तीर्थ यात्रा

अब आप सीधे अपनी गाड़ी से जा सकेंगे कैलाश मानसरोवर!

कैलाश मानसरोवर की तीर्थयात्रा करने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बड़ा तोहफा दिया है. चीन इस यात्रा के लिए सिक्किम के नाथुला दर्रे से नया रास्ता खोलने पर सहमत हो गया है. इससे अब कार से भी कैलाश मानसरोवर यात्रा करना संभव हो गया है.

Read more...

जहां जगह-जगह बिखरे हैं रावण की मौजूदगी के निशान

संदीप देव, देवघर से लौटकर। भगवान शिव के 12 ज्‍योर्तिलिंग में से एक देवघर के वैद्यनाथ धाम में जगह-जगह लंकाधिपति रावण की मौजूदगी के निशान बिखरे हुए मिल जाते हैं। तभी तो यहां भगवान भोलेनाथ का एक नाम रावणेश्‍वर महादेव भी है। यहां रावण एक राक्षस से अधिक शिव भक्‍त के रूप में मौजूद हैं। उनके तपस्‍या स्‍थल से लेकर उनका हेलीपैड तक सबकी मौजूदगी दर्शनीय है, बस उसे देखने की दृष्टि आपको‍ विकसित करनी है। आप संदेह से इसकी शुरुआत कर सकते हैं....लेकिन संदेह करके ही मत बैठ जाइएगा, बल्कि उसे झुठलाने के लिए खोजबीन कीजिएगा...संभव है आपको भी आपका सच मिल जाए, जैसे मुझे मिला है।

भतीजे से चाची करती मनुहार: रुक जा लप्‍पू यह रावणा का हेलीपैड है...यहीं वो अपना पुष्‍पक विमान उतारता था

Read more...

तिरुपति बालाजी दोनों हाथों से देते हैं धन, बस थोड़ा उनके लिए भी रख दीजिए!

तिरुमला। मेरे पिताजी की एकाएक इच्‍छा हुई कि तिरुपति बालाजी (श्री वेंकटेश्‍वर भगवान) के दर्शन करने चलते हैं। उन्‍होंने मम्‍मी को राजी किया और मेरे छोटे भाई को टिकट बुक करने को कहा। मेरा भाई झुनझुन टिकट बुक कर ही रहा था कि मेरी मां ने उससे कहा कि तुम भी हमारे साथ चलो, यात्रा में कम से कम एक बेटा तो हमलोगों के साथ होना चाहिए। झुनझुन ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि उसे कार्यालय से छुट्टी नहीं मिलेगी, लेकिन भाईजी जा सकते हैं। चूंकि मैंने अभी-अभी नौकरी छोड़ी थी इसलिए मैं एक तरह से खाली था। मैं मम्‍मी-पिताजी के साथ तिरुपति जाने के लिए तैयार था! 

Read more...

द्वादश ज्योतिर्लंगों में से एक है देवघर

शशि रंजन वर्मा , नई दिल्‍ली। पूर्व में बिहार और अब झारंखड में स्थित बैजनाथ धाम, जिसे देवघर यानी देवों का घर कहा जाता है। वह 51 शक्तिपीठों और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है। वास्तव में शक्तिपीठ या ज्योतिर्लिंग उस स्थल के लिए प्रयोग किया जाता है जिसका कोई पौराणिक महत्व हो, जहां तपस्या, योग-साध्ना आदि की गई हो। ऐसे पौराणिक, घार्मिक और पवित्र स्थलों में से एक है देवघर, जहां सालों भर श्रद्धालुओं का तांता तो लगा ही रहता है, परन्तु श्रावण मास में यहां देश-विदेश से श्रद्धालु गण आने लगते है। एक माह का मेला अंतरराष्‍ट्रीय मेला में तब्दील हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मन्नतें अवश्य पूरी होती है।  

Read more...

कामाख्‍या मंदिर, जहां गिरी थी मां सति की योनि

गुवाहाटी। गुवाहाटी शहर में नीलाचल पर्वत की ऊंची चोटी पर स्थित है मां कामाख्‍या का मंदिर। नीलाचल को कामगिरी पर्वत भी कहते हैं। एक बार मां कामाख्‍या मंदिर का दर्शन करने के बाद यात्रियों को अहसास हो जाता है कि असम राज्‍य का इतिहास कितना समृद्ध है। मां कामाख्‍या कामा देवी कामाख्‍या जिन्‍हें मां सती भी कहते हैं, उनका मंदिर है। यह देवी शक्ति के अनेक अवतारों में से एक थीं।

Read more...