आप उन्‍हें क्‍या कहेंगे, प्रबंधक, इंजीनियर, लेखक, अनुसंधानकर्ता या फिर आयुर्वेदाचार्य...!

आचार्य बालकृष्‍ण जी के जन्‍मदिन पर विशेष। संदीप देव, पतंजलि योगपीठ से लौट कर। पतंजलि योगपीठ के भवनों को गौर से देखिए, वो आपको किसी योगी के योगमुद्रा में बैठे होने का अहसास कराता हुआ-सा प्रतीत होता है! इसके बाहरी आंतरिक सज्‍जा और वास्‍तु में आधुनिकता और आध्‍यात्मिकता का गहरा समावेश नजर आता है। ऐसा लगता है जैसे किसी व्‍यावसायिक आर्किटेक्‍चर ने इसे डिजाइन किया है, जो गहरी आध्‍यात्मिक में भी डूबा रहा है! 'पतंजलि योगपीठ' में रुकने के दौरान मैंने अपनी इस जिज्ञासा को वहां के कुछ मित्रों से पूछ कर शांत करना चाहा, लेकिन उसने जो बताया वह बेहद आश्‍चर्यजनक था!
पतंजलि योगपीठ, योगग्राम, पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क, आचार्यकुलम, वैदिक गुरुकुलम, पतंजलि विश्‍वविद्यालय, दिव्‍य फार्मेसी, पतंजलि आयुर्वेद आदि के शिल्‍पी और रचनाकार स्‍वामी रामदेव के बालसखा आचार्य बालकृष्‍ण जी है! और ताज्‍जुब देखिए, गुरुकुल से पढ़े आचार्य बालकृष्‍ण ने कभी इंजीनियरिंग, आर्किटेक्‍चर या प्रबंधन की पढ़ाई नहीं की है!

 

मेरी उत्‍सुकता और बढ़ी! मैं स्‍वामी रामदेव जी के मुंह से यह तो सुन चुका था कि पतंजलि को खड़ा करने में बालकृष्‍ण जी का अप्रतिम योगदान है। और यह भी कि भारत स्‍वाभिमान आंदोलन से बौखलाई पूर्व की यूपीए सरकार ने जब पतंजलि से जुड़े सभी संस्‍थानों को मिटाने का प्रयास किया एवं बालकृष्‍ण जी को जेल में डाला तो जेल में रहते हुए भी बालकृष्‍ण जी ने न केवल कानूनी लड़ाई लड़ी और पतंजलि को बचाया, बल्कि सरकार को घुटने भी टिकवा दिए। पतंजलि से जुड़े सभी संस्‍थानों का प्रबंधन आचार्य बालकृष्‍ण जी देखते हैं। आप यह समझ लीजिए कि बाबा रामदेव की योजनाओं को साकार आचार्य बालकृष्‍ण जी ही कर रहे हैं!
बालकृष्‍ण जी हैं क्‍या, मैं समझ नहीं पा रहा था? उनसे पहले मिला भी नहीं था। एक दिन मेरे प्रिय मित्र एवं पतंजलि योग समिति एवं भारत स्‍वाभिमान न्‍यास के मुख्‍य केंद्रीय प्रभारी राकेश मित्‍तल जी ने मुझसे कहा कि चलो, आपको आचार्य जी से मिलवा लाऊं। मैं उनसे मिलने गया और मैंने उन्‍हें अपनी पुस्‍तक '' निशाने पर नरेंद्र मोदी: साजिश की कहानी-तथ्‍यों की जुबानी'' भेंट की।

वह मुझसे बात भी करते रहे और पुस्‍तक के पन्‍ने भी उलटते-पलटते रहे। कुछ देर बाद कहा, ''मैंने तुम्‍हारी पुस्‍तक पूरी पढ़ ली। पूछो, अपनी पुस्‍तक के किसी भी पृष्‍ठ से कुछ भी पूछो, मैं तुम्‍हें जवाब दूंगा।'' मैं आश्‍चर्य चकित, क्‍या मैं कालिदास से मिल रहा हूं या फिर 'कृष' फिल्‍म के रोहित मेहरा से...? मुझे सोच में डूबा देखकर उन्‍होंने बिना पूछे ही, पुस्‍तक के कई अंशों को अक्षरश: बता डाला...! आश्‍चर्य के कारण मेरी आंखें और मेरा मुंह दोनों ही खुले रह गए!  

