूसरे धर्म के अनुयायियों के प्रति नफरत का जन्म होता है। क्योंकि बचपन से जो अब तक उन्होंने सीखा, वह कैसे गलत हो सकता है? सच में वही व्यक्ति धार्मिक है, जो किसी धर्म से बंधा नहीं होकर सत्य से बंधा है। जिसमें विचार करने और समझने की क्षमता है वहीं मनुष्यों में श्रेष्ठ है।

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आप उन्‍हें क्‍या कहेंगे, प्रबंधक, इंजीनियर, लेखक, अनुसंधानकर्ता या फिर आयुर्वेदाचार्य...!

आचार्य बालकृष्‍ण जी के जन्‍मदिन पर विशेष। संदीप देव, पतंजलि योगपीठ से लौट कर। पतंजलि योगपीठ के भवनों को गौर से देखिए, वो आपको किसी योगी के योगमुद्रा में बैठे होने का अहसास कराता हुआ-सा प्रतीत होता है! इसके बाहरी आंतरिक सज्‍जा और वास्‍तु में आधुनिकता और आध्‍यात्मिकता का गहरा समावेश नजर आता है। ऐसा लगता है जैसे किसी व्‍यावसायिक आर्किटेक्‍चर ने इसे डिजाइन किया है, जो गहरी आध्‍यात्मिक में भी डूबा रहा है! 'पतंजलि योगपीठ' में रुकने के दौरान मैंने अपनी इस जिज्ञासा को वहां के कुछ मित्रों से पूछ कर शांत करना चाहा, लेकिन उसने जो बताया वह बेहद आश्‍चर्यजनक था!
पतंजलि योगपीठ, योगग्राम, पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क, आचार्यकुलम, वैदिक गुरुकुलम, पतंजलि विश्‍वविद्यालय, दिव्‍य फार्मेसी, पतंजलि आयुर्वेद आदि के शिल्‍पी और रचनाकार स्‍वामी रामदेव के बालसखा आचार्य बालकृष्‍ण जी है! और ताज्‍जुब देखिए, गुरुकुल से पढ़े आचार्य बालकृष्‍ण ने कभी इंजीनियरिंग, आर्किटेक्‍चर या प्रबंधन की पढ़ाई नहीं की है!

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आदि शंकराचार्य का 'परकाया प्रवेश' और आशुतोष महाराज की 'गहन समाधि'!

संदीप देव। मैं आजकल हिंदु समाज के संतों और राष्‍ट्रवादी व्‍यक्तित्‍व से लगातार मिल रहा हूं। दरअसल उनकी बातें मुझे खींचती हैं, मुझे बुलाती हैं और ऐसा लगता है कि मुझे कई बार किंकर्त्‍तव्‍यविमूढ़ बना जाती हैं! दिव्‍य संतों का सान्निध्‍य एक सकारात्‍मक ऊर्जा से भर देता है। अक्‍सर इन संतों के यहां कई लोग मुझे ऐसे मिल जाते हैं, जो पूछ लेते हैं आशुतोष महाराज जी की गहन समाधि के बारे में आपके क्‍या विचार हैं? क्‍या वो सचमुच समाधि में हैं या फिर अपने देह का त्‍याग कर चुके हैं? या फिर केवल उनके शिष्‍यों का हठ है जो उन्‍हें पिछले चार महीने से गहन समाधि में बता रहे हैं?

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एक समाजवादी के रूप में स्‍वामी विवेकानंद

संदीप देव। स्‍वामी विवेकानंद ने लिखा है, '' मैं समाजवादी हूं, इसलिए नहीं कि मैं इसे पूर्ण रूप से निर्दोष व्‍यवस्‍था समझता हूं, बल्कि इसलिए कि आधी रोटी अच्‍छी है, कुछ नहीं से।'' स्‍वामी विवेकानंद के समाजवाद को समझने के लिए उनकी पुस्‍तक, 'जाति, संस्‍कृति और समाजवाद' को पढ़ने की जरूरत है...और फिर पता चलेगा कि उनका समाजवाद, समाजवाद के नाम पर इस देश में राजनीति करने वालों से बिल्‍कुल भिन्‍न था। उनके समाजवाद में नर ही नारायण है।

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हजारों 'अभिमन्‍यु' के जन्‍म को सफल बनाएंगे स्‍वामी रामदेव!

संदीप देव, पतंजलि योग पीठ, हरिद्वार से लौटकर। अर्जुन और सुभद्रा का पुत्र अभिमन्‍यु गर्भ से ही 'चक्रव्‍यूह' तोड़ने की विधि जानता था! जब वह सुभद्रा के गर्भ में था तब अर्जुन सुभद्रा को 'चक्रव्‍यूह' तोड़ने की योजना समझा रहे थे। छह द्वारों को तोड़ने की योजना तक तो सुभद्रा जगी रही, लेकिन सातवें द्वार को तोड़ने की योजना समझने से पहले ही वह सो गई, जिससे गर्भस्‍थ शिशु अभिमन्‍यु 'चक्रव्‍यूह' के सातवें द्वार को तोड़ने और चक्रव्‍यूह से बाहर आने के बारे में कुछ नहीं जान सका, जो महाभारत के 13 वें दिन उसकी मौत का कारण बना। देश के 'आधुनिक चाणक्‍य' स्‍वामी रामदेव देश में ऐसे हजारों 'अभिमन्‍यु' को तैयार करने की योजना पर काम शुरू कर चुके हैं, लेकिन वह नहीं चाहते कि सुभद्रा वाली गलती फिर से हो! इसलिए उनकी पूरी योजना ऐसी है, जिसमें मां की चेतना से शिशु का चैतन्‍य तो जुड़ेगा ही, मां की सजगता इतनी अधिक बढ़ जाएगी कि अब किसी अभिमन्‍यु के लिए चूक की कोई संभावना नहीं बची रहेगी! ऐसे 'अभिमन्‍यु' बाबा रामदेव के 'दिव्‍य भारत' निर्माण के 'दिव्‍य मानव' कहलाएंगे...!

