सीआईएसएफ के अंदर महिला यौन उत्‍पीड़न के 50 फीसदी मामले झूठे

नई दिल्‍ली। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (Central Industrial Security Force-cisf) वर्ष 2013 को महिला सुरक्षा वर्ष के रूप में मना रहा है। सीआईएसएफ के कुल 1 लाख 34 हजार जवानों में करीब 5000 महिला जवान हैं। सीआईएसएफ के महानिदेशक श्री राजीव का कहना है कि अभी यह संख्‍या बेहद छोटी है, लेकिन अन्‍य सुरक्षा बलों की अपेक्षा हमारे यहां महिलाओं की संख्‍या फिर भी अधिक है। हमारा लक्ष्‍य महिला सुरक्षाकर्मियों की संख्‍या को 10 फीसदी तक बढ़ाना है।

मेट्रो से लेकर एयरपोर्ट तक पर तैनात हैं महिला सुरक्षाकर्मी
श्री राजीव के अनुसार, सीआईएसएफ की अधिकांश महिला सुरक्षाकर्मी ऑपरेशनल एरिया में तैनात हैं। दिल्‍ली मेट्रो से लेकर देश भर के एयरपोर्ट पर महिला यात्रियों की जांच, उनसे सहयोग में हमारे बल के महिलाकर्मी ही लगे हुए हैं। यही नहीं, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में भी महिला सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। सीआईएसएफ ने दिल्‍ली मेट्रो के महिला कोच से पुरुष यात्रियों को निकालने के लिए विशेष अभियान चलाया हुआ है, जिसमें 15 हजार से अधिक पुरुषों को अभी तक पकड़ा और उन पर जुर्माना लगाया गया है। सीआईएसएफ महिला क्‍यूआरटी की भी महत्‍वपूर्ण स्‍थानों पर तैनाती की गई है।

सीआईएसएफ में भी सामने आते हैं यौन उत्‍पीड़न के मामले
सीआईएसएफ के अंदर महिलाओं के साथ यौन उड़ीपन पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में श्री राजीव ने कहा कि हां यह सच है कि सीआईएसएफ के अंदर महिला यौन उत्‍पीड़न (sexual harassment) के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन करीब 50 फीसदी तक मामले झूठे पाए गए हैं। अभी तक ऐसे 19 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें केवल पांच मामले ही सही साबित हुए हैं। नौ मामले बिल्‍कुल फर्जी पाए गए हैं। अन्‍य में जांच जारी है। यौन उत्‍पीड़न के सही पाए गए मामलों में तीन माह के अंदर दोषियों पर कार्रवाई की गई है।

लिंग भेद समाप्‍त करने के लिए विशेष प्रशिक्षण
सुरक्षा बल में पुरुष जवानों, कर्मचारियों और अधिकारियों को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने(gender sensitization) के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अभी तक 770 जवानों को इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगे हर बैच में 100-125 जवानों को लिंग भेद समाप्‍त करने, लिंग जनित हिंसा से दूर रहने और महिला सहकर्मियों व यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता व दोस्‍ताना व्‍यवहार बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। महिला सुरक्षाकर्मियों को भी महिला यात्रियों से दोस्‍ताना व्‍यवहार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है।