आचार्य बालकृष्‍ण जी के बारे में मेरी उत्‍सुकता अब तो और ज्‍यादा बढ़ गई। मैंने थोड़ी पूछताछ, थोड़ी खोजबीन की। उनके द्वारा लिखित कई पुस्‍तकें मेरे हाथ लगीं। तीन खंडों में 'आयुर्वेद जड़ी-बूटी रहस्‍य' को देखकर तो मैं चकरा गया। आयुर्वेदिक पेड़-पौधों पर इससे बड़ी पुस्‍तक मैंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखी थी, हालांकि आयुर्वेद के प्रति मेरी जिज्ञासा है और इस पर कई पुस्‍तकें पहले से ही मेरे पास हैं।

'आयुर्वेद जड़ी-बूटी रहस्‍य' में करीब 550 पेड़-पौधों का औषधीय व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विस्‍तृत विवेचन किया गया है। जहां तक मेरी जानकारी है, आयुर्वेद के जनक और हमारे वैदिक ऋषि महर्षि चरक, सुश्रुत एवं धनवंतरि जी ने करीब 600 से 800 पौधों एवं जड़ी-बूटी की खोज की थी। आचार्य बालकृष्‍ण उन्‍हीं ऋषियों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 'आयुर्वेद जड़ी-बूटी रहस्‍य' के बाद ' विश्‍व भेषज जड़ी-बूटी कोष' की रचना में जुटे हुए हैं, जिसमें दुनिया के हर औषधीय पेड़-पौधे, जड़ी-बूटी का विवरण आयुर्वेदीय और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्‍तुत किया जाएगा। इसके अलावा आचार्य बालकृष्‍ण 'विश्‍व भेषज संहिता' पर भी काम कर रहे हैं। मुझे यह भी पता चला कि बालकृष्‍ण जी के मार्गदर्शन में योग एवं आयुर्वेद के 41 शोध पत्र विभिन्‍न भारतीय एवं अंतरराष्‍ट्रीय जर्नल्‍स एवं पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

यह जानना और भी आश्‍चर्यजनक था कि उनके द्वारा रचित 'औषध दर्शन' पुस्‍तक का प्रसार 60 लाख से अधिक हो चुका है। पूरी दुनिया में 25-30 हजार की प्रसार संख्‍या वाली पुस्‍तक पर लेखक और प्रकाशक 'बेस्‍ट सेलर' का टैग लगाकर उसकी मार्केटिंग करते हैं, और यहां 'औषध दर्शन' की 60 लाख से अधिक प्रति निकल चुकी है, लेकिन कहीं कोई शोर-शराबा नहीं है। मुझे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह बात स्‍मरण हो आई, जिसमें उन्‍होंने कहा था कि 'गिनीज वर्ल्‍ड ऑफ रिकॉर्ड्स' वालों को यहां आकर देखना चाहिए कि किस प्रकार बाबा रामदेव ने प्रत्‍यक्ष रूप से करोड़ों लोगों से सीधे संवाद स्‍थापित किया है। मुझे लगता है, आचार्य बालकृष्‍ण जी का आयुर्वेद के पुरुत्‍थान के लिए किया जा रहा कार्य भी 'गिनीज वर्ल्‍ड ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज होने जैसा ही है!

आयुर्वेद व योग की वैदकि परंपरा को अक्षुण्‍ण बनाए रखने के लिए बाबा रामदेव और बालकृष्‍ण जी की यह जोड़ी जिस तरह से रात-दिन जुटी हुई है वह अकल्‍पनीय-सा प्रतीत होता है। आप देखिए न, देश में न जाने कितने स्‍वदेशी आंदोलन और स्‍वदेशी जागरूकता मंच का गठन हुआ और थोड़े दिनों बाद ही वह सभी फेल भी हो गए, लेकिन इस जोड़ी ने 'पतंजलि उत्‍पाद' के रूप में विकल्‍प उपलब्‍ध करा कर स्‍वदेशी को विचार से धरातल पर उतार दिया! विदेशी कंपनियों से लड़ने के लिए जब तक स्‍वदेशी रूपी विकल्‍प नहीं था, तब तक विदेशी कंपनियों का वर्चस्‍व भारतीय बाजार में बना हुआ था। अब उसे एक स्‍वदेशी कंपनी 'पतंजलि' से मुकाबला करना पड़ रहा है और ऐसा इसलिए संभव हो सका, क्‍योंकि भारतीय जनता के समक्ष स्‍वदेशी का मजबूत विकल्‍प बाबा रामदेव-बालकृष्‍ण जी की जोड़ी ने उपलब्‍ध करा दिया है।

आचार्य बालकृष्‍ण जी कहते हैं, ''मैं तो पूज्‍य स्‍वामी रामदेव जी के सपनों और संकल्‍पों को केवल मूर्त रूप देने की कोशिश कर रहा हूं।'' वास्‍तव में, केवल विचारों में जीने वाला समाज कब का मर जाता है, समाज तो वही गतिशील रहता है जहां अमूर्त विचार मूर्त रूप ले लेते हैं। आचार्य बालकृष्‍ण पारंपरिक योग-आयुर्वेद-स्‍वदेशी के अमूर्त होते जा रहे विचारों को आधुनिक समाज में मूर्त रूप देते जा रहे हैं!

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