राजदीप सरदेसाई पत्रकार नहीं, विशुद्ध कांग्रेसी दलाल है!

संदीप देव। अमेरिका में जाकर राजदीप सरदेसाई ने भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिस तरह से अपमानित करने का प्रयास किया है, वह साफ तौर पर देशद्रोह की श्रेणी में आता है! यही नहीं, अमेरिका में बसे एक एनआरआई से पहले गाली-गलौच और बाद में हाथापाई करना, पूरे देश का अपमान है! अमेरिका के लोग क्‍या सोच रहे होंगे कि भारत का पत्रकार किस हद तक गिरा हुआ होता है! एक भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक पर एक भारतीय पत्रकार द्वारा हमले के कारण भारत की छवि ही खराब हुई है! नरेंद्र मोदी विरोध में पिछले 12 साल से पागल हुए जा रहे राजदीप की तो कोई गरिमा नहीं ही है, उसने देश की गरिमा का भी ख्‍याल नहीं रखा, वह भी तब जब हमारे प्रधानमंत्री वहां मौजूद हों! आप सभी यह तो जानते हैं कि राजदीप सरदेसाई ने शुरू से Narendra Modi का विरोध किया है, लेकिन आप लोगों के समक्ष मैं अपनी पुस्‍तक '' निशाने पर नरेंद्र मोदी: साजिश की कहानी-तथ्‍यों की जुबानी'' से वह चैप्‍टर सामने रखता हूं, जिसमें राजदीप का घिनौना चेहरा आपके सामने आ जाएगा। और हां, आपको यह भी तो याद होगा कि कांग्रेस नेतृत्‍व वाली यूपीए-एक को बचाने के लिए संसद के 'कैश फॉर वोट' कांड की सीडी भी इसी राजदीप सरदेसाई ने छुपाई थी। उस वक्‍त चर्चा थी कि राजदीप सरदेसाई की तत्‍कालीन सीएनएन-आईबीएन टीम ने सांसदों को खरीदे जाने का जो स्टिंग किया था, उसमें सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल और अमर सिंह उन्‍हें बिकने का ऑफर देते हुए साफ दिख रहे थे। यही कारण है राजदीप ने पहले उस स्टिंग को चैनल पर दिखाने की बात कह कर उसे नहीं दिखाया। जानकारों ने इसे राजदीप सरदेसाई और कांग्रेस के बीच हुई 'डील' का नतीजा करार दिया था!

राजदीप सरदेसाई व सागरिका घोष: दोनों पति-पत्‍नी न केवल मिलकर नरेंद्र मोदी के प्रति नफरत प्रदर्शित करते रहे हैं, बल्कि अपनी रिपोर्टिंग के जरिए कांग्रेस के लिए लॉबिंग भी करते रहे हैं

 

गुजरात में नरेंद्र मोदी को फंसाने के लिए तीस्‍ता सीतलवाड़ के साथ मिलकर राजदीप ने गढ़ा था सबूत!

रईस खान पठान Teesta Setalvad के साथ उनके एनजीओ सीजेपी में काम करता था। रईस खान को पुलिस ने गुजरात दंगा में मारे गए मुसलमानों के शवों को कब्र खोदकर निकालने और सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। रईस के पुलिस व अदालत में दर्ज बयान के मुताबिक, ''उसे लूनावाड़ा में कब्र खोदकर शवों को निकालने का आदेश तीस्ता ने दिया था। तीस्ता ने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस प्रशासन और दफनाए गए लोगों के परिवारवालों को भी देने से मना कर दिया था। रईस खान की गिरफ्तारी के बाद तीस्ता सीतलवाड़ पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी थी, जिससे घबराकर उसने लूनावाड़ा नरकंकाल मामले में गोधरा की फास्ट ट्रैक कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी भी लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आफताब आलम ने तीस्ता को सबूतों से छेड़छाड़ के इस आपराधिक मामले से बचाया था, जिसकी वजह से उनके निर्णय पर कई तरह के सवाल भी उठे थे! रईस खान पठान के मुताबिक तीस्ता के ही इशारे पर पंचमहाल जिले के लूनावाड़ा में पानम नदी के किनारे दफनाए गए शवों को निकाला गया था। बाद में इन शवों का डीएनए टेस्ट कराया गया, जिसमें करीब आधा दर्जन लोगों की पहचान स्थानीय नागरिकों के रूप में हुई थी।

Rajdeep Sardesai जैसे पत्रकारों का दोगला चरित्र देखिए! बिना किसी सबूत के नरेंद्र मोदी को हत्यारा कहती आ रही इलेक्ट्रोनिक मीडिया और राजदीप जैसे पत्रकार मोदी सरकार को फंसाने के लिए सबूत गढ़ने में तीस्ता सीतलवाड़ का साथ दे रहे थेा पुलिस, प्रशासन और दंगे में मारे गए लोगों के परिजनों को जानकारी दिए बिना तीस्ता ने अवैध तरीके से कब्रों की खुदाई करवाई थी। उस वक्त कब्रिस्तान में मौजूद रहकर इस गैरकानूनी काम में तीस्ता की मदद भारत का मीडिया कर रहा था! इस गैरकानूनी कार्य का खुलासा करने की जगह मीडिया एक साजिशकर्ता की तरह इस अवैध कार्य में तीस्ता के सहयोगी की भूमिका में था!

