ओशो वाणी

अपने शरीर को जानो, क्‍योंकि शरीर प्राचीन है: ओशो

ओशो। शरीर को भलीभांति काम करना चाहिए, अच्छी तरह से। यह एक कला है, यह तप नहीं है। तुम्हें उसके साथ लड़ना नहीं है, तुम्हें उसे केवल समझना है। शरीर इतना बुद्धिमान है ... तुम्हारे मस्तिष्क से बुद्धिमान, ध्यान रहे, क्योंकि शरीर मस्तिष्क से ज्यादा समय जीया है। मस्तिष्क बिल्कुल नया आया है, महज एक बच्चा है।

Read more...

Sex can become the bridge between you and the ultimate: OSHO

OSHO. "Sex can become the bridge between you and the ultimate. What is sex? It is just a meeting of two deep energies. What is sex'? Just two persons meeting at the maximum point -- not only holding hands, not only hugging each other's bodies, but penetrating into each other's energy realm. Why should you hate sex?

Read more...

मैं किसी तरह की स्तुति में भरोसा नहीं करता: ओशो

ओशो। तुम मेरी प्रंशसा मत करो। तुम मेरी प्रशंसा से कुछ भी नहीं पा सकते हो। मुझे धोखा देना असंभव है। मैं किसी तरह की स्तुति में भरोसा नहीं करता। तुम जैसे हो, मुझे स्वीकार हो। मगर यह ‘खोटे’ वगैरह होने का अहंकार मत घोषित करो। ये तरकीबें नहीं। खोटे हो, तो ठीक। क्या हर्जा? कौन खोटा नहीं है? मगर खोटे की घोषणा करके तुम इस भ्रांति में न पड़ो कि तुम दूसरो से विशिष्ट हुए जा रहे हो। वही मोह भीतर छिपा है।

Read more...

ज्योतिष पर ओशो के विचार

ओशो। ज्योतिष के नाम पर सौ में से निन्यानबे धोखाधड़ी है। और वह जो सौवां आदमी है, निन्यानबे को छोड़ कर उसे समझना बहुत मुश्किल है। क्योंकि वह कभी इतना डागमेटिक नहीं हो सकता कि कह दे कि ऐसा होगा ही। क्योंकि वह जानता है कि ज्योतिष बहुत बड़ी घटना है। इतनी बड़ी घटना है कि आदमी बहुत झिझक कर ही वहां पैर रख सकता है। जब मैं ज्योतिष के संबंध में कुछ कह रहा हूं तो मेरा प्रयोजन है कि मैं उस पूरे-पूरे विज्ञान को आपको बहुत तरफ से उसके दर्शन करा दूं उस महल के। मैं इस बात की चर्चा कर रहा हूं कि कुछ आपके जीवन में अनिवार्य है। और वह अनिवार्य आपके जीवन में और जगत के जीवन में संयुक्त और लयबद्ध है, अलग-अलग नहीं है। उसमें पूरा जगत भागीदार है। उसमें आप अकेले नहीं हैं।

 

Read more...

पाइथागोरस, ईसा मसीह और मूसा, सभी ने भारत से लिया है ज्ञान: ओशो

ओशो। जब भी कोई सत्‍य के लिए प्‍यासा होता है, अनायास ही वह भारत में उत्‍सुक हो उठता है। अचानक पूरब की यात्रा पर निकल पड़ता है। और यह केवल आज की ही बात नहीं है। यह उतनी ही प्राचीन बात है, जितने पुराने प्रमाण और उल्‍लेख मौजूद हैं। आज से 2500 वर्ष पूर्व, सत्‍य की खोज में पाइथागोरस भारत आया था। ईसा मसीह भी भारत आए थे।

Read more...

भेदभाव से बचने के लिए अपना धर्म छोड़ने व...
भेदभाव से बचने के लिए अपना धर्म छोड़ने वाले हिंदू आज भी मुस्लिम और ईसाई समाज में हैं दोयम दर्ज के नागरिक!

संदीप देव।रक्षण की वकालत करने वाले हिंदू समाज के दलितों को भरमाने के लिए 'दलित-मुस्लिम' भाई-भाई का नारा लगाते हैं। Narendra Mo [...]

हिंदू हैं तो आदि गुरु शंकराचार्य के रास्...