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मां आशीर्वाद दे कि इस नवरात्रि मैं अपने ...
मां आशीर्वाद दे कि इस नवरात्रि मैं अपने 'मैं' को विसर्जित कर सकूं!

संदीप देव। आज से नवरात्रि शुरु हो रही है। इस नवरात्रि के समाप्‍त होते-होते मां दुर्गा हममें से कम से कम कुछ लोगों का ही सही, लेकिन 'मन' हर ले! 'मन' अर्थात ' [...]

'स्‍वराज हमारा जन्‍मसिद्ध अधिकार है' का ...
'स्‍वराज हमारा जन्‍मसिद्ध अधिकार है' का नारा देने वाले तिलक को देश ने पहली बार सन् 1964 में याद किया!

संदीपदेव‬।ोस ने अपनी पुस्‍तक 'द इंडियन स्‍ट्रगल' में लिखा है, ''भारतीय राजनीति में सिर्फ तिलक गांधी के प्रतिद्वंद्वी हो सकते थे। उनकी मत्‍यु ने गांधी का काम बहुत आसान कर दिया।'' [...]

किताबों में ही दफन रह गया, नेहरू खानदान ...
किताबों में ही दफन रह गया, नेहरू खानदान का काला इतिहास!

14 नवंबर, नेहरू जयंती पर विशेष। दिनेश चंद्र मिश्र। जम्मू-कश्मीर में आए महीनों हो गए थे, एक बात अक्सर दिमाग में खटकती थी कि अभी तक नेहरू के खानदान का कोई क्यों नहीं मिला, [...]

मदर टेरेसा का धर्मांतरण से कितना है नाता...

By एबीपी न्यूज, नई दिल्ली।मदर टेरेसा की पहचान गरीबों के लिए काम करने वाले मसीहा की जैसी है लेकिन इस बार चर्चा है उनकी सेवा के पीछे [...]

आज पुरुष हर महिला को केवल मादा की नजर से...
आज पुरुष हर महिला को केवल मादा की नजर से देखना चाहता है!

संदीप देव। बदायूं के नृशंस बलात्‍कार कांड से शर्मसार मानवता ने अपना सिर उठाया भी नहीं था कि 1) घुमाने के बहाने वैष्णो देवी धाम ले जाकर रेप 2) पति ने पत्नी को किया दरिंदों के [...]

पाकिस्तान में हिंदुओं का हो रहा जबरन धर्...
पाकिस्तान में हिंदुओं का हो रहा जबरन धर्मातरण

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में हिंदू समुदाय जबरन धर्मातरण की समस्या का सामना कर रहे हैं। यह मुद्दा कराची प्रेस क्लब में 'पाकिस्तान में हिंदू-मुद्दे और समाधान' विषय पर आयोजित एक सेमिनार में उभर कर सामने आया। सेमिनार में [...]

नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण पूर्ववर्ती अन्...
नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण पूर्ववर्ती अन्‍य प्रधानमंत्रियों से कोसों आगे है!

संदीप देव। मैंने अपने होश में जितने भी प्रधानमंत्री देखे हैं, उसमें नरेंद्र मोदी का विजन उन सभी से कोसों आगे दिखता है। अपने शपथ ग्रहण समारोह में दक्षेस देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों को बुलाकर नरेंद्र मोदी ने एक ही [...]

Aurangzeb‬ द्वारा काशी विश्‍वनाथ मंदिर त...
Aurangzeb‬ द्वारा काशी विश्‍वनाथ मंदिर तोड़े जाने को सबसे पहले सही एक कांग्रेसी नेता ने ही ठहराया था, जिसके बाद झूठ प्रचलित हुआ!

दीपदेव‬।औरंगजेब द्वारा काशी विश्‍वनाथ मंदिर तोड़े जाने को सही ठहराने की शुरुआत महात्‍मा गांधी के बेहद खास कांग्रेसी पटटाभिसीतारमैया ने एक पुस्‍तक 'द फ़ेदर्स एण्ड द स्टोन्स’ लिखकर की थी। यह वही पटटाभि थे, [...]

दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!...
दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!

आधी आबादी ब्‍यूरो, नई दिल्ली। जंगल बनता जा रहा है। बच्चों के लिए खेलने के लिए जगह नहीं बची है। पार्क भी धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। अभिभावकों की [...]

नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदे...
नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश

दिल्‍ली।  कमल इंसटिट्यूट ऑफ हायर एडूकेशन के छात्र और छात्राओ ने 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ ' अभियान पर नुक्कड नाटक का आयोजन किया। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र [...]

असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के ब...
असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के बीच रहती हूं, लेकिन मैंने कभी भारत में भेदभाव महसूस नहीं किया!

सोफिया रंगवाला। पेशे से डॉक्टर हूं। बंगलोर में मेरी एक हाइ एण्ड लेजर स्किन क्लिनिक है। मेरा परिवार कुवैत में रहता है। मैं भी कुवैत में पली बढ़ी हूं लेकिन 18 साल [...]

प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम कर...
प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम करे, सूचना प्रसारण मंत्री को तो क्रिकेट डिप्‍लोमेसी से ही फुर्सत नहीं है!

संदीप देव।उटलुक पत्रिका के एक गलत खबर के कारण जो हंगामा हुआ और सदन को स्‍थगित करना पड़ा, इसका जिम्‍मेवार कौन है? क्‍या मोदी सरकार मीडिया के इस तरह के गैरजिम्‍मेवार और सबूत [...]

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