लूनावाड़ा के पुलिस उपनिरीक्षक के समक्ष लगाए गए शपथ पत्र के अनुसार, Headlines Today का वरिष्ठ पत्रकार राहुल सिंह मौके पर मौजूद था। अपने शपथ पत्र में उसने कहा है कि कब्र की खुदाई उसके सामने हुई थी। उस वक्त वह वहां था, लेकिन उसे नहीं पता था कि कब्र की खुदाई अवैध तरीके से की जा रही है! राहुल सिंह ने एक और खुलासा किया। उसके मुताबिक जिस वक्त कब्र की खुदाई चल रही थी उस वक्त तीस्ता सीएनएन-आईबीएन के मुख्य संपादक राजदीप सरदेसाई से लगातार फोन पर जुड़ी हुई थी। दोनों सूचनाओं का आदान-प्रदान कर रहे थे। तीस्ता अपनी हर सूचना राजदीप सरदेसाई से साझा करती थी। गैरकानूनी रूप से कब्र खोदने की पूरी जानकारी तीस्‍ता-रजदीप के बीच फोन पर चल रहा था।

राजदीप सरदेसाई ने गुजरात दंगों की रिपोर्टिंग में ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ द्वारा तय मानकों को ताक पर रख कर गुजरात दंगे की लपटों को हवा दी थी। गुजरात दंगे के समय राजदीप सरदेसाई ने हिंदू-मुस्लिम समुदाय की पहचान करते हुए रिपोर्टिंग की थी, जिसकी वजह से गुजरात के गांवों तक दंगा भड़क गया था। राजदीप सरदेसाई और NDTV बरखा दत्त ने लाइव व ग्राफिक्स रिपोर्टिंग के जरिए गुजरात दंगे को बढ़ाने का काम किया था। लेकिन जब तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ सबूतों से छेड़छाड़ या फेरा उल्लंघन का मामला सामने आया तो इनके कैमरे बंद पड़े रहे!

दंगे के दौरान पत्रकार राजदीप सरदेसाई व बरखा दत्त की रिपोर्टिंग ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा तय सभी मानकों को ध्वस्त कर दिया और अपनी रिपोर्ट में लगातार दंगाईयों व पीडि़तों की धार्मिक पहचान उजागर करते रहे, जिससे दंगा और भड़का। राजदीप व बरखा दत्त की इस रिपोर्टिंग के लिए कांग्रेस की केंद्र सरकार ने उन्हें वर्ष 2008 में पद्म पुरस्कार से नवाजा था।
यही नहीं, राजदीप सरदेसाई को तो गुजरात दंगे को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने के लिए विशेष तौर पर ‘इंटरनेशनल ब्रॉडकास्टर्स अवार्ड’ और वर्ष 2003 में उर्दू प्रेस क्लब द्वारा ‘जसरत’ पुरस्कार मिल चुका है। जबकि टुडे ग्रुप के पत्रकार राहुल सिहं के शपथ पत्र से यह साबित हो जाता है कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ तीस्ता सीतलवाड़ की साजिशों में राजदीप सरदेसाई एक मार्गदर्शक व साझीदार की भूमिका में रहे हैं।

एनडीटीवी ने तो गुजरात दंगे की एक तरफा रिपोर्टिंग में पत्रकारिता की सारी लक्ष्मण रेखाओं को पार किया है। बरखा दत्त ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा निर्देशों का साफ तौर पर उल्लंघन करते हुए 2002 के दंगे में हमलावरों को ‘हिंदू’ और पीडि़तों को ‘मुसलमान’ बताते हुए लगातार रिपोर्टिंग की और दंगा भड़काने का काम किया। वर्ष 2012 में लेखक यासिर हुसैन ने अपनी पुस्तक ‘करप्शन फ्री इंडिया’ में लिखा है कि बरखा दत्त हमेशा से Sonia Gandhi के पक्ष में पत्रकारिता करती रही हैं।