संदीप देव।नवर है, जैसे कि घोड़ा एक जानवर है. तो फिर उसे गोमाता कैसे कहा जा सकता है.?" जस्टिस मार्केंडेय काटजू साहब पूछ रहे हैं। और वह यह भी पूछ [...]

धर्म नहीं, राष्‍ट्र है व्‍यक्ति की सही प...
धर्म नहीं, राष्‍ट्र है व्‍यक्ति की सही पहचान!

संदीप देव।ं (सिर्फ कटटर लिख रहा हूं, इसलिए उदार मुस्लिम इससे खुद को न जोडें) से कहना चाहता हूं कि जहां से इस्‍लाम निकला था, वह देश ही जब धर्म से अधिक राष्‍ट्र [...]

संघ के बिना अमित, क्‍या बन पाएंगे भाजपा ...
संघ के बिना अमित, क्‍या बन पाएंगे भाजपा के असली 'शाह'!

संदीप देव, नई दिल्‍ली बंटे उत्‍तरप्रदेश के 'कुरुक्षेत्र' को पूर्ण रूप से जीतने के बाद अमित शाह भाजपा के नए 'शाह' बन गए हैं, जिसका ईनाम उन्‍हें [...]

सेक्स के दौरान कुछ नया और रोमांचक किया ज...
सेक्स के दौरान कुछ नया और रोमांचक किया जाना महिलाओं को खूब भाता है!

सेक्‍स संबंध बनाते वक्‍त महिलाएं किसी पुरुष से क्‍या चाहती हैं, यह हमेशा से ही शोध का विषय रहा है. इस पर पहले भी काफी कुछ लिखा जा चुका है. इसी मुद्दे पर ताजातरीन रिसर्च के नतीजे [...]

आज पुरुष हर महिला को केवल मादा की नजर से...
आज पुरुष हर महिला को केवल मादा की नजर से देखना चाहता है!

संदीप देव। बदायूं के नृशंस बलात्‍कार कांड से शर्मसार मानवता ने अपना सिर उठाया भी नहीं था कि 1) घुमाने के बहाने वैष्णो देवी धाम ले जाकर रेप 2) पति ने पत्नी को किया दरिंदों के [...]

अनुयायी नहीं, आलोचक बनें क्‍योंकि तटस्‍थ...

संदीप देव।डिया के मित्रों से अनुरोध है कि आप किसी के कार्यकर्ता/ अनुयायी की तरह बर्ताव न करें, बल्कि स्‍वतंत्र विचार रखें, जिसमें तथ्‍य भी हों और तर्क भी। मैं जो भी बात [...]

कविता : नारी तुम हो सबकी आशा !...
कविता : नारी तुम हो सबकी आशा !

किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?

दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!...
दिल्‍ली में सुरक्षित नहीं है बचपन!

आधी आबादी ब्‍यूरो, नई दिल्ली। जंगल बनता जा रहा है। बच्चों के लिए खेलने के लिए जगह नहीं बची है। पार्क भी धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं। अभिभावकों की [...]

नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदे...
नुक्‍कड़ नाटक के जरिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश

दिल्‍ली।  कमल इंसटिट्यूट ऑफ हायर एडूकेशन के छात्र और छात्राओ ने 'बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ ' अभियान पर नुक्कड नाटक का आयोजन किया। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र [...]

असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के ब...
असहिष्णुता: मैं एक मुस्लिम महिला हूं, हिंदुओं के बीच रहती हूं, लेकिन मैंने कभी भारत में भेदभाव महसूस नहीं किया!

सोफिया रंगवाला। पेशे से डॉक्टर हूं। बंगलोर में मेरी एक हाइ एण्ड लेजर स्किन क्लिनिक है। मेरा परिवार कुवैत में रहता है। मैं भी कुवैत में पली बढ़ी हूं लेकिन 18 साल [...]

प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम कर...
प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को मीडिया भले ही बदनाम करे, सूचना प्रसारण मंत्री को तो क्रिकेट डिप्‍लोमेसी से ही फुर्सत नहीं है!

संदीप देव।उटलुक पत्रिका के एक गलत खबर के कारण जो हंगामा हुआ और सदन को स्‍थगित करना पड़ा, इसका जिम्‍मेवार कौन है? क्‍या मोदी सरकार मीडिया के इस तरह के गैरजिम्‍मेवार और सबूत [...]

Other Articles