वीडियो से स्‍पष्‍ट है कि राजदीप ने गाली-गलौच और मारपीट की शुरुआत की
अमेरिका के मैडिसन स्‍क्‍वायर के बाहर हुई घटना के वीडियो से स्‍पष्‍ट है कि राजदीप सरदेसाई ने ही लड़ाई की शुरुआत की थी। मोदी विरोध में अपनी पूरी जिंदगी लगाने वाला राजदीप अमेरिका में शायद प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता को पचा नहीं पा रहा था और गनमाइक और जुबान की जगह हाथ का प्रयोग करने लगा। यह वीडियो दर्शाता है कि जब आप मानसिक विचलन के शिकार हों तो ऐसी ही ओछी हरकत पर उतर आते हैं। गाली-गलौच और हाथापाई की भाषा कम से कम खुद को अंग्रेजी पत्रकारिता का तोप समझने वाले पत्रकार की भाषा तो नहीं ही है। वास्‍तव में राजदीप जैसे पत्रकार 16 मई के बाद से ही कुंठा में जी रहे हैं और जब चिल्‍ला-चिल्‍ला कर भी कुंठा से मुक्ति नहीं मिल पा रही हो तो हाथ और सीधे राजनीति में कूदने का इस्‍तेमाल करने लगे हैं। राजदीप के चेले आशुतोष व अब आम आदमी पार्टी के नेता को भी लोग भाजपा कार्यालय की दीवार पर बंदर की तरह उछल कूद करते और हाथापाई करते देख चुके हैं। आशुतोष-राजदीप जैसे लोग गिरती हुई पत्रकारिता का प्रत्‍यक्ष उदाहरण हैं। राजदीप सरदेसाई की गंदगी दर्शाता वीडियो लिंक: https://www.youtube.com/watch?v=lF-hXNojV1w&feature=youtu.be

मोदी का विरोधी मीडिया आज भी छिछोरी हरकत कर रहा है
यूपीए सरकार में कोयले की दलाली करने और चार कोयला ब्‍लॉक अपनी कंपनी डीबी एनर्जी के नाम करवाने वाले दैनिक भास्‍कर समूह ने संयुकत राष्‍ट्र संघ में Narendra Modi के भाषण की बेवजह की आलोचना करने की कोशिश की थी और अब PMO India के मैडिसन स्‍कैवर में दिए भाषण की आलोचना भी वह केवल अपनी खीज मिटाने के लिए कर रहा है। जब दुनिया मोदी को वर्ल्‍ड लीडर के तौर पर देख रही हो तो दैनिक भास्‍कर समूह मोदी के उच्‍चारण में किसी दोष को निकाल कर आलोचना शुरू कर देता है। वास्‍वत में इन लोगों ने एनडीए सरकार से पैरवी की थी कि वह सुप्रीम कोर्ट में कोयला आवंटन रदद न करने की याचिका दायर करे, लेकिन जब मोदी सरकार ने साफ तौर पर इसमें किसी भी तरह के हस्‍तक्षेप से मना कर दिया तो इस तरह के घटियापन पर उतर आया है। देखिए दैनिक भास्‍कर के आज का घटियापन: http://www.bhaskar.com/news-ht/NAT-latest-news-in-hindi-pm-modis-speech-at-madison-square-garden-4760300-NOR.html

राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार आज यदि विदेश में मार खा रहे हैं तो केवल इस वजह से कि उन्‍होंने कभी तथ्‍यगत रिपोर्टिंग नहीं की, बल्कि ऐसे ही पूर्वग्रह से ग्रस्‍त होकर रिपोर्टिंग और एंकरिंग की है। पत्रकार के पिटने को कहीं से भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है। यही होगा तो वह जनता के बीच जाकर रिपोर्ट करना ही छोड़ देगा। लेकिन आखिर कुछ खास ग्रुप और कुछ खास पत्रकार ही पिछले 10 साल से क्‍यों बार-बार पूर्वग्रह ग्रस्‍त होकर रिपोर्टिंग, एंकरिंग व लेखन कर रहे हैं और फिर जनता की लानत झेल रहे हैं। इस पर विचार करेंगे तो अपने आप जवाब मिल जाएगा। याद रखिए यह वही राजदीप सरदेसाई हैं, जिन्‍होंने 'कैश फॉर वोट' कांड में कांग्रेस सरकार को बचाने के लिए स्टिंग की सीडी को दबाया था।

आप लोगों ने कभी सोचा?
अखबार का कटिंग लेकर Arvind Kejriwal केवल भ्रष्‍टाचार-भ्रष्‍टाचार चिल्‍लाता था और इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया उसके लिए बिस्‍तर की तरह 24 घंटे बिछी नजर आती थी। यहां एक Dr. Subramanian Swamy हैं! तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री को भ्रष्‍टाचार के मामले में ही चार साल की सजा दिलवा दी है, लेकिन मीडिया में कहीं भी स्‍वामी की उस तरह से चर्चा नहीं है। मीडिया में केवल मार्क्‍स की औलाद और शहरी माओवादी तबका ही चकल्‍लस तय करता है। मीडिया को चलाने वालों की सबूतों के आधार पर पोल खोलने की आज बहुत आवश्‍यकता है। Rajdeep Sardesai जैसों ने जिस तरह से जमीर बेचकर पैसा कमाया है, उससे पत्रकारिता शुद्ध रूप से दलाली नजर आती है। ‪#‎ArrestRajdeep

नोट: '' निशाने पर नरेंद्र मोदी: साजिश की कहानी-तथ्‍यों की जुबानी'' आप अमेजॉन से इस लिंक पर क्लिक कर खरीद सकते हैं: http://www.amazon.in/Narendra-Modi-target-story-Commendation/dp/8192901602/ref=sr_1_45?s=books&ie=UTF8&qid=1411735272&sr=1-45&keywords=modi+book


Web title: How Rajdeep Sardesai provoked crowd, attacked NRI and played victim game in New